# टोंक नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस ने हासिल किया पूर्ण बहुमत, भाजपा को पछाड़कर सचिन पायलट के क्षेत्र में बरकरार रखा दबदबा

> राजस्थान के टोंक नगर परिषद चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने 32 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि भाजपा केवल 19 वार्डों पर सिमट गई है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/tonka-nagara-parishada-chunava-men-congress-ne-hasila-kiya-purna-bahumata-bjp-ko-pachharakara-sachin-pilot-ke-kshetra-men-barakara-32270 · **Language:** Hindi
**Tags:** टोंक नगर परिषद चुनाव, राजस्थान नगर निकाय चुनाव, सचिन पायलट, कांग्रेस, भाजपा, राजस्थान राजनीति

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के हालिया नतीजों में टोंक नगर परिषद से कांग्रेस के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। कांग्रेस पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के इस मजबूत राजनीतिक गढ़ में अपना दबदबा पूरी तरह कायम रखा है। नगर परिषद के इस चुनाव में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जिससे यहाँ एक बार फिर कांग्रेस का बोर्ड बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। टोंक नगर परिषद के कुल 60 वार्डों में से इस बार 59 वार्डों में चुनाव करवाए गए थे, जिनके आधिकारिक चुनाव परिणाम सोमवार को घोषित कर दिए गए हैं। घोषित नतीजों के अनुसार, कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अकेले 32 वार्डों में जीत का परचम लहराया है, जबकि प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टी भाजपा केवल 19 वार्डों तक ही सीमित रह गई है। इसके अलावा, चुनावी मुकाबले में उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और कुल 8 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है।

 

## टोंक नगर परिषद में बहुमत का पूरा गणित

टोंक नगर परिषद में खुद के दम पर सत्ता हासिल करने और नगर परिषद में अपना बोर्ड गठित करने के लिए किसी भी राजनीतिक दल को कम से कम 31 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। सोमवार को सामने आए नतीजों में कांग्रेस ने इस जादुई आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है और 32 वार्डों में जीत दर्ज करके अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया है। बहुमत का यह जादुई आंकड़ा पार करने के बाद अब टोंक नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनना लगभग सुनिश्चित हो गया है। इस शानदार और निर्णायक जीत की खबर मिलते ही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में जश्न का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता टोंक में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के आवास पर एकत्र हुए और वहां जमकर आतिशबाजी की। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और खुशी व्यक्त करते हुए दावा किया कि नगर परिषद में अब कांग्रेस का ही सभापति चुना जाएगा। दूसरी तरफ, भाजपा के खाते में केवल 19 सीटें ही आ सकी हैं, जिसके कारण उसे अब विपक्ष में बैठने पर मजबूर होना पड़ेगा, जबकि 8 निर्दलीय पार्षद भी परिषद की राजनीति में अपनी भूमिका निभाएंगे।

 

## वार्ड संख्या 2 में नहीं हुआ मतदान

टोंक नगर परिषद के प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत कुल 60 वार्ड निर्धारित किए गए हैं। इसके बावजूद, इस बार सभी 60 वार्डों में मतदान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। परिषद के वार्ड नंबर 2 में स्थानीय सीमाओं के निर्धारण यानी परिसीमन के खिलाफ स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष था। इस परिसीमन के विरोध के चलते स्थानीय स्तर पर नागरिकों ने चुनाव का पूरी तरह से बहिष्कार करने का निर्णय लिया था। स्थानीय लोगों के इस कड़े विरोध और बहिष्कार के कारण वार्ड नंबर 2 में मतदान संपन्न नहीं हो पाया। यही मुख्य वजह रही कि निर्वाचन विभाग द्वारा इस बार केवल 59 वार्डों के लिए ही चुनावी प्रक्रिया आयोजित की गई और सोमवार को इन्हीं 59 वार्डों के नतीजे सार्वजनिक किए गए। इस बड़ी जीत के बाद कांग्रेस ने इन चुनाव परिणामों को सीधे तौर पर राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार के प्रति जनता के गहरे अविश्वास और गुस्से से जोड़ दिया है। पार्टी के स्थानीय नेताओं और प्रमुख कार्यकर्ताओं ने इसे राज्य सरकार की नीतियों की विफलता और नाकामी का एक स्पष्ट प्रमाण बताया है। कांग्रेस का कहना है कि टोंक के नागरिकों ने कांग्रेस की नीतियों और उनके स्थानीय विकास कार्यों के प्रति अपनी क्रेडिबिलिटी और आस्था दिखाते हुए यह स्पष्ट जनादेश दिया है।

 

## सचिन पायलट के राजनीतिक गढ़ में कांग्रेस की साख

राजस्थान की राजनीति में टोंक विधानसभा क्षेत्र और जिला लंबे समय से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। सचिन पायलट राजस्थान सरकार में पूर्व उपमुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और वर्तमान समय में वे कांग्रेस पार्टी के पंजाब राज्य के प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में टोंक नगर परिषद के इस चुनावी परिणाम को स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सचिन पायलट के समर्थकों और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं ने इस जीत का सीधा श्रेय उनके व्यक्तिगत प्रभाव, उनकी लोकप्रियता और उनके नेतृत्व को दिया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम को सिर्फ किसी एक बड़े नेता के नाम और प्रभाव के आधार पर नहीं आंका जा सकता है, बल्कि इसमें स्थानीय स्तर के ज्वलंत मुद्दों, मतदाताओं की प्राथमिकताओं और वार्ड स्तर पर खड़े किए गए उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रदर्शन तथा जनसंपर्क की भी बहुत बड़ी और निर्णायक भूमिका रही है।

 

## बोर्ड गठन की आगामी चुनौतियां और विपक्ष की भूमिका

चूंकि कांग्रेस ने अपने दम पर कुल 32 पार्षदों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, इसलिए अब उसे टोंक नगर परिषद में अपना बोर्ड स्थापित करने के लिए किसी भी बाहरी राजनीतिक दल या निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की कोई जरूरत नहीं बची है। परिषद में 8 निर्दलीय पार्षदों के चुने जाने के बावजूद कांग्रेस बहुमत के मामले में पूरी तरह सुरक्षित है। इस स्थिति में अब कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर सर्वसम्मति से नए सभापति के नाम पर मुहर लगाने और बोर्ड के गठन की आगे की औपचारिक प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा करने की होगी। इस परिणाम ने जिला स्तर की राजनीति में कांग्रेस पार्टी के कैडर को नया उत्साह दिया है और संगठन को अधिक मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के लिए 19 सीटों का यह परिणाम एक बड़ा झटका है और यह स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले समय में भाजपा को टोंक नगर परिषद के भीतर एक मजबूत और सजग विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करना होगा।

## इसका आप पर असर
टोंक नगर परिषद के इस चुनाव परिणाम का सीधा असर स्थानीय प्रशासन की स्थिरता और नागरिक विकास कार्यों की गति पर पड़ेगा।

  - **टोंक के निवासियों के लिए:** स्थानीय स्तर पर एक मजबूत और स्पष्ट बहुमत वाली नगर परिषद मिलने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। कांग्रेस के पास स्वतंत्र बहुमत होने के कारण विकास प्रस्तावों को पारित करने में राजनीतिक गतिरोध नहीं होगा।

  - **वार्ड 2 के नागरिकों के लिए:** चुनाव बहिष्कार के बाद अब नए बोर्ड पर परिसीमन के मुद्दे को सुलझाने का बड़ा दबाव रहेगा। स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे।

  - **राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए:** इस परिणाम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत होगा और आगामी चुनावों के लिए उनकी सक्रियता बढ़ेगी। वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं को अपनी चुनावी रणनीति में जमीनी स्तर पर बदलाव करने होंगे।

  - **विकास कार्यों की निरंतरता:** परिषद में नया सभापति चुने जाने के बाद शहर की सफाई, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेंगे। निर्वाचित पार्षद अब अपने-अपने वार्डों में सीधे जवाबदेह होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
टोंक नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस की जीत और भाजपा की सीमित सीटों के पीछे कई स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक कारण रहे हैं।

  - **सचिन पायलट का मजबूत प्रभाव:** टोंक लंबे समय से कांग्रेस नेता सचिन पायलट का राजनीतिक गढ़ रहा है, जिनका व्यक्तिगत प्रभाव इस जीत का मुख्य कारक बना। पायलट के समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनकी साख को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।

  - **वार्ड 2 का चुनाव बहिष्कार:** परिसीमन के विरोध में वार्ड संख्या 2 के मतदाताओं द्वारा चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार किया गया, जिससे कुल 59 सीटों पर ही मतदान हुआ। इस प्रशासनिक असंतोष ने भी स्थानीय चुनाव के माहौल और समीकरणों को प्रभावित किया।

  - **एंटी-इन्कंबेंसी और स्थानीय मुद्दे:** कांग्रेस ने राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के खिलाफ जनता के असंतोष और स्थानीय निकाय स्तर पर विकास से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से भुनाया। पार्टी ने इस चुनाव को राज्य सरकार की विफलता के रूप में प्रस्तुत करने में सफलता पाई।

## सवाल-जवाब

### 1. टोंक नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस ने कितनी सीटें जीती हैं?
कांग्रेस ने टोंक नगर परिषद चुनाव में कुल 32 वार्डों में जीत दर्ज की है और स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।

### 2. भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों को इस चुनाव में कितनी सीटें मिलीं?
इस चुनाव में भाजपा को 19 सीटों पर जीत मिली है, जबकि 8 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे हैं।

### 3. टोंक नगर परिषद के वार्ड नंबर 2 में मतदान क्यों नहीं हो सका?
वार्ड नंबर 2 में स्थानीय परिसीमन के विरोध में नागरिकों ने मतदान का बहिष्कार किया था, जिसके कारण वहां चुनाव नहीं हुआ।

### 4. टोंक नगर परिषद में स्वतंत्र रूप से बोर्ड बनाने के लिए कितने बहुमत की आवश्यकता थी?
टोंक नगर परिषद में बोर्ड बनाने के लिए कुल 31 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता थी, और कांग्रेस ने 32 सीटें जीतकर इसे पार कर लिया।

### 5. सचिन पायलट का इस चुनाव से क्या संबंध है?
टोंक को राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है, इसलिए कांग्रेस समर्थक इस परिणाम को उनके प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं।

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