त्योहारी सीजन में कम बजट में चमकाएं अपना आशियाना, पारंपरिक और मॉडर्न सजावट के बेहतरीन तरीके त्योहारों के अवसर पर घर को आकर्षक लुक देने के लिए गेंदे के फूलों, फेयरी लाइट्स और पारंपरिक तोरण का संतुलन बनाकर सजावट की जा सकती है। डेकोर एक्सपर्ट शालू तिवारी ने बताया कि किस तरह कम खर्च में पूजा स्थल, प्रवेश द्वार और दीवारों को भव्य रूप दिया जा सकता है। त्योहारों का समय आते ही हर परिवार अपने आशियाने को संवारने और एक नया रूप देने की तैयारियों में जुट जाता है। मौजूदा दौर में घरों के इंटीरियर और बाहरी हिस्सों को सजाने के लिए क्लासिक रीति-रिवाजों और आधुनिक सजावटी शैलियों का एक बेहद खूबसूरत तालमेल देखा जा रहा है। पारंपरिक गेंदे के फूलों की सुगंधित लड़ियों से लेकर सूक्ष्म रोशनी बिखेरने वाली फेयरी लाइट्स तक, सजावट के ये रचनात्मक विकल्प घर के कोने-कोने को रोशन करने के साथ पर्व के उल्लास को कई गुना बढ़ा रहे हैं। दीवारों पर फूलों और रोशनी का अनोखा संगम घर की सादी दीवारों को जीवंत बनाने के लिए इन दिनों पीले और नारंगी गेंदे के फूलों की लड़ियों के साथ हल्की सुनहरी चमक वाली फेयरी लाइट्स लगाने का चलन काफी लोकप्रिय हो रहा है। ताजे फूलों के प्राकृतिक रंगों और सुनहरी रोशनी का यह संयोजन घर को एक राजसी और शांत एहसास प्रदान करता है। इस तरीके की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अधिक बजट खर्च किए बिना ही पूरे कमरे का कायाकल्प हो जाता है। कम लागत में मिलने वाला यह शानदार परिणाम ही लोगों को इस शैली की ओर तेजी से आकर्षित कर रहा है। पूजा स्थल और प्रवेश द्वार की भव्यता सजावट से जुड़ी उपयोगी ट्रिक्स और सुझाव देने वाली एक्सपर्ट शालू के अनुसार, दीवारों पर आध्यात्मिक चित्रों को स्थापित करके उनके किनारों पर नफासत भरी लाइटिंग की व्यवस्था करने से परिवेश में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से घर के पूजा घर या मंदिर के इर्द-गिर्द इस तरह की गई सजावट त्योहारी गरिमा को और अधिक बढ़ा देती है। इसके अतिरिक्त, मंगल कलश, पवित्र नारियल, मोर पंख और ताजे सुगंधित फूलों का समायोजन करके भी घर को नया निखार दिया जा सकता है। प्रवेश द्वार और पूजा स्थल पर की गई ऐसी सजावट न केवल आने वाले अतिथियों का मन मोह लेती है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप घर में शुभता और पारंपरिक उल्लास का भी संचार करती है। प्राकृतिक फूलों की रंगोली और जलते दीयों की छटा दिवाली जैसे बड़े पर्व पर फर्श को सजाने के लिए रासायनिक रंगों के स्थान पर ताजे फूलों से बनी रंगोली को प्राथमिकता दी जा रही है। फर्श अथवा दीवारों की चौखट के पास लाल और पीले गेंदे के फूलों के साथ ताजी गुलाब की पंखुड़ियों को जोड़कर गोलाकार रंगोली तैयार की जाती है। इस पुष्प रंगोली के बिल्कुल मध्य में एक जलता हुआ पारंपरिक दीया स्थापित करने से उसकी आभा देखते ही बनती है। सिंथेटिक पाउडर के मुकाबले फूलों से तैयार की गई रंगोली न सिर्फ प्राकृतिक और सौम्य दिखती है, बल्कि फूलों की भीनी-भीनी महक पूरे घर के वातावरण को ताजी ऊर्जा से भर देती है। इन सरल और असरदार तरीकों से पूरे घर को भव्य पारंपरिक रूप दिया जा सकता है। गमलों और हरियाली के बीच फेयरी लाइट्स की चमक घर के मुख्य द्वार, बालकनी या बरामदे में रखे हरे-भरे इनडोर और आउटडोर पौधों के गमलों को फेयरी लाइट्स के जरिए सजाने का ट्रेंड भी काफी पसंद किया जा रहा है। सघन हरी पत्तियों और शाखाओं के बीच से छनकर आती टिमटिमाती रोशनी घर के पूरे माहौल को प्राकृतिक ताजगी और आधुनिक आकर्षण देती है। शाम ढलते ही जब गमलों में लगी ये लाइट्स जलती हैं, तो यह नजारा बेहद सुकून देने वाला होता है और त्योहार की रातों में घर के बाहरी हिस्से की शोभा को दोगुना कर देता है। पारंपरिक तोरण, घंटियां और सजावटी लटकन मुख्य दरवाजों की चौखट और छत के किनारों को सजाने के लिए आम के ताजे पत्तों और गेंदे के फूलों से गूंथे गए तोरण के साथ छोटी घंटियों और खूबसूरत लटकनों का प्रयोग किया जा सकता है। सनातन मान्यताओं में तोरण को घर में सुख, समृद्धि और शुभ ऊर्जा के आगमन का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही, यह प्रवेश द्वार को गरिमामय बनाने और त्योहार के पावन मौके पर घर आने वाले मेहमानों के हार्दिक स्वागत की एक बेहद सुंदर सांस्कृतिक परंपरा भी है। डेकोर एक्सपर्ट के सुरक्षा और ताजगी से जुड़े सुझाव गृह सज्जा से जुड़ी विशेषज्ञ शालू तिवारी का स्पष्ट कहना है कि घर सजाते समय रंगों के चयन और रोशनी की तीव्रता के बीच एक सटीक संतुलन बनाए रखना सबसे अहम है। बिजली से चलने वाली लाइट्स और झालर लगाते वक्त तारों की सुरक्षा और वायरिंग का पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के हादसे की गुंजाइश न रहे। इसके साथ ही, फूलों की सजावट करते समय यह ध्यान रखें कि ताजे फूलों को मुख्य कार्यक्रम या पूजा शुरू होने से कुछ देर पहले ही लगाया जाए। ऐसा करने से फूल लंबे समय तक मुरझाते नहीं हैं और उनकी ताजगी व खिला हुआ रूप पूरे उत्सव के दौरान बना रहता है। इसका आप पर असर त्योहारों पर घर की सजावट को लेकर यह जानकारी पाठकों को कम खर्च में सुरुचिपूर्ण और सुरक्षित बदलाव करने का व्यावहारिक रास्ता दिखाती है। • बजट की बचत: महंगे सजावटी सामानों के स्थान पर गेंदे के फूलों और फेयरी लाइट्स के इस्तेमाल से खर्च काफी कम हो जाता है। इससे पाठक सीमित बजट में भी अपने पूरे घर को नया और भव्य लुक दे सकते हैं। • घरेलू सुरक्षा: बिजली की वायरिंग और झालर लगाते समय सावधानी बरतने से त्योहारी भागदौड़ में किसी भी तरह के शॉर्ट सर्किट या हादसे से बचा जा सकता है। पाठक अपनी सजावट में तारों को सुरक्षित दूरी पर व्यवस्थित कर सकते हैं। • प्राकृतिक ताजगी: सिंथेटिक केमिकल रंगों के बजाय ताजे फूलों की रंगोली बनाने से घर का वातावरण स्वच्छ और सुगंधित बना रहता है। इससे एलर्जी या फर्श खराब होने की समस्या से भी मुक्ति मिलती है। • सजावट की लंबी उम्र: पूजा शुरू होने से ठीक पहले ताजे फूल लगाने के सुझाव से सजावट पूरे कार्यक्रम के दौरान खिली-खिली रहती है। पाठक अपने समय और मेहनत का सही तालमेल बिठाकर ताजगी बरकरार रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ त्योहारों के दौरान घर को नए सिरे से सजाने की परंपरा धार्मिक आस्था, सामाजिक मेलजोल और आधुनिक जीवनशैली के सुंदर संगम से प्रेरित है। • सांस्कृतिक मान्यताएं: सनातन परंपराओं के अनुसार त्योहारों पर तोरण, कलश और आम के पत्तों से घर को सजाना सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत माना जाता है। इसी विश्वास के चलते लोग मुख्य प्रवेश द्वार और पूजा स्थल की सजावट को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। • प्राकृतिक और केमिकल-मुक्त रुझान: हाल के वर्षों में लोग रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए ताजे फूलों की रंगोली और प्राकृतिक सजावटी वस्तुओं को तेजी से अपना रहे हैं। यह बदलाव स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल माहौल बनाने की चाहत से उपजा है। • बजट अनुकूल सजावट की मांग: आधुनिक समय में लोग महंगे रेडीमेड डेकोरेशन की जगह फेयरी लाइट्स और गेंदे के फूलों का इस्तेमाल करके कम लागत में ज्यादा आकर्षक रूप पाना चाहते हैं। इस वजह से पारंपरिक तत्वों में आधुनिक लाइटिंग जोड़ने का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ा है। सवाल-जवाब 1. त्योहारी सजावट में दीवारों को आकर्षक लुक कैसे दिया जा सकता है? दीवारों पर गेंदे के फूलों की लड़ियों के साथ हल्की सुनहरी फेयरी लाइट्स लगाकर कम खर्च में शानदार लुक पाया जा सकता है। 2. पूजा स्थल के आसपास किस तरह की सजावट करने की सलाह दी गई है? धार्मिक तस्वीरों के पास सुंदर लाइटिंग करने के साथ कलश, नारियल, मोर पंख और ताजे फूलों से सजावट करने की सलाह दी गई है। 3. केमिकल रंगोली की जगह फूलों की रंगोली क्यों बेहतर मानी जाती है? फूलों की रंगोली पूरी तरह प्राकृतिक दिखती है और फूलों की भीनी-भीनी खुशबू से घर का वातावरण बेहद ताजगी भरा हो जाता है। 4. ताजे फूलों की सजावट करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए? फूलों को सजावट शुरू करने से कुछ देर पहले ही लगाना चाहिए ताकि वे लंबे समय तक खिले और ताजे नजर आएं। 5. प्रवेश द्वार पर आम के पत्तों और फूलों का तोरण क्यों लगाया जाता है? तोरण को घर में सुख, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है और यह अतिथियों के पारंपरिक स्वागत का जरिया है। 6. गमलों को सजाने के लिए क्या नया तरीका अपनाया जा रहा है? गमलों में लगे हरे-भरे पौधों के चारों तरफ फेयरी लाइट्स लपेटने से शाम के समय हरियाली के बीच चमकता हुआ शानदार नजारा मिलता है। https://trendkia.com/rajasthan/tyohari-sijana-men-kama-bajata-men-chamakaen-apana-ashiyana-parnparika-aura-modarna-sajavata-ke-behatarina-tarike-56206 TrendKia — Har trend, sabse pehle.