उदयपुर का खेरवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना मौत का जाल, गिरी छत की पपड़ी मानसून की दस्तक के साथ ही उदयपुर के खेरवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जर्जर इमारत के चलते एक बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल की लेखा शाखा की छत का प्लास्टर अचानक गिरने से वहां हड़कंप मच गया। हर साल मानसून की शुरुआत के साथ ही सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना एक सामान्य बात हो गई है। सरकारी स्कूलों से लेकर अस्पतालों तक, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनके रखरखाव की पोल पहली बारिश के साथ ही खुल जाती है। उदयपुर जिले के खेरवाड़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की ताजा घटना ने इन दावों को पूरी तरह से खोखला साबित कर दिया है। यहां मरीज और डॉक्टर खुद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि अस्पताल की इमारत अब जर्जर हो चुकी है। लेखा शाखा में बाल-बाल बची जान खेरवाड़ा सीएचसी के भीतर स्थित लेखा शाखा के कमरे में एक भयावह घटनाक्रम देखने को मिला। कमरे की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। गनीमत यह रही कि उस समय वहां कोई मौजूद नहीं था। शाखा में कार्यरत कर्मचारी कुछ पल पहले ही अपने काम के सिलसिले में दूसरे कमरे में गए थे। यदि वे अपनी डेस्क पर बैठे रहते, तो एक बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। प्लास्टर के भारी टुकड़ों के गिरने से वहां रखा सीलिंग फैन पूरी तरह टूट गया और कुर्सियां व अन्य फर्नीचर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। सुरक्षा पर सवाल और डर का साया इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक दहशत का माहौल रहा। कर्मचारियों ने तुरंत उस हिस्से को खाली करवा दिया और किसी को भी वहां जाने से रोक दिया। अस्पताल प्रशासन के सामने इस घटना के बाद कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। कुछ समय पहले ही उदयपुर शहर के एक अन्य सरकारी अस्पताल में भी छत का हिस्सा गिरने से एक डॉक्टर के घायल होने की खबर सामने आई थी। ऐसी घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि अस्पतालों के भवनों का रख-रखाव और समय पर मरम्मत करने की दिशा में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। मानसून में बढ़ जाता है खतरा मानसून के दौरान मरीजों की भीड़ अस्पतालों में बढ़ जाती है, लेकिन ऐसी बदहाल इमारतें इलाज के लिए आने वाले लोगों के लिए किसी जोखिम से कम नहीं हैं। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार, भवन की छतों में पहले से ही कई दरारें देखी जा रही हैं और बारिश के दिनों में छत से पानी का रिसाव होना आम बात है। नियमित रखरखाव के अभाव में ये दरारें गहरी होती जा रही हैं, जो बड़े हादसों को न्योता दे रही हैं। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्रशासन को केवल दावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र का भौतिक निरीक्षण कर तत्काल मरम्मत का कार्य शुरू करना चाहिए ताकि मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों की जान सुरक्षित रह सके। इसका आप पर असर भारत में: सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जाने से पहले अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और भवन की जर्जर स्थिति होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। उदयपुर में: खेरवाड़ा सीएचसी के आसपास के निवासियों और वहां जाने वाले मरीजों को जर्जर छतों और दीवारों से सावधान रहना चाहिए। सवाल-जवाब 1. उदयपुर के खेरवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्या हुआ? अस्पताल की लेखा शाखा में अचानक छत का प्लास्टर भरभराकर गिर गया, जिससे वहां लगा पंखा और अन्य सामान टूट गया। 2. क्या इस घटना में कोई घायल हुआ? नहीं, कोई घायल नहीं हुआ क्योंकि घटना से कुछ सेकंड पहले ही कर्मचारी कमरे से बाहर चले गए थे। 3. क्या पहले भी ऐसी कोई घटना हुई है? हां, कुछ समय पहले उदयपुर शहर के एक अन्य सरकारी अस्पताल में भी छत का हिस्सा गिरने से एक डॉक्टर घायल हो गए थे। 4. अस्पताल में किस तरह की अन्य समस्याएं बताई गई हैं? कर्मचारियों के अनुसार, छत में कई जगह दरारें हैं और बारिश के दौरान पानी का रिसाव भी होता है। https://trendkia.com/rajasthan/udaipur-ka-kherwara-samudayika-svasthya-kendra-bana-mauta-ka-jala-giri-chhata-ki-papari-6552 TrendKia — Har trend, sabse pehle.