उदयपुर के 450 साल पुराने महालक्ष्मी मंदिर में धनतेरस पर उमड़ी भारी भीड़, मोगरे की सुगंध से महका दरबार उदयपुर में धनतेरस के मौके पर प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस ऐतिहासिक स्थल पर पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उदयपुर के भट्टियानी चौहट्टा इलाके में स्थित ऐतिहासिक महालक्ष्मी मंदिर में धनतेरस के पावन अवसर पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। लोग देवी के दर्शन कर अपने जीवन में सुख और समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं। इस प्राचीन स्थल पर पांच दिवसीय दीपोत्सव का भव्य आगाज हो चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया है। मोगरे के फूलों से हुआ भव्य श्रृंगार इस पावन पर्व पर देवी महालक्ष्मी का मनमोहक श्रृंगार मोगरे के फूलों से सजाया गया है। फूलों की भीनी खुशबू से पूरा प्रांगण महक उठा है और आने वाले लोग देवी के गज लक्ष्मी स्वरूप को निहारकर मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। यह दिव्य रूप मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष समिति दीपावली और अन्नकूट के दौरान भारी जनसैलाब जुटने की उम्मीद को ध्यान में रखते हुए खास इंतजाम किए गए हैं। भक्तों को बिना किसी परेशानी के दर्शन लाभ मिल सके, इसके लिए श्रीमाली जाति संपत्ति व्यवस्था ट्रस्ट ने इक्कीस सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह टीम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मंदिर परिसर की تمام व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चला रही है। पाँच दिनों तक चलेगा दीपोत्सव आस्था के इस बड़े केंद्र पर धनतेरस से शुरू हुआ यह धार्मिक अनुष्ठान आने वाले पांच दिनों तक धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दौरान दीपावली और अन्नकूट जैसे बड़े अवसरों पर विशेष पूजा-अर्चना और भव्य महाआरती के कार्यक्रम संपन्न किए जाएंगे। इसका आप पर असर धनतेरस और दीपोत्सव के दौरान स्थानीय बाजारों और धार्मिक स्थलों पर भारी भीड़ के कारण यातायात और आवाजाही प्रभावित हो सकती है। • भारत में: देश भर के प्रमुख मंदिरों में धनतेरस और दीपावली के दौरान विशेष भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दिशा-निर्देश लागू किए जाते हैं। • उदयपुर में: स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को भट्टियानी चौहट्टा क्षेत्र में आवाजाही के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा प्रबंधों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ धनतेरस के पावन अवसर पर प्राचीन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने के पीछे धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इस दौरान मां लक्ष्मी के दर्शन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। • धार्मिक परंपरा: धनतेरस को धन, वैभव और समृद्धि की प्राप्ति का मुख्य दिन माना जाता है, जिसके कारण लोग प्राचीन मंदिरों में पहुंचकर अनुष्ठान करते हैं। • प्रशासनिक तैयारी: त्योहारों के दिनों में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय ट्रस्ट और प्रशासन मिलकर विशेष समितियों का गठन करते हैं। सवाल-जवाब 1. उदयपुर का महालक्ष्मी मंदिर कहाँ स्थित है? यह मंदिर उदयपुर के भट्टियानी चौहट्टा क्षेत्र में स्थित है। 2. यह मंदिर कितना पुराना है? यह प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर करीब 450 साल पुराना है। 3. धनतेरस पर मंदिर में क्या विशेष सजावट की गई है? इस अवसर पर माता महालक्ष्मी का श्रृंगार मोगरे के फूलों से किया गया है। 4. भीड़ प्रबंधन के लिए किस समिति का गठन किया गया है? श्रीमाली जाति संपत्ति व्यवस्था ट्रस्ट की ओर से 21 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। 5. मंदिर में दीपोत्सव कितने दिनों तक चलेगा? यह दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर आगामी पांच दिनों तक मनाया जाएगा। https://trendkia.com/rajasthan/udaipur-ke-450-saal-purane-mahalakshmi-mandir-mein-dhanteras-par-umdi-bhari-bheed-57112 TrendKia — Har trend, sabse pehle.