उदयपुर के कन्हैयालाल मर्डर केस में राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त रुख, 5 आरोपियों की जमानत अर्जियां नामंजूर राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड के पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। एनआईए की दलीलों के बाद अदालत ने आरोपियों को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। उदयपुर में हुए बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड से जुड़े प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में नामजद पांच आरोपियों की तरफ से पेश की गई नियमित जमानत याचिकाओं को पूरी तरह नामंजूर कर दिया है। जेल में बंद इन आरोपियों ने रिहाई की गुहार लगाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने पूरे मामले की गंभीरता और जांच एजेंसी की दलीलों को ध्यान में रखते हुए किसी भी आरोपी को राहत नहीं दी। इस आदेश के बाद सभी पांचों आरोपियों को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। डिवीजन बेंच के सामने हुई मामले की सुनवाई जमानत प्रार्थना पत्रों पर विस्तृत सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य खंडपीठ के समक्ष संपन्न हुई। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की डिवीजन बेंच ने इस संवेदनशील केस से जुड़ी सभी अर्जियों पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष, दोनों की ओर से लंबी कानूनी बहस पेश की गई। अदालत ने केस डायरी के तथ्यों और कानूनी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करने के पश्चात पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज करने का आदेश सुनाया। इन पांच आरोपियों को नहीं मिल सकी राहत अदालत के इस फैसले से जिन पांच आरोपियों को झटका लगा है, उनमें मुस्लिम खान, आशिफ हुसैन और मोहम्मद मोहसिन शामिल हैं। इनके साथ ही मोहसिन खान तथा वसीम अली की तरफ से लगाई गई जमानत याचिकाओं को भी बेंच ने अस्वीकार कर दिया। कन्हैयालाल हत्याकांड के इस मामले में इन कुल पांच आरोपियों ने अलग-अलग आधार बनाकर अपनी रिहाई के लिए याचिकाएं दाखिल की थीं, परंतु उच्च न्यायालय ने किसी भी दलील को स्वीकार करने योग्य नहीं माना और सभी को खारिज कर दिया। जांच एजेंसी एनआईए की ओर से रखी गई दलीलें उदयपुर के इस चर्चित हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए के पास है। घटना के बाद केस की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी पूरी जांच एनआईए को सौंपी गई थी। हाईकोर्ट में जमानत अर्जियों पर सुनवाई के दौरान एनआईए की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर स्नेहदीप ख्यालिया अदालत में उपस्थित हुए। स्पेशल पीपी स्नेहदीप ख्यालिया ने जांच एजेंसी का पक्ष रखते हुए आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों का विवरण दिया। दोनों पक्षों की जिरह पूरी होने के बाद खंडपीठ ने आरोपियों की याचिकाओं को खारिज करने का फैसला सुनाया, जिसके चलते केस में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी। इसका आप पर असर इस अदालती फैसले से उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड के ट्रायल और न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारत में: संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में केंद्रीय एजेंसी एनआईए की कानूनी पैरवी मजबूत बनी हुई है। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि गंभीर आपराधिक कृत्यों में अदालतों से आसानी से राहत नहीं मिलती। • राजस्थान में: राज्य में लंबे समय से चर्चित इस मामले में पांचों आरोपियों को हिरासत में ही रहकर मुकदमों का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय अदालतों में ट्रायल की कार्यवाही अब बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगी। • आरोपियों के लिए: जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद सभी पांचों अभियुक्तों की जेल से रिहाई की उम्मीदों पर फिलहाल रोक लग गई है। अब उन्हें ऊपरी अदालत या आगामी कानूनी विकल्पों पर विचार करना होगा। • पीड़ित पक्ष के लिए: आरोपियों को राहत न मिलने से केस की अभियोजन दिशा मजबूत बनी हुई है। इससे मामले में त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई की प्रक्रिया को मजबूती मिलती है। ऐसा क्यों हुआ यह अदालती आदेश पांच आरोपियों द्वारा जेल से बाहर आने के लिए लगाई गई नियमित जमानत अर्जियों की सुनवाई के बाद आया है। • सीधा कारण: मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने अपनी रिहाई की मांग करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। अदालत ने मामले की गंभीरता और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया। • जांच एजेंसी का विरोध: राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट में जमानत का कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ अपनी दलीलें और कानूनी आधार मजबूती से रखे। • डिवीजन बेंच का निर्णय: मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की पीठ ने प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आरोपियों को राहत देने से मना किया। कोर्ट ने माना कि वर्तमान चरण में इन पांचों आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती। सवाल-जवाब 1. राजस्थान हाईकोर्ट ने किस मामले में पांच आरोपियों की जमानत खारिज की? राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड से जुड़े मामले में पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं। 2. किन पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की गई हैं? अदालत ने मुस्लिम खान, आशिफ हुसैन, मोहम्मद मोहसिन, मोहसिन खान और वसीम अली की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं। 3. हाईकोर्ट की किस बेंच ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की? मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। 4. इस मामले की जांच कौन सी एजेंसी कर रही है? इस हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए कर रही है। 5. हाईकोर्ट में एनआईए की तरफ से किसने पैरवी की? एनआईए की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर स्नेहदीप ख्यालिया ने अदालत में पैरवी की। https://trendkia.com/rajasthan/udaipur-ke-kanhaiya-lal-mardara-kesa-men-rajasthan-high-court-ka-sakhta-rukha-5-aropiyon-ki-jamanata-arjiyan-namnjura-42487 TrendKia — Har trend, sabse pehle.