उदयपुर की मनस्वी अग्रवाल ने रचा इतिहास, नौ महीनों में पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर फहराया तिरंगा राजस्थान के उदयपुर की रहने वाली डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने केवल नौ महीनों के भीतर पांच महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस दौरान गंभीर फ्रॉस्टबाइट के कारण उन्हें अपने पैरों की छह उंगलियां भी गंवानी पड़ीं। राजस्थान के उदयपुर से ताल्लुक रखने वाली अठाईस साल की डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्होंने सिर्फ नौ महीनों के समय में दुनिया के पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर भारत का तिरंगा झंडा फहराने का कारनामा कर दिखाया है। इन पांचों चोटियों में एशिया का प्रसिद्ध माउंट एवरेस्ट, यूरोप, अफ्रीका, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची पर्वत चोटियां शामिल हैं। देश की सबसे तेज महिला पर्वतारोही मनस्वी ने इस बात की जानकारी दी है कि इस शानदार उपलब्धि के साथ वह इतने कम समय सीमा के भीतर पांच महाद्वीपों की चोटियों को जीतने वाली भारत की सबसे तेज महिला पर्वतारोही बन गई हैं। इसके अलावा वह माउंट विन्सन मैसिफ की चोटी पर तिरंगा लहराने वाली राजस्थान राज्य की पहली नागरिक भी बन चुकी हैं। गंभीर फ्रॉस्टबाइट और उंगलियों का नुकसान पर्वतारोहण का यह पूरा सफर मनस्वी के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। माउंट एवरेस्ट को फतह करने के बाद जब वह लगभग चौंसठ सौ मीटर की ऊंचाई से कैंप-दो की तरफ वापस लौट रही थीं, तब उन्हें गंभीर ग्रेड-तीन और ग्रेड-चार का फ्रॉस्टबाइट हो गया। इलाज के लंबे और कठिन दौर के दौरान उन्हें अपने दोनों पैरों की कुल छह उंगलियां कटवानी पड़ीं। इस भयंकर अभियान के दौरान उनके दल के दो साथियों की मौत भी हो गई थी। इन तमाम त्रासदियों और मुश्किलों के बावजूद मनस्वी ने अपना हौसला नहीं खोया। समय पर सही इलाज और जरूरी इंजेक्शन मिलने की वजह से उनके दोनों पैर पूरी तरह से काटने से बचाए जा सके। माउंट आबू से शुरू हुई थी ट्रेनिंग मनस्वी के इस साहसिक पर्वतारोहण सफर की शुरुआत राजस्थान के माउंट आबू स्थित स्वामी विवेकानंद पर्वतारोहण संस्थान से हुई थी। वर्ष दो हजार इक्कीस में जब वह अपने परिवार के साथ माउंट आबू घूमने आई थीं, तब उन्हें इस प्रतिष्ठित संस्थान के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इसी संस्थान से पर्वतारोहण की बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग पूरी की। संस्थान की प्राचार्य राजल पटेल के अमूल्य मार्गदर्शन में उनका यह सफर आगे बढ़ा और अंततः माउंट एवरेस्ट से लेकर अंटार्कटिका के बर्फीले शिखरों तक जा पहुंचा। शिक्षा और खेलकूद में भी हासिल की उपलब्धियां डॉ. मनस्वी केवल पर्वतारोहण के मामले में ही आगे नहीं हैं, बल्कि उन्होंने पढ़ाई लिखाई और खेल के मैदान में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने माइनिंग एंड एनवायरनमेंटल लॉ यानी खनन एवं पर्यावरण कानून विषय में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने दस मीटर राइफल शूटिंग और घुड़सवारी यानी हॉर्स राइडिंग के खेलों में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। माउंट आबू में हुआ भव्‍य स्वागत वापस माउंट आबू पहुंचने पर डॉ. मनस्वी अग्रवाल का बेहद जोरदार और गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस मौके पर उन्होंने संस्थान की प्राचार्या राजल पटेल सहित पूरी टीम का दिल से आभार व्यक्त किया। तमाम तरह की भारीमुश्किलों और शारीरिक हानियों के बावजूद अपने तय लक्ष्य को हासिल करने वाली मनस्वी की यह संघर्ष गाथा आज देश के तमाम युवाओं के लिए अटूट साहस और पक्के इरादे की एक बड़ी मिसाल बन चुकी है। सवाल-जवाब 1. डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने कितने समय में पांच महाद्वीपों की चोटियां फतह कीं? उन्होंने केवल नौ महीनों के भीतर पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया। 2. मनस्वी अग्रवाल मूल रूप से किस स्थान की रहने वाली हैं? वह राजस्थान के उदयपुर शहर की रहने वाली हैं। 3. माउंट एवरेस्ट से लौटते समय मनस्वी के साथ क्या दुर्घटना हुई? कैंप-दो की ओर लौटते समय उन्हें गंभीर ग्रेड-तीन और ग्रेड-चार का फ्रॉस्टबाइट हुआ, जिससे उन्हें अपने पैरों की छह उंगलियां गंवानी पड़ीं। 4. मनस्वी ने पर्वतारोहण की शुरुआती ट्रेनिंग कहां से ली थी? उन्होंने माउंट आबू स्थित स्वामी विवेकानंद पर्वतारोहण संस्थान से बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग ली थी। 5. डॉ. मनस्वी ने शिक्षा के क्षेत्र में कौन सी डिग्री हासिल की है? उन्होंने खनन एवं पर्यावरण कानून यानी माइनिंग एंड एनवायरनमेंटल लॉ में पीएचडी की है। प्रेरणा और सबक डॉ. मनस्वी अग्रवाल का जीवन और उनका यह साहसिक अभियान युवाओं को असंभव दिखने वाले लक्ष्यों को हासिल करने की प्रेरणा देता है। • कड़ा संघर्ष: जीवन में आने वाली गंभीर से गंभीर शारीरिक और मानसिक बाधाओं के बावजूद अपने सपनों के प्रति समर्पित रहना चाहिए। • दृढ़ संकल्प: अत्यधिक ठंड और फ्रॉस्टबाइट जैसी दुर्घटनाओं के बाद भी हार न मानने की मानसिकता सफलता की कुंजी है। • समय प्रबंधन: मात्र नौ महीनों में पांच महाद्वीपों की चोटियों को फतह करना यह साबित करता है कि सटीक योजना से बड़े लक्ष्य हासिल हो सकते हैं। • बहुमुखी प्रतिभा: पढ़ाई, निशानेबाजी और घुड़सवारी के साथ पर्वतारोहण में महारत हासिल करना यह सिखाता है कि शौक और करियर दोनों एक साथ संवारे जा सकते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/udaipur-ki-manasvi-agarwal-ne-racha-itihasa-9-mahinon-men-5-mahadvipon-ki-chotiyan-phataha-38962 TrendKia — Har trend, sabse pehle.