उदयपुर में कृषि वैज्ञानिकों की अनोखी पहल, किसानों को 25 पैसे से भी कम में मिलेंगे सब्जियों के तैयार पौधे राजस्थान के उदयपुर में कृषि महाविद्यालय ने बेहद सस्ती दर पर सब्जियों के तैयार पौधे उपलब्ध कराने की शुरुआत की है, जिससे किसानों का समय और पैसा दोनों बचेगा। राजस्थान के उदयपुर में किसानों की खेती को अधिक सुगम और किफायती बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। वहां के कृषि महाविद्यालय में बेहद कम लागत में विभिन्न प्रकार की सब्जियों के तैयार पौधे विकसित किए जा रहे हैं। इस वैज्ञानिक पहल के आने से किसानों को खेत में बीज बोकर उनके अंकुरित होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे अब सीधे तैयार पौध खरीदकर अपने खेतों में लगा सकते हैं, जिससे उनकी मेहनत और समय दोनों की भारी बचत होगी। किफायती दाम पर मिलेंगी कई प्रकार की सब्जियां कृषि महाविद्यालय के इस विशेष उपक्रम में उन सभी प्रमुख सब्जियों की पौध तैयार की जा रही है जिनकी बाजार में सालभर मांग रहती है। इनमें दैनिक उपयोग में आने वाली सब्जियां जैसे टमाटर, मिर्ची, बैंगन और भिंडी के साथ-साथ शिमला मिर्च, ककड़ी और करेला शामिल हैं। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी न्यूनतम लागत है, जहां एक पौधे की कीमत मात्र 25 पैसे से भी कम बैठती है। इस किफायती दर के कारण छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी संख्या में पौधे खरीदना बेहद आसान हो जाएगा, जिससे उनकी खेती की शुरुआती लागत काफी कम हो जाएगी। 15 से 20 दिनों की मेहनत और समय बचेगा पारंपरिक खेती के तरीकों में किसानों को पहले खेत तैयार कर बीज बोने पड़ते हैं, फिर उनके पौधे बनने तक लगातार सिंचाई और रख-रखाव करना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय और श्रम खर्च होता है। हॉर्टिकल्चर विभाग के डॉक्टर कपिल देव आमेटा के अनुसार, कृषि महाविद्यालय द्वारा तैयार किए गए इन स्वस्थ पौधों के इस्तेमाल से किसानों का लगभग 15 से 20 दिन का बहुमूल्य समय बचेगा। इसके अलावा शुरुआती स्तर पर की जाने वाली कड़ी मेहनत से भी निजात मिलेगी। किसान सीधे इन पौधों की रोपाई कर फसल की देखरेख और अन्य महत्वपूर्ण कृषि कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। मौसमी बदलावों के दौरान यह समय की बचत विशेष रूप से फायदेमंद होती है, क्योंकि कुछ दिनों की देरी भी फसल को बाद में प्रतिकूल मौसम के प्रभाव में ला सकती है। किसानों की आय बढ़ाने और काम आसान करने का लक्ष्य इस विशेष परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी वैज्ञानिक सुविधाएं देना है जो उनके बजट के अनुकूल हों। डॉक्टर कपिल देव आमेटा ने बताया कि हॉर्टिकल्चर विभाग निरंतर इस प्रयास में लगा है कि किसानों को कम खर्च में उन्नत खेती के विकल्प मिलें ताकि वे बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें। यह परियोजना केवल सब्जियों तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। संस्थान अब आने वाले दिनों में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों को भी इसी तरह तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। भविष्य में किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार फल और सब्जियों दोनों की उत्तम गुणवत्ता वाली पौध एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें कहीं और भटकना नहीं पड़ेगा। कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उदयपुर के कृषि महाविद्यालय की यह पहल भारतीय कृषि क्षेत्र में एक व्यावहारिक सुधार साबित हो सकती है। तैयार पौधों की रोपाई से न केवल बीज के खराब होने या अंकुरित न होने का जोखिम कम होता है, बल्कि कम लागत में मिलने वाली पौध छोटे किसानों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करती है। चूंकि आजकल खेती में बढ़ती लागत और मजदूरों की कमी बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं, ऐसे में इस तरह के स्थानीय वैज्ञानिक नवाचार खेती को टिकाऊ और लाभदायक बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इसका आप पर असर यह पहल सब्जी उत्पादकों के सामने आने वाली उच्च प्रारंभिक लागत और श्रम संबंधी बाधाओं को सीधे दूर करती है, जिससे सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधे सुलभ हो जाते हैं। • भारत में: तैयार पौधे मिलने से बीजों की बर्बादी कम होती है और खेती का शुरुआती खर्च घटता है। इससे छोटे किसान अपनी फसल के चक्र को बेहतर बनाकर मुनाफा बढ़ा सकते हैं। • उदयपुर और राजस्थान में: स्थानीय किसान इन कम लागत वाले पौधों को खरीदने के लिए सीधे कृषि महाविद्यालय जा सकते हैं। इससे उन्हें नर्सरी प्रबंधन के 20 दिनों की बचत होगी और फसलें शुरुआती मौसम के नुकसान से बची रहेंगी। ऐसा क्यों हुआ यह परियोजना किसानों को बीज अंकुरित करने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और महंगे बीजों की बर्बादी से बचाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। • महंगे हाइब्रिड बीज: बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीजों की कीमत काफी अधिक होती है, जिसे छोटे किसान वहन नहीं कर पाते। नियंत्रित वातावरण में बड़े पैमाने पर तैयार करने से इन पौधों की प्रति इकाई लागत न्यूनतम हो जाती है। • नर्सरी प्रबंधन का कठिन काम: बीज बोने के बाद शुरुआती तीन हफ्तों तक पौधों को अत्यधिक देखभाल, सही सिंचाई और कीटों से सुरक्षा की जरूरत होती है। कॉलेज द्वारा तैयार पौध मिलने से किसानों का यह जोखिम भरा काम समाप्त हो जाता है। • वैज्ञानिक तकनीकों का प्रसार: हॉर्टिकल्चर विभाग प्रयोगशाला के अनुसंधान को सीधे खेतों तक पहुंचाना चाहता था ताकि स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक कृषि का सीधा लाभ मिल सके। सवाल-जवाब 1. उदयपुर कृषि महाविद्यालय में कौन-सी सब्जियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं? यहाँ टमाटर, मिर्ची, बैंगन, भिंडी, शिमला मिर्च, ककड़ी और करेले के स्वस्थ पौधे तैयार किए जा रहे हैं। 2. यहाँ तैयार मिलने वाले एक पौधे की कीमत कितनी रखी गई है? इस परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे प्रत्येक पौधे की कीमत मात्र 25 पैसे से भी कम है। 3. तैयार पौधों को सीधे खेत में लगाने से किसानों को क्या फायदा होगा? इससे किसानों की लगभग 15 से 20 दिनों की मेहनत बचेगी और वे फसल चक्र को समय से पहले शुरू कर सकेंगे। 4. क्या आने वाले समय में यहाँ फलदार पौधे भी मिलेंगे? हाँ, कृषि महाविद्यालय का हॉर्टिकल्चर विभाग आने वाले समय में किसानों को विभिन्न फलों के पौधे भी उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है। https://trendkia.com/rajasthan/udaipur-men-krishi-vaijnanikon-ki-anokhi-pahala-kisanon-ko-25-paise-se-bhi-kama-men-milenge-sabjiyon-ke-taiyara-paudhe-31980 TrendKia — Har trend, sabse pehle.