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  "title": "उदयपुर नगर निगम चुनाव: कांग्रेस ने उतारे उम्मीदवार, पुराने दिग्गजों और राजनीतिक परिवारों को मिला टिकट",
  "summary": "कांग्रेस ने उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने पुराने पार्षदों, ग्रामीण पृष्ठभूमि के नेताओं और राजनीतिक परिवारों से जुड़े चेहरों पर भरोसा जताया है।",
  "content": "आगामी उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची का ऐलान कर दिया है। इस बार की सूची में पार्टी ने अनुभव और स्थानीय सक्रियता के बीच संतुलन साधने की पूरी कोशिश की है। सूची को देखने से पता चलता है कि कांग्रेस ने संगठन के पुराने और मंझे हुए खिलाड़ियों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने वाले नए चेहरों को भी चुनावी वैतरणी पार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने कई ऐसे चेहरों को दोबारा मैदान में उतारा है जो पहले भी निगम में पार्षद रह चुके हैं ताकि उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाया जा सके। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों से जुड़े नेताओं और राजनीतिक विरासत वाले परिवारों को भी टिकट देकर पार्टी ने अपने पाले में हर वर्ग को साधने का दांव चला है।\n\nपुराने पार्षदों के अनुभव पर भरोसा\nकांग्रेस की इस नई सूची में कुल छह ऐसे चेहरे शामिल हैं जो पूर्व में भी नगर निगम के गलियारों में पार्षद के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पार्टी नेतृत्व ने इन अनुभवी नेताओं की क्षेत्र में मजबूत पकड़ और जनसंपर्क को ध्यान में रखते हुए उन पर फिर से दांव खेला है। इस सूची में अरुण टांक, शंकर चंदेल, हितांशी शर्मा, हिदायत तुल्ला, शिप्रा उपाध्याय और लक्ष्मीनारायण मेघवाल जैसे नाम प्रमुखता से शामिल हैं। इन सभी को पहले भी निगम का कामकाज संभालने का लंबा तजुर्बा रहा है, जिसका फायदा पार्टी इस बार के चुनावी रण में उठाना चाहती है।\n\nदिग्गज परिवार और पूर्व एबीवीपी नेता को जगह\nपार्टी ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले वार्ड 73 से हितांशी शर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। हितांशी शर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास की बहू हैं और वह पहले भी पार्षद रह चुकी हैं। उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है क्योंकि उनके ससुर गोपाल शर्मा भी उदयपुर शहर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान संभाल चुके हैं। इस प्रकार कांग्रेस ने एक बार फिर पुराने राजनीतिक घराने से जुड़े चेहरे पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर, वार्ड 66 से सत्येंद्र को मैदान में उतारकर पार्टी ने सबको चौंकाया है क्योंकि वह अतीत में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें टिकट मिलना स्थानीय समीकरणों और नए चेहरों को तवज्जो देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।\n\nटिकट बंटवारे के बाद भीतरखाने चर्चाएं\nउम्मीदवारों की यह सूची सामने आने के बाद पार्टी के भीतर सुगबुगाहट और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ वरिष्ठ नेताओं को इस बार चुनावी मैदान में जगह नहीं मिल पाई है, जिसमें राजीव सुहालका और राव कल्याण सिंह के नाम प्रमुख हैं जिन्हें टिकट नहीं दिया गया है। इसके अलावा अजय पोरवाल और देवेंद्र माली के नाम भी इस सूची से नदारद हैं, जिसको लेकर कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की बातें हो रही हैं। जानकारों का मानना है कि कई सीटों पर टिकट कटने की वजह से पार्टी के कुछ पुराने नेताओं और उनके समर्थकों में नाराजगी की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, जिसे संभालना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है।\n\nग्रामीण पृष्ठभूमि और स्थानीय समीकरणों को महत्व\nशहरी मतदाताओं के साथ-साथ कांग्रेस ने इस चुनाव में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े नेताओं को भी भरपूर प्रतिनिधित्व दिया है ताकि पंचायत और ग्रामीण इलाकों का प्रभाव भी वोटों में बदला जा सके। इसी रणनीति के तहत बड़गांव के पूर्व सरपंच संजय शर्मा को वार्ड 1 से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं अंबेरी के सरपंच बाबूलाल गमेती को वार्ड 79 से टिकट देकर ग्रामीण और शहरी सीमा से जुड़े इलाकों को साधने की कोशिश की गई है। इसके अलावा सापेटिया के सरपंच पुष्करलाल के बेटे योगेश पुष्करणा को वार्ड 80 से चुनावी समर में उतारा गया है और उप सरपंच रमेश डांगी को भी पार्टी ने टिकट दिया है। इन तमाम फैसलों से यह साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस पुराने अनुभव, मजबूत स्थानीय प्रभाव और ग्रामीण-शहरी संतुलन के जरिए नगर निगम चुनाव में एक कड़ी चुनौती पेश करने की पूरी तैयारी में है।\n\nइसका आप पर असर\nइन चुनावों के परिणामों का सीधा असर स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों की गति पर पड़ेगा।\n\n• भारत में: स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे अक्सर राज्य की जमीनी राजनीतिक हवा और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं का संकेत देते हैं।\n• उदयपुर में: उदयपुर के मतदाताओं के लिए यह चुनाव अपने वार्ड के विकास, सड़क, पानी और सफाई जैसे बुनियादी मुद्दों की दिशा तय करने वाला साबित होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रत्याशियों की सूची क्यों जारी की है?\nकांग्रेस ने आगामी नगर निगम चुनाव 2026 के मद्देनजर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है।\n\n2. सूची में कितने ऐसे नाम हैं जो पहले भी पार्षद रह चुके हैं?\nकांग्रेस की सूची में छह ऐसे नेता शामिल हैं जो पूर्व में भी नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं।\n\n3. हितांशी शर्मा को किस वार्ड से टिकट मिला है?\nहितांशी शर्मा को वार्ड 73 से कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया गया है।\n\n4. हितांशी शर्मा किस राजनीतिक परिवार से जुड़ी हैं?\nहितांशी शर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास की बहू हैं।\n\n5. वार्ड 66 से कांग्रेस ने किसे उम्मीदवार बनाया है?\nवार्ड 66 से सत्येंद्र को कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया है, जो पूर्व में एबीवीपी से जुड़े रहे हैं।\n\n6. किन वरिष्ठ नेताओं को इस बार टिकट नहीं मिला है?\nवरिष्ठ नेता राजीव सुहालका और राव कल्याण सिंह को इस बार सूची में टिकट नहीं दिया गया है।\n\n7. बड़गांव के पूर्व सरपंच संजय शर्मा को किस वार्ड से टिकट मिला है?\nसंजय शर्मा को वार्ड 1 से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया गया है।\n\n8. अंबेरी के सरपंच बाबूलाल गमेती को कौन सा वार्ड मिला है?\nबाबूलाल गमेती को वार्ड 79 से पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-30",
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