# ऊर्जा क्षेत्र में राजस्थान की लंबी छलांग, 34 महीनों में सौर और कुल बिजली क्षमता में भारी वृद्धि

> राजस्थान में बीते 34 महीनों के भीतर बिजली उत्पादन में 10920 मेगावाट और सौर ऊर्जा में 28303 मेगावाट की नई क्षमता जोड़ी गई है, जिससे किसानों को दिन में बिजली और ग्रिड को मजबूती मिली है.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/urja-kshetra-men-rajasthan-ki-lnbi-chhalanga-34-mahinon-men-saura-aura-kula-bijali-kshamata-men-bhari-vriddhi-51218 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान बिजली उत्पादन, सौर ऊर्जा राजस्थान, भजनलाल शर्मा, पीएम कुसुम योजना, डिस्कॉम मुनाफा, विद्युत ग्रिड सब-स्टेशन

राजस्थान के ऊर्जा परिदृश्य में पिछले 34 महीनों के दौरान व्यापक बदलाव देखने को मिला है, जहां पारंपरिक और नवीकरणीय दोनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व विस्तार दर्ज किया गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विद्युत उत्पादन और हरित ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तेज गति से कदम उठाए हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस 34 महीने की समयावधि में राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में 10920 मेगावाट का इजाफा हुआ है. वहीं दूसरी तरफ, राज्य की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 28303 मेगावाट की जबर्दस्त बढ़ोतरी हासिल की गई है. इस व्यापक विस्तार का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और ढाणियों तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली मुहैया कराना और समूचे प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है.

## बिजली उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि और पूर्ववर्ती कार्यकाल से तुलना
विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के मुकाबले अपनी प्रगति का तुलनात्मक ब्योरा सामने रखा है. आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा सरकार के मौजूदा 34 महीनों में जो 10920 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई है, वह पिछली कांग्रेस सरकार के पूरे पांच साल के कार्यकाल में हुई वृद्धि से कहीं अधिक है. पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्षों के पूरे कार्यकाल में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में महज 3958 मेगावाट की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. इस प्रकार मौजूदा सरकार के 34 महीनों का प्रदर्शन पूर्ववर्ती सरकार के पांच सालों के कुल आंकड़े से लगभग पौने तीन गुना ज्यादा बैठता है.

इसके अलावा, यदि दोनों प्रशासनों के शुरुआती 34 महीनों की परस्पर तुलना की जाए, तो मौजूदा गति पांच गुना से भी अधिक निकलती है. प्रशासन का कहना है कि बिजली उत्पादन संयंत्रों की समयबद्ध स्थापना, परियोजनाओं की सतत निगरानी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने की वजह से यह तेज रफ्तार संभव हो सकी है. इस रणनीतिक विस्तार ने प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों के लिए एक मजबूत आधारशिला तैयार की है.

## सौर ऊर्जा का व्यापक विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा का नया दौर
राजस्थान देश में सर्वाधिक धूप पाने वाले भूभागों में शामिल है, और राज्य सरकार ने इस प्राकृतिक संपदा का दोहन करने के लिए सौर परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता दी है. सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 34 महीने के कार्यकाल के दौरान सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में कुल 28303 मेगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है. यह आंकड़ा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की अग्रणी स्थिति को मजबूती से स्थापित करता है.

पूर्ववर्ती कांग्रेस प्रशासन के दौरान सौर ऊर्जा की गति काफी धीमी रही थी. उस दौरान शुरुआती 34 महीनों में केवल 3985 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित हो पाई थी, जबकि पूरे पांच साल के शासनकाल में यह वृद्धि 14878 मेगावाट तक ही पहुंच सकी थी. मौजूदा सरकार के 34 महीनों में हासिल किया गया 28303 मेगावाट का आंकड़ा यह दर्शाता है कि सौर ऊर्जा क्षेत्र को एक नई नीतिगत गति और संस्थागत सहयोग मिला है. स्वच्छ ऊर्जा का यह तीव्र विस्तार प्रदेश के उद्योगों और कृषि को सतत बिजली उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रहा है.

## 26 जिलों के किसानों को दिन में बिजली और ग्रामीण आपूर्ति में सुधार
विद्युत ढांचे के इस सुदृढ़ीकरण का सबसे सीधा लाभ राज्य के कृषि समुदाय को मिला है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के वक्त दो अलग-अलग ब्लॉकों में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है. पूर्व के वर्षों में किसानों को अक्सर रात के समय खेतों की सिंचाई के लिए बिजली मिलती थी, जिससे उन्हें कड़ाके की ठंड, अंधेरे और जंगली जानवरों के खतरों का सामना करना पड़ता था. दिन में बिजली मिलने से किसानों की कार्यकुशलता और जीवन की सुगमता में ठोस सुधार आया है.

सरकार का स्पष्ट मत है कि शहरों और कस्बों से लेकर सुदूर गांवों और ढाणियों तक हर नागरिक को स्थिर वोल्टेज और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलनी चाहिए. इसके साथ ही सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय पर बिजली व्यवस्था में गंभीर कुप्रबंधन, योजनागत लापरवाही और बिजली वितरण निगमों (डिस्कॉम्स) को भारी वित्तीय घाटे में धकेलने का आरोप भी लगाया है. वर्तमान प्रशासन का कहना है कि व्यवस्थागत सुधारों के जरिए पुरानी कमियों को दूर किया जा रहा है.

## पारेषण तंत्र का सुदृढ़ीकरण: नए ग्रिड सब-स्टेशनों की स्थापना
केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे दूरदराज के क्षेत्रों तक सुरक्षित और बिना किसी तकनीकी बाधा के पहुंचाना भी आवश्यक होता है. इसके लिए पारेषण और वितरण नेटवर्क का व्यापक स्तर पर विस्तार किया गया है. राज्य में विभिन्न क्षमताओं के सैकड़ों नए विद्युत ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं

- 400 केवी क्षमता के 2 बड़े ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए गए.
- 220 केवी क्षमता के 9 ग्रिड सब-स्टेशन सफलतापूर्वक चालू किए गए.
- 132 केवी क्षमता वाले 51 ग्रिड सब-स्टेशनों का निर्माण पूरा किया गया.
- 33 केवी क्षमता के 532 सब-स्टेशन विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित किए जा चुके हैं.

इस बुनियादी ढांचे की तुलना जब पिछली सरकार से की जाती है, तो अंतर साफ नजर आता है. कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में 400 केवी का केवल 1 ग्रिड सब-स्टेशन, 220 केवी के 5 सब-स्टेशन और 132 केवी के 38 ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए गए थे. इसी प्रकार 33 केवी के स्तर पर पूर्ववर्ती सरकार ने अपने शुरुआती 34 महीनों में 477 सब-स्टेशनों की स्थापना की थी, जबकि मौजूदा सरकार ने 532 सब-स्टेशन स्थापित कर प्रसारण तंत्र को काफी अधिक सघन बना दिया है.

## पीएम कुसुम योजना में राजस्थान का राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा
कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित पीएम कुसुम योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान ने देश भर में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 5.57 गीगावॉट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता सफलतापूर्वक स्थापित की जा चुकी है, जो पूरे भारत में किसी भी राज्य द्वारा हासिल किया गया सबसे बड़ा आंकड़ा है.

इस महत्वाकांक्षी पहल का सीधा लाभ राज्य के 3 लाख 78 हजार से अधिक किसानों तक पहुंचा है. योजना के माध्यम से किसानों को सोलर पंप लगाने, अपनी बंजर भूमि पर सौर संयंत्र स्थापित करके अतिरिक्त आय अर्जित करने और खेतों की सिंचाई के लिए आवश्यक बिजली की जरूरतों को आत्मनिर्भर तरीके से पूरा करने में भरपूर सहायता मिल रही है.

## डिस्कॉम्स की वित्तीय सेहत में सुधार और आर्थिक प्रगति की राह
बिजली उत्पादन और नेटवर्क विस्तार के समानांतर ही राज्य की बिजली वितरण कंपनियों की माली हालत सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. सरकारी आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि घाटे में चलने वाली वितरण कंपनियां अब मुनाफे की ओर लौट रही हैं. अजमेर डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान 825 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया. वहीं जयपुर डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 931 करोड़ रुपये का शानदार मुनाफा दर्ज किया है.

राज्य सरकार का मानना है कि सौर ऊर्जा, पारेषण ग्रिड और वितरण कंपनियों के वित्तीय पुनरुद्धार से बना यह मजबूत ढांचा राज्य में नए औद्योगिक निवेश को आकर्षित करेगा. निर्बाध बिजली मिलने से स्थानीय उद्योगों को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. सरकार ने इन तमाम उपलब्धियों को विकसित राजस्थान और विकसित भारत के व्यापक विजन को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर करार दिया है.

## इसका आप पर असर
इस व्यापक ऊर्जा विस्तार का सीधा प्रभाव राजस्थान के किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और औद्योगिक इकाइयों की दैनिक गतिविधियों पर पड़ेगा.

- **राजस्थान के किसानों के लिए:** 26 जिलों के किसानों को अब दिन के दो ब्लॉकों में बिजली मिल रही है, जिससे रात में खेतों की सिंचाई करने की मजबूरी और परेशानियां खत्म हो गई हैं. इसके साथ ही 3.78 लाख से अधिक किसान सोलर पंपों और विकेंद्रीकृत सौर संयंत्रों के जरिए अपनी लागत घटाने में सक्षम हुए हैं.
- **ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए:** 532 नए 33 केवी सब-स्टेशन और मजबूत पारेषण तंत्र लगने से वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और अचानक बिजली कटौती की समस्या कम होगी. इससे सुदूर ढाणियों और गांवों में रहने वाले परिवारों को नियमित और सुरक्षित घरेलू बिजली की सुविधा मिलेगी.
- **उद्योगों और नए निवेशकों के लिए:** बिजली उत्पादन और पारेषण ढांचे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से राज्य में विनिर्माण और औद्योगिक गतिविधियों को बिना किसी रुकावट के लगातार बिजली मिल सकेगी. इससे प्रदेश में नए व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
- **वित्तीय स्थिरता और बिजली दरों पर असर:** जयपुर और अजमेर डिस्कॉम्स के मुनाफे में आने से बिजली कंपनियों का घाटा कम होगा. वित्तीय स्थिति बेहतर होने से भविष्य में आम जनता पर अनुचित अतिरिक्त बिजली अधिभार का दबाव कम रहने की उम्मीद है.

## ऐसा क्यों हुआ
राजस्थान में बिजली और सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में यह ऐतिहासिक तेजी लक्षित नीतिगत पहलों, प्रशासनिक सुधारों और प्राकृतिक भौगोलिक अनुकूलता के समन्वित प्रयासों के चलते संभव हुई है.

- **प्राकृतिक क्षमता का नीतिगत दोहन:** राजस्थान में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध सौर विकिरण और बंजर भूमि का लाभ उठाने के लिए बड़े पैमाने पर सौर पार्कों की स्थापना को प्रशासनिक गति दी गई. परियोजनाओं की निरंतर निगरानी और त्वरित मंजूरियों ने 34 महीनों में 28303 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया.
- **कृषि सुधार और दिन में आपूर्ति की प्राथमिकता:** ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की पुरानी मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने विकेंद्रीकृत सौर संयंत्रों और पारेषण लाइनों पर ध्यान केंद्रित किया. इसी नीतिगत फैसले के चलते 26 जिलों में दिन के दो ब्लॉकों में बिजली देना संभव हो सका.
- **पारेषण नेटवर्क में रणनीतिक निवेश:** उत्पादन में होने वाली वृद्धि को सुचारु रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के ग्रिड सब-स्टेशनों का तेजी से विस्तार किया गया. इस बुनियादी ढांचे ने ग्रिड ट्रिपिंग और तकनीकी नुकसान को रोका.
- **वित्तीय पुनर्गठन और प्रबंधन:** डिस्कॉम्स में पिछले वर्षों के दौरान हुए कुप्रबंधन और वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए सख्त वित्तीय अनुशासन लागू किया गया. राजस्व संग्रह और परिचालन दक्षता बढ़ने से अजमेर और जयपुर डिस्कॉम्स मुनाफे में आ सकीं.

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान सरकार ने 34 महीनों में कितनी बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी है?
राजस्थान सरकार ने अपने 34 महीने के कार्यकाल के दौरान कुल बिजली उत्पादन क्षमता में 10920 मेगावाट की बढ़ोतरी की है.

### 2. इस अवधि में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में कितनी वृद्धि हुई है?
राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में कुल 28303 मेगावाट का जबर्दस्त इजाफा दर्ज किया गया है.

### 3. किसानों को दिन में बिजली मिलने की क्या व्यवस्था की गई है?
प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के समय दो अलग-अलग ब्लॉकों में नियमित बिजली उपलब्ध कराई जा रही है.

### 4. पीएम कुसुम योजना के तहत राजस्थान ने क्या उपलब्धि हासिल की है?
राजस्थान ने देश में सबसे अधिक 5.57 गीगावॉट विकेंद्रीकृत सौर क्षमता स्थापित की है, जिससे 3.78 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला है.

### 5. पारेषण तंत्र को मजबूत करने के लिए कितने नए सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं?
राज्य में 400 केवी के 2, 220 केवी के 9, 132 केवी के 51 और 33 केवी के 532 सब-स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं.

### 6. अजमेर और जयपुर डिस्कॉम्स ने कितना मुनाफा दर्ज किया है?
अजमेर डिस्कॉम ने वित्त वर्ष 2023-24 में 825 करोड़ रुपये और जयपुर डिस्कॉम ने वित्त वर्ष 2025-26 में 931 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया.

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