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  "title": "वेतन न मिलने से अलवर के तीन सरकारी अस्पतालों में सफाईकर्मियों का कार्य बहिष्कार, गंदगी से मरीज परेशान",
  "summary": "अलवर के तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मानदेय भुगतान में देरी के विरोध में सफाई कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे चिकित्सा परिसरों में स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है।",
  "content": "राजस्थान के अलवर जिले में स्थित तीन प्रमुख सरकारी चिकित्सालयों में सफाई व्यवस्था शनिवार से पूरी तरह ठप हो गई है। पारिश्रमिक के समय पर भुगतान न होने से आक्रोशित संविदा सफाई कर्मचारियों ने काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुन लिया है। इस कार्य बहिष्कार का सीधा असर राजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय तथा गीतानंद शिशु चिकित्सालय में देखने को मिल रहा है। वार्डों, गलियारों और परिसर में कचरा जमा होने लगा है, जिसके कारण वहां भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी असुविधा व संक्रमण के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, वे अपने काम पर वापस नहीं लौटेंगे।\n\nवेतन में लगातार देरी और आर्थिक संकट\nआंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि तय व्यवस्था और नियमों के मुताबिक प्रत्येक माह की 7 तारीख तक उनके बैंक खातों में वेतन जमा हो जाना चाहिए। इसके विपरीत, लंबे समय से भुगतान में निरंतर विलंब किया जा रहा है। कई बार महीने की 10 तारीख बीत जाने के बाद भी पैसा नहीं आता और कई दफा कर्मचारियों को इससे भी अधिक दिनों तक अपने पारिश्रमिक की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें प्रतिमाह केवल 6 से 7 हजार रुपये का अल्प वेतन मिलता है। आज की महंगाई में इतनी सीमित राशि से पूरे परिवार का भरण-पोषण करना पहले से ही एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जब इस मामूली रकम के मिलने में भी अनिश्चितता बनी रहती है, तो उनके घरों में राशन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक खर्चों का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। अस्पतालों के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों को स्वच्छ रखने की कठिन जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें अपने पसीने की कमाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।\n\nठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल और स्थायी समाधान की मांग\nसफाई कर्मियों ने इस पूरी अव्यवस्था के लिए संबंधित ठेकेदार की मनमानी कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया है। कर्मचारियों का आरोप है कि समय पर भुगतान न मिलने का मुद्दा बार-बार अधिकारियों और प्रबंधन के संज्ञान में लाया गया, मगर हर बार केवल अस्थायी दिलासा देकर मामले को टाल दिया जाता है और कोई दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं बनाई जाती। प्रदर्शनकारी कर्मियों ने मांग रखी है कि मासिक भुगतान चक्र को पारदर्शी और नियमित किया जाए तथा ठेकेदार की मनमानी पर सख्त प्रशासनिक नियंत्रण लगाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लिखित आश्वासन और पुख्ता व्यवस्था नहीं मिलती, कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य केंद्रों के हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।\n\nपहले भी हो चुका है आंदोलन, संवेदनशील वार्डों पर मंडराया संकट\nअलवर के इन सरकारी अस्पतालों में वेतन भुगतान की विसंगतियों को लेकर सफाई कर्मचारियों द्वारा काम रोके जाने की यह पहली घटना नहीं है। पूर्व में भी कर्मचारियों ने ऐसे ही हालातों के चलते प्रदर्शन और हड़ताल का सहारा लिया था। उस समय भी प्रशासन ने नियमित भुगतान का वादा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां नहीं बदलीं। एक बार फिर काम बंद होने से सामान्य अस्पताल के साथ-साथ महिला चिकित्सालय और शिशु चिकित्सालय जैसे बेहद संवेदनशील केंद्रों में स्वच्छता व्यवस्था संकट में आ गई है। नवजात बच्चों और प्रसूताओं के वार्डों में निरंतर साफ-सफाई अत्यंत जरूरी होती है, ऐसे में वहां गंदगी फैलने से संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अब स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं कि वे इस समस्या का निस्तारण कब तक करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nअलवर के सरकारी अस्पतालों में सफाईकर्मियों की हड़ताल से स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं और भर्ती मरीजों की स्वच्छता पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• अलवर में: राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय और शिशु अस्पताल में भर्ती मरीजों को गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ रहा है। नवजात शिशुओं और प्रसूताओं के वार्डों में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है, इसलिए तीमारदारों को अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी।\n• राजस्थान भर में: संविदा कर्मियों के वेतन भुगतान से जुड़े नियम और ठेकेदारों की निगरानी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों में भी सफाई व्यवस्था की निर्भरता और मानदेय नीतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता रेखांकित हुई है।\n• मरीजों और तीमारदारों के लिए: जब तक हड़ताल समाप्त नहीं होती, तब तक अस्पताल परिसरों में संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना होगा। किसी भी आपातकालीन असुविधा की स्थिति में अस्पताल प्रशासन से वैकल्पिक प्रबंध की मांग की जा सकती है।\n• सफाई कर्मचारियों के परिवारों पर: हर महीने मात्र 6 से 7 हजार रुपये कमाने वाले कर्मियों को वेतन न मिलने से दैनिक घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। समय पर भुगतान होने तक इन परिवारों को गंभीर आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअस्पतालों में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का मुख्य कारण नियमित रूप से हर महीने मिलने वाले वेतन में लगातार होने वाली देरी और ठेकेदार की लापरवाही है।\n\n• वेतन भुगतान में निरंतर विलंब: नियमानुसार प्रत्येक माह की 7 तारीख तक मानदेय मिलना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों को 10 तारीख या उससे भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। समय पर भुगतान न मिलने से कर्मचारियों में गहरा असंतोष फैल गया।\n• सीमित मानदेय और बढ़ती आर्थिक तंगी: कर्मचारियों को प्रतिमाह केवल 6 से 7 हजार रुपये का वेतन मिलता है, जिससे परिवार चलाना पहले ही मुश्किल होता है। ऐसे में भुगतान टलने से उनके समक्ष रोजमर्रा के खर्चों का गंभीर संकट पैदा हो गया।\n• ठेकेदार की कार्यप्रणाली और निगरानी का अभाव: सफाई कर्मियों का आरोप है कि ठेकेदार लगातार मनमानी कर रहा है और पूर्व में शिकायतें करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। व्यवस्था में सुधार न होने के कारण कर्मियों को पुनः हड़ताल का कदम उठाना पड़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अलवर के किन अस्पतालों में सफाईकर्मियों ने हड़ताल की है?\nराजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय और गीतानंद शिशु चिकित्सालय में सफाई कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया है।\n\n2. सफाई कर्मचारी हड़ताल पर क्यों गए हैं?\nकर्मचारियों को निर्धारित 7 तारीख तक मासिक वेतन नहीं मिल रहा है और भुगतान में लगातार देरी हो रही है।\n\n3. सफाई कर्मचारियों को प्रतिमाह कितना वेतन मिलता है?\nसफाई कर्मचारियों को हर महीने केवल 6 से 7 हजार रुपये का वेतन मिलता है।\n\n4. कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?\nकर्मचारियों की मांग है कि वेतन भुगतान में हो रही देरी तुरंत रोकी जाए और ठेकेदार की मनमानी पर स्थायी रोक लगाई जाए।\n\n5. हड़ताल से अस्पतालों की व्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है?\nअस्पतालों के वार्डों में कचरा और गंदगी जमा होने लगी है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी और संक्रमण का खतरा हो रहा है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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