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  "type": "article",
  "title": "विसर्जन के दौरान कोटा के कोटड़ी तालाब में नाव पलटने से चार लोग गहरे पानी में डूबे, तलाश जारी",
  "summary": "कोटा के कोटड़ी तालाब में मंगलवार देर रात दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के समय एक लकड़ी की नाव असंतुलित होकर पलट गई, जिसमें सवार सात लोगों में से चार लापता हो गए जबकि तीन तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए।",
  "content": "दुर्गा पूजा उत्सव के समापन पर आयोजित होने वाले प्रतिमा विसर्जन के दौरान राजस्थान के कोटा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मंगलवार की देर रात कोटड़ी तालाब में देवी दुर्गा की प्रतिमा विसर्जित करने पहुंचे लोगों की एक छोटी नाव पानी के बीच अचानक असंतुलित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद उत्सव का माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया और पानी में डूबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।\n\nअनधिकृत विसर्जन स्थल और असुरक्षित नाव बनी हादसे का कारण\nशुरुआती पड़ताल के अनुसार यह पूरी घटना कनाल रोड के समीप स्थित कोटड़ी तालाब क्षेत्र में हुई। यह स्थान प्रशासन द्वारा प्रतिमा विसर्जन के लिए बिल्कुल भी चिन्हित अथवा अधिकृत नहीं किया गया था। वहां मौजूद सात लोग पूजा सामग्री और प्रतिमा को लेकर एक साधारण और पुरानी लकड़ी की नाव में सवार होकर गहरे पानी की तरफ चले गए। पानी के बीच पहुंचते ही भार का संतुलन बिगड़ा और नाव पूरी तरह उलट गई। नाव में सवार सात लोगों में से तीन युवकों को तैरना आता था, इसलिए वे सूझबूझ दिखाते हुए तैरकर किनारे आ गए और अपनी जान बचा ली। दूसरी ओर, बाकी चार लोगों को तैरना नहीं आता था, जिस वजह से वे संभल नहीं पाए और गहरे पानी में डूबकर लापता हो गए।\n\nप्रशासनिक अमला मौके पर डटा, रातभर जारी रहा सघन तलाशी अभियान\nनाव पलटने की जानकारी मिलते ही गोताखोरों और आपदा राहत दस्तों को तत्काल तालाब पर भेजा गया। अंधेरा होने के बावजूद सर्च लाइटों की मदद से पानी के भीतर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। घटनास्थल पर कोटा के जिला कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम समेत तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी देर रात तक मौजूद रहे। अधिकारियों ने तालाब के किनारों पर घेराबंदी कर बचाव दलों को पानी के हर हिस्से की बारीकी से जांच करने के कड़े निर्देश दिए, ताकि लापता लोगों का जल्द से जल्द सुराग मिल सके।\n\nलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घटनास्थल पर पहुंचकर लिया स्थिति का जायजा\nहादसे की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मंगलवार देर रात सीधे कोटड़ी तालाब पहुंचे। उन्होंने मौके पर तैनात अधिकारियों से बचाव कार्य की प्रगति का व्यक्तिगत ब्योरा लिया और राहत कार्यों को बिना रुके जारी रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने वहां मौजूद पीड़ित परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी और संकट की इस घड़ी में हर मुमकिन प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने का पक्का भरोसा दिलाया।\n\nइसका आप पर असर\nयह हादसा धार्मिक आयोजनों के दौरान जलस्रोतों पर बुनियादी सुरक्षा नियमों की अनदेखी के गंभीर खतरों को उजागर करता है।\n\n• कोटा में: स्थानीय प्रशासन अनधिकृत घाटों पर बैरिकेडिंग और निगरानी कड़ी करेगा ताकि लोग प्रतिबंधित जलक्षेत्रों में न जा सकें। नगर निगम विसर्जन के लिए केवल तय मानकों वाले सुरक्षित घाटों के उपयोग की अनिवार्यता को सख्ती से लागू करेगा।\n• भारत भर में: विभिन्न राज्यों में स्थानीय निकायों द्वारा धार्मिक विसर्जन के समय नावों पर लाइफ जैकेट अनिवार्य करने के निर्देश कड़े किए जा सकते हैं। आयोजकों को तय क्षमता से अधिक भार और असुरक्षित नौकाओं के उपयोग पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।\n• आम नागरिकों के लिए: जल निकायों में किसी भी अनुष्ठान के दौरान सुरक्षा जैकेट के बिना नाव की सवारी करने से पूरी तरह बचना चाहिए। गैर-तैराकों को गहरे पानी में जाने वाली छोटी नौकाओं पर चढ़ने से सख्त परहेज करना चाहिए।\n• त्यौहार आयोजकों के लिए: पूजा समितियों को केवल प्रशासन द्वारा प्रमाणित विसर्जन स्थलों और पेशेवर नाविकों की सेवाओं का ही उपयोग करना होगा। नियमों की अनदेखी होने पर दुर्घटना के साथ-साथ गंभीर कानूनी उत्तरदायित्व भी तय हो सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह दुर्घटना असुरक्षित नौका के उपयोग, अनधिकृत स्थान के चयन और जल सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण घटी।\n\n• सीधा कारण: सात लोगों को लेकर पानी में गई छोटी लकड़ी की नाव का संतुलन अचानक बिगड़ गया, जिसके कारण वह बीच तालाब में पलट गई। नाव में वजन का असमान वितरण और अचानक हलचल पलटने की प्राथमिक वजह बनी।\n• अनधिकृत स्थल का चयन: कनाल रोड के पास का यह क्षेत्र प्रशासन द्वारा विसर्जन के लिए चिन्हित नहीं था, जिसके चलते वहां पूर्व से कोई सुरक्षा दल या लाइफ जैकेट का प्रबंध मौजूद नहीं था। सुरक्षा व्यवस्था के अभाव ने जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया।\n• सुरक्षा साधनों और तैराकी की कमी: नाव पर सवार किसी भी व्यक्ति के पास लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं थी। नाव पलटने पर जिन चार लोगों को तैरना नहीं आता था, वे गहरे पानी में चले गए और खुद को बचाने में असमर्थ रहे।\n• आपातकालीन प्रतिक्रिया: सूचना मिलते ही गोताखोरों की टीम ने रात में ही तलाशी अभियान शुरू किया, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों को गति दी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोटा में यह नाव हादसा किस जगह पर हुआ?\nयह हादसा कोटा में कनाल रोड के पास स्थित कोटड़ी तालाब में हुआ, जहां लोग दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए पहुंचे थे।\n\n2. हादसे के समय नाव पर कुल कितने लोग सवार थे?\nनाव में कुल सात लोग सवार थे, जो लकड़ी की एक छोटी नाव में बैठकर गहरे पानी की तरफ गए थे।\n\n3. नाव पलटने के बाद कितने लोग सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे?\nनाव में सवार सात लोगों में से तीन लोग तैरना जानते थे, जिससे वे तैरकर सुरक्षित किनारे तक पहुंच गए।\n\n4. कितने लोग तालाब में लापता हैं?\nचार लोग जिन्हें तैरना नहीं आता था, वे गहरे पानी में डूब गए और उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है।\n\n5. क्या कोटड़ी तालाब विसर्जन के लिए अधिकृत स्थल था?\nप्रशासन के अनुसार यह स्थल विसर्जन के लिए अधिकृत या चिन्हित नहीं किया गया था।\n\n6. घटनास्थल पर कौन से प्रमुख जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहुंचे?\nलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कोटा के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्यों का जायजा लिया।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-21",
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    "कोटा नाव हादसा",
    "कोटड़ी तालाब",
    "दुर्गा विसर्जन",
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