# विशेष तिलक श्रृंगार के लिए 18 घंटे से अधिक समय तक बंद रहेगा प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर, समिति ने जारी किया नया समय

> खाटूश्यामजी मंदिर के कपाट विशेष तिलक श्रृंगार के लिए 16 सितंबर की रात से लगभग 18 घंटे 30 मिनट के लिए बंद रहेंगे। श्रद्धालु 17 सितंबर की शाम से दोबारा बाबा श्याम के दर्शन कर सकेंगे।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/vishesha-tilaka-shrringara-ke-lie-18-ghnte-se-adhika-samaya-taka-bnda-rahega-prasiddha-khatu-shyamji-mndira-samiti-ne-jari-kiya-na-32468 · **Language:** Hindi
**Tags:** खाटू श्याम मंदिर, खाटूश्यामजी मंदिर बंद, श्री श्याम मंदिर कमेटी, राजस्थान पर्यटन, मंदिर का समय, सीकर पर्यटन

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी मंदिर की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अपने यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करने की आवश्यकता है, क्योंकि इस लोकप्रिय मंदिर के कपाट आम जनता के लिए कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाएंगे। यह अस्थायी बंदी 16 सितंबर की रात से शुरू होकर अगले दिन तक जारी रहेगी, जिसके दौरान भक्त बाबा श्याम के दर्शन नहीं कर पाएंगे। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और वे अपनी योजना उसी के अनुरूप बना सकें।

## मंदिर बंद रहने की अवधि और निर्धारित समय
मंदिर प्रबंधन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बुधवार, 16 सितंबर की रात को शयन आरती के बाद रात 10 बजे मंदिर के पट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद अगले दिन यानी गुरुवार, 17 सितंबर को पूरे दिन आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था बंद रहेगी। यह पूरा अंतराल लगभग 18 घंटे 30 मिनट का होगा, जिसे करीब 19 घंटे माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने सभी भक्तों से अनुरोध किया है कि वे इस निर्धारित समय सारणी को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं ताकि उन्हें धाम पहुंचने पर प्रवेश से वंचित न होना पड़े।

## विशेष तिलक श्रृंगार और पूजा की पारंपरिक विधि
इस अस्थायी बंदी का मुख्य कारण मंदिर की एक प्राचीन धार्मिक परंपरा है। श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने इस संबंध में बताया कि पारंपरिक नियमों के अनुसार समय-समय पर बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस पवित्र प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं ताकि पूजा में कोई व्यवधान न आए।

इस विशिष्ट अवधि के दौरान, बाबा श्याम के मस्तक पर चंदन का विशेष लेप लगाया जाएगा और मंत्रोच्चार के साथ वैदिक पूजा संपन्न की जाएगी। इस अत्यंत गोपनीय और श्रद्धापूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के दौरान गर्भगृह में केवल मुख्य पुजारी और अधिकृत सेवादारों को ही रहने की अनुमति होती है। इस विशेष श्रृंगार के पूरा होने के बाद ही आम जनता को प्रवेश की अनुमति दी जाती है।

## मंदिर के पट दोबारा खुलने का समय
विशेष पूजा और श्रृंगार का कार्य संपन्न होने के बाद, गुरुवार, 17 सितंबर की शाम को मंदिर के द्वार फिर से खोल दिए जाएंगे। श्रद्धालु शाम को 4:30 बजे होने वाली संध्या आरती के समय से बाबा श्याम के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर कमेटी ने सभी भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर के बंद रहने की इस अवधि के दौरान परिसर में अनावश्यक भीड़ लगाने से बचें। इस समय का ध्यान रखने से श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और वे सुगमता से दर्शन कर सकेंगे।

## बाबा श्याम का पौराणिक इतिहास और महत्व
धार्मिक मान्यताओं में बाबा श्याम को "हारे का सहारा" कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का ही एक रूप माना जाता है। इस आस्था की जड़ें महाभारत काल से जुड़ी हुई हैं। भीम के पोते बर्बरीक जब कौरवों की ओर से युद्ध में भाग लेने के लिए जा रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे उनका शीश दान में मांग लिया।

बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश भगवान कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। इस महान त्याग और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को एक अद्भुत वरदान दिया। उन्होंने कहा कि कलियुग में बर्बरीक को उनके स्वयं के नाम यानी 'श्याम' के रूप में पूजा जाएगा। इसके साथ ही वे दुनिया के सभी निराश और हारे हुए लोगों का संबल बनेंगे। इसी वरदान के फलस्वरूप आज देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दरबार में अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और अटूट आस्था के साथ उनके दर्शन करते हैं।

## इसका आप पर असर
यह घोषणा खाटूश्याम मंदिर की यात्रा की योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं को सीधे प्रभावित करती है, जिससे वे अपने समय में बदलाव कर असुविधा से बच सकते हैं।

- **देशभर में:** दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को गुरुवार दोपहर बाद तक मंदिर पहुंचने की योजना टाल देनी चाहिए। इससे वे चिलचिलाती धूप में बंद कपाटों के बाहर लंबी कतारों में खड़े होने से बच जाएंगे।
- **राजस्थान में:** सीकर क्षेत्र के स्थानीय यात्रियों और टूर ऑपरेटरों को 16 और 17 सितंबर के लिए अपने यात्रा कार्यक्रम को रीशेड्यूल करना होगा। इससे 19 घंटे की इस बंदी के दौरान अनावश्यक यात्रा खर्च और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं से बचा जा सकेगा।
- **श्रद्धालुओं के लिए:** भक्त इस बंदी के समय का उपयोग शाम 4:30 बजे कपाट खुलने के समय के अनुसार पहुंचने के लिए कर सकते हैं। इससे वे कपाट खुलते ही आयोजित होने वाली भव्य संध्या आरती में सीधे शामिल हो सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अस्थायी बंदी मंदिर के गर्भगृह के भीतर अत्यधिक पवित्र पारंपरिक अनुष्ठानों को पूर्ण गोपनीयता के साथ संपन्न करने के लिए आवश्यक है।

- **पारंपरिक तिलक श्रृंगार:** एक निश्चित अंतराल पर बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार और पवित्र शुद्धिकरण किया जाता है। इस पारंपरिक प्रथा को पूरा करने के लिए पुजारियों को कई घंटों का समर्पित समय चाहिए होता है।
- **चंदन का लेप:** बाबा श्याम के मस्तक पर शुद्ध चंदन का लेप लगाया जाता है। इस प्राचीन अनुष्ठान को शांत वातावरण में वैदिक मंत्रों के निरंतर जाप के बीच संपन्न करना अनिवार्य होता है।
- **सीमित प्रवेश नियम:** इन वैदिक अनुष्ठानों की पूर्ण पवित्रता बनाए रखने के लिए केवल मुख्य पुजारियों और अधिकृत मंदिर कर्मचारियों को ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति होती है। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया संपन्न होने तक आम जनता का प्रवेश पूरी तरह बंद रखना पड़ता है।

## सवाल-जवाब

### 1. खाटू श्याम मंदिर को अस्थायी रूप से क्यों बंद किया जा रहा है?
बाबा श्याम के पारंपरिक और अत्यंत पवित्र विशेष तिलक श्रृंगार और वैदिक पूजा-अर्चना को संपन्न करने के लिए मंदिर को बंद किया जा रहा है।

### 2. मंदिर बंद होने और दोबारा खुलने की सटीक तारीख और समय क्या है?
मंदिर के कपाट बुधवार रात, 16 सितंबर को रात 10:00 बजे बंद होंगे और गुरुवार दोपहर बाद, 17 सितंबर को शाम 4:30 बजे दोबारा खुलेंगे।

### 3. मंदिर आम जनता के लिए कुल कितने समय तक बंद रहेगा?
मंदिर लगभग 18 घंटे 30 मिनट (करीब 19 घंटे) के लिए श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद रहेगा।

### 4. क्या तिलक श्रृंगार के दौरान श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं?
नहीं, इस अवधि के दौरान आम जनता का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा; केवल मुख्य पुजारियों और अधिकृत सेवादारों को ही अंदर जाने की अनुमति होगी।

### 5. दर्शन के लिए मंदिर के कपाट दोबारा किस समय खुलेंगे?
मंदिर के कपाट गुरुवार, 17 सितंबर को शाम 4:30 बजे संध्या आरती के समय दोबारा खोले जाएंगे।

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