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  "type": "article",
  "title": "पश्चिमी राजस्थान में सूखे से मोठ के दाम दोगुने, बीकानेरी भुजिया और दालों की कीमतें बढ़ने के आसार",
  "summary": "कम बारिश के चलते राजस्थान में मोठ का उत्पादन 60 प्रतिशत तक घट गया है, जिससे अनाज मंडियों में इसके भाव 9,300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने से विश्व प्रसिद्ध बीकानेरी भुजिया महंगी हो सकती है।",
  "content": "पश्चिमी राजस्थान में मानसून की कम बारिश ने कृषि क्षेत्र के साथ-साथ अनाज मंडियों के गणित को भी पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। बारिश के अभाव में प्रदेश की प्रमुख दलहनी फसल मोठ के उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर इसकी कीमतों पर दिखाई देने लगा है। मंडियों में आवक घटने से मोठ के थोक भाव पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने के करीब पहुंच गए हैं। फसल के इस संकट ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि इससे बीकानेर के प्रसिद्ध खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यदि कच्चे माल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आम उपभोक्ताओं की जेब पर बीकानेरी भुजिया और अन्य संबंधित खाद्य पदार्थों के जरिए अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।\n\nमोठ के थोक भावों में आया उछाल, 9300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचे दाम\nअनाज मंडियों में मोठ की आपूर्ति सीमित होने के कारण इसकी कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल जिस समय मोठ के बाजार भाव 4200 रुपये से लेकर 5200 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार कर रहे थे, वहीं इस सीजन में ये दरें उछलकर 8800 रुपये से 9300 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छू चुकी हैं। भावों में आए इस लगभग शत-प्रतिशत के उछाल ने कारोबारियों और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मोठ का उपयोग केवल दाल तक सीमित नहीं है, बल्कि नमकीन और भुजिया निर्माण में यह मुख्य घटक के रूप में इस्तेमाल होता है, इसलिए इसकी महंगाई का असर खाद्य बाजार के बड़े हिस्से पर पड़ना स्वाभाविक है।\n\nफसल उत्पादन में 60 प्रतिशत की बड़ी गिरावट का अनुमान\nउत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। बीकानेर अनाज मंडी संघ के अध्यक्ष जय दयाल डूडी के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्से में बारिश न होने से अकाल जैसी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं। मोठ की फसल पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर होती है और सिंचाई के अन्य साधनों के अभाव में कम बारिश का सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीते वर्ष जहां राज्य में लगभग 50 लाख बोरी मोठ का उत्पादन हुआ था, वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर 20 लाख बोरी से भी नीचे रहने का अनुमान लगाया गया है। इस प्रकार पिछले सीजन की तुलना में इस बार मोठ की पैदावार सिमटकर मात्र 40 प्रतिशत के आसपास ही रह गई है।\n\nबीकानेर और चूरू में होती है 60 फीसदी खेती, किसान संकट में\nराजस्थान में मोठ की कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा सीमित जिलों में केंद्रित है। जय दयाल डूडी ने बताया कि पूरे प्रदेश में मोठ का कुल बुवाई क्षेत्र लगभग 10 लाख हेक्टेयर है। इसमें से करीब 60 प्रतिशत खेती अकेले बीकानेर और चूरू जिलों में की जाती है, जबकि बाकी 40 प्रतिशत बुवाई बाड़मेर और जैसलमेर जैसे शुष्क इलाकों में होती है। इस बार मानसून के आने की उम्मीद में जिन किसानों ने देरी से बुवाई की थी, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है क्योंकि बारिश न होने से उनकी फसलें खेतों में ही सूख गईं। पैदावार घटने से एक तरफ जहां किसानों की आय में भारी गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ मंडियों में माल की किल्लत बनी हुई है।\n\nबीकानेरी भुजिया उद्योग पर लागत का दबाव, खुदरा दामों पर पड़ेगा असर\nमोठ की कीमतों में आई इस तेजी का सीधा प्रभाव बीकानेर के विश्व प्रसिद्ध भुजिया और नमकीन उद्योग पर पड़ने की पूरी संभावना है। बीकानेरी भुजिया के निर्माण में मोठ का बेसन मुख्य सामग्री के रूप में उपयोग किया जाता है। यहां तैयार होने वाला भुजिया न केवल भारत के कोने-कोने में भेजा जाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी भारी मांग रहती है। कच्चे माल के महंगा होने से भुजिया निर्माताओं की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी होना तय है। उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मोठ के भाव इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले समय में भुजिया और मोठ से बनने वाले अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के दामों में वृद्धि करना मजबूरी हो जाएगा, हालांकि इसका अंतिम निर्णय स्थानीय कारोबारियों की व्यापारिक नीतियों पर निर्भर करेगा।\n\nइसका आप पर असर\nइस खबर का सीधा असर आपकी रसोई के बजट और रोजमर्रा के स्नैक्स के खर्च पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: बीकानेरी भुजिया और नमकीन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे देशभर के उपभोक्ताओं को अपने पसंदीदा स्नैक्स के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। पैकेटबंद नमकीन के दाम बढ़ने या समान कीमत में पैकेट का वजन घटने की संभावना है।\n• राजस्थान में: पश्चिमी राजस्थान के किसानों की आय में सीधी गिरावट आई है और उन्हें फसल बर्बादी का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय अनाज मंडियों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिससे नए माल की खरीद और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपश्चिमी राजस्थान में इस सीजन मानसून की अनियमितता और बारिश की भारी कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।\n\n• मानसून की बेरुखी: इस वर्ष बीकानेर, चूरू, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में सामान्य से बहुत कम बारिश दर्ज की गई। मोठ की फसल पूरी तरह से वर्षा जल पर निर्भर रहती है, इसलिए सिंचाई के विकल्प न होने से फसलें प्रभावित हुईं।\n• उत्पादन में भारी गिरावट: बारिश की कमी से बीकानेर संभाग में मोठ का उत्पादन 50 लाख बोरी से घटकर 20 लाख बोरी से नीचे रह गया है। आपूर्ति में 60 प्रतिशत की कमी आने से मंडियों में माल का अभाव हो गया है।\n• मांग और आपूर्ति का असंतुलन: बीकानेरी भुजिया उद्योग में वर्ष भर मोठ की स्थिर मांग बनी रहती है, जबकि बाजार में आवक घटने से कीमतों में दोगुना उछाल आ गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान में मोठ की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?\nपिछले वर्ष जो मोठ 4200 से 5200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, उसके थोक भाव इस बार बढ़कर 8800 से 9300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।\n\n2. इस साल राज्य में मोठ का कुल कितना उत्पादन होने का अनुमान है?\nइस सीजन में मोठ का उत्पादन 20 लाख बोरी से कम रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 50 लाख बोरी के उत्पादन की तुलना में करीब 40 प्रतिशत ही है।\n\n3. राजस्थान में मोठ की खेती मुख्य रूप से किन जिलों में की जाती है?\nप्रदेश में करीब 60 प्रतिशत मोठ की खेती बीकानेर और चूरू जिलों में होती है, जबकि शेष 40 प्रतिशत बाड़मेर और जैसलमेर में की जाती है।\n\n4. मोठ के महंगे होने से बीकानेरी भुजिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?\nभुजिया बनाने में मोठ मुख्य कच्चा माल है, इसलिए लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में बीकानेरी भुजिया की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं।\n\n5. राजस्थान में मोठ का कुल बुवाई क्षेत्र कितना है?\nराजस्थान में मोठ का कुल बुवाई क्षेत्र लगभग 10 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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    "बीकानेर न्यूज़",
    "मोठ के दाम",
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