डेटिंग की दुनिया में क्या है बेज फ्लैग, जो पार्टनर को न बनाती है विलेन और न ही देवदूत रिलेशनशिप में रेड और ग्रीन फ्लैग के बाद अब सोशल मीडिया पर बेज फ्लैग का नया चलन तेजी से वायरल हो रहा है। यह पार्टनर की उन अजीब और मजाकिया हरकतों को दर्शाता है जो नुकसानदेह नहीं होतीं बल्कि रिश्ते में एक अलग ही रंग भर देती हैं। रिलेशनशिप की दुनिया में आमतौर पर रेड फ्लैग यानी खतरे की घंटी और ग्रीन फ्लैग यानी एक अच्छे और समझदार पार्टनर की पहचान के बारे में तो आपने बहुत कुछ सुना होगा। लेकिन इन दिनों इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक बिल्कुल नया शब्द तेजी से ट्रेंड कर रहा है जिसे बेज फ्लैग कहा जाता है। इसे सुनकर मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर यह कौन सा नया झंडा बाजार में आ गया है। आपको बता दें कि यह न तो आपके साथी को किसी खलनायक की श्रेणी में खड़ा करता है और न ही उन्हें कोई देवदूत साबित करने की कोशिश करता है। यह असल में आपके पार्टनर के स्वभाव की वे अनोखी, थोड़ी विचित्र और बेहद अजीब सी या फिर मजेदार आदतें हैं जिन्हें देखकर आप अपना सिर पकड़ लेते हैं और खुद से कहते हैं कि आपका साथी ऐसी हरकतें क्यों करता है। आसान शब्दों में कहें तो इस अनोखे ट्रेंड का सीधा सा मतलब यह है कि बात थोड़ी अजीब जरूर है, लेकिन इससे किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है। बेज फ्लैग की दस दिलचस्प और सटीक मिसालें इस अवधारणा को बेहतर ढंग से समझने के लिए इसके कुछ बहुत ही मजेदार और सटीक उदाहरण देखे जा सकते हैं। सबसे पहली बात यह है कि कोई व्यक्ति रेस्टोरेंट में जाकर मेन्यू कार्ड की पूरी तरह से पीएचडी करता है। वह करीब पंद्रह मिनट तक बड़े ध्यान से पूरा मेन्यू पढ़ता है, वेटर से एक-एक डिश की पूरी डिटेल पूछता है और अंत में वही हमेशा की तरह दाल तड़का या मटर पनीर ही ऑर्डर कर देता है। दूसरी आम हरकत यह होती है कि लोग टीवी के सामने बैठकर आधे से एक घंटा सिर्फ फिल्मों और शोज को स्क्रॉल करने में बिता देते हैं। वे नेटफ्लिक्स या यूट्यूब पर ट्रेलर देखते हैं और अंत में बिना कुछ देखे ही टीवी बंद करके चैन से सो जाते हैं। तीसरी अजीब आदत यह होती है कि लोग सुबह सात बजे उठने के लिए सुबह सवा छह, साढ़े छह, पौने सात और छह बजकर पचपन मिनट तक के दस अलग-अलग अलार्म लगा लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी आंख आखिरकार सात बजकर पंद्रह मिनट पर ही खुलती है। चौथी ऐसी ही मजेदार आदत यह है कि लोग अपनी जानी-पहचानी गलियों और रास्तों पर भी नेविगेशन के लिए जीपीएस ऑन कर लेते हैं। वे अपने ही घर के बिल्कुल पास स्थित किसी किराने की दुकान या बेकरी तक जाने के लिए भी गूगल मैप्स का सहारा ले लेते हैं। पांचवी मिसाल यह है कि लोग अपने हाथ में कोई चीज पकड़कर पूरे घर में पागलों की तरह उसे ढूंढते फिरते हैं। वे अपना चश्मा अपने सिर पर चढ़ा लेते हैं या मोबाइल हाथ में पकड़े रहते हैं और पूरे घर में यह चिल्लाकर पूछते हैं कि उनका सामान आखिर कहां चला गया। छठी अजीब हरकत यह है कि लोग चाय या कॉफी में बिस्किट डुबोकर पूरी तरह से भूल जाते हैं। वे तब तक इंतजार करते हैं जब तक कि वह बिस्किट आधा टूटकर कप की तली में जाकर न बैठ जाए। सातवीं बात यह है कि जब आप किसी बेहद गंभीर और जरूरी काम या बात में व्यस्त होते हैं, तब आपका साथी अचानक बीच में किसी पुरानी बॉलीवुड फिल्म का कोई मजेदार डायलॉग बोलकर पूरे गंभीर माहौल का कबाड़ा कर देता है या उसमें हल्की-फुल्की कॉमेडी ले आता है। आठवीं ऐसी ही आदत यह है कि लोग ग्रॉसरी स्टोर में बिना किसी तैयारी या लिस्ट के भटकते रहते हैं। वे सुपरमार्केट सिर्फ ब्रेड खरीदने जाते हैं और वहां चालीस मिनट तक हर शेल्फ की चीजें उठाकर देखते रहते हैं, लेकिन घर लौटने पर मुख्य चीज यानी ब्रेड खरीदना ही भूल जाते हैं। नौवीं दिलचस्प बात यह है कि जब किसी को केवल पांच मिनट के लिए भी वॉशरूम जाना होता है, तब भी वे अपने फोन की बैटरी और इंटरनेट कनेक्शन की जांच ऐसे करते हैं जैसे वे किसी बहुत लंबे सफर पर निकलने जा रहे हों। दसवीं और आखिरी मजेदार हरकत यह होती है कि लोग बड़े चाव से घर की सारी पानी की बोतलें भरकर फ्रिज में रखने के बजाय बाहर ही रसोई के काउंटर पर छोड़ देते हैं और फिर बाद में ठंडे पानी का इंतजार करते रहते हैं। रेड, ग्रीन और बेज फ्लैग में क्या होता है मुख्य अंतर इस फर्क को एक बहुत ही आसान और सरल उदाहरण के जरिए समझा जा सकता है। मान लीजिए कि आपका साथी आपकी जानकारी के बिना चुपके से आपका फोन चेक करता है और आपके दोस्तों से बात करने पर आपसे बेवजह लड़ता है तो इस तरह के टॉक्सिक व्यवहार को रेड फ्लैग कहा जाता है। इसके विपरीत, यदि आपका पार्टनर आपकी बातों को हमेशा बहुत ध्यान से सुनता है, आपकी पूरी इज्जत करता है और जीवन की हर मुश्किल परिस्थिति में आपके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहता है, तो यह सब एक अच्छे पार्टनर की यानी ग्रीन फ्लैग की श्रेणी में आता है। अब बात आती है बेज फ्लैग की। इसमें पार्टनर चाय में बिस्किट डुबोकर उसे पांच सेकंड तक वहीं छोड़ देता है और वह बिस्किट सीधे कप में जा गिरता है, जिसके बाद वह चम्मच से उसे निकालकर बड़े चाव से मजे लेकर खाता है। क्या इस तरह की छोटी-मोटी हरकतों या बेज फ्लैग की वजह से कभी कोई रिश्ता टूट सकता है। इसका जवाब बिल्कुल ना में है। इस तरह की चीजें रिश्तों में एक तरह से मिर्च-मसाले या तड़के का काम करती हैं। हालांकि शुरुआत में यह आदतें आपको थोड़ी अजीब या अटपटी लग सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे यही छोटी-छोटी चीजें आपके पार्टनर की असली पहचान बन जाती हैं। जब आप अपने साथी से कुछ समय के लिए दूर होते हैं, तो अक्सर आपको उनकी यही अजीब और मासूम सी बेवकूफियां सबसे ज्यादा याद आती हैं। इसलिए अगली बार जब आपका पार्टनर किसी टीवी शो या फिल्म को देखने में पूरा एक घंटा सिर्फ स्क्रॉलिंग करते हुए बिता दे और कुछ भी प्ले न करे, तो उस पर गुस्सा होने के बजाय बस मुस्कुरा दीजिए, क्योंकि आपको अपने रिश्ते का असली बेज फ्लैग मिल चुका है। इसका आप पर असर यह ट्रेंड पाठकों को अपने पार्टनर की छोटी-मोटी और अजीब हरकतों को सकारात्मक रूप से देखने का नया नजरिया देता है। • दैनिक जीवन में: रिश्तों में छोटी-मोटी अजीब आदतें होना पूरी तरह सामान्य है और इससे पार्टनर के प्रति प्यार और बढ़ सकता है। इन बातों को लेकर तनाव लेने के बजाय इन्हें रिश्ते का हिस्सा मानकर मुस्कुराना चाहिए। सवाल-जवाब 1. बेज फ्लैग का क्या मतलब होता है? बेज फ्लैग का मतलब पार्टनर की उन अजीब और मजाकिया हरकतों से है जो थोड़ी विचित्र होती हैं लेकिन नुकसानदायक नहीं होतीं। 2. क्या बेज फ्लैग की वजह से रिश्ता टूट सकता है? बिल्कुल नहीं, बेज फ्लैग्स रिश्तों में मिर्च-मसाले का काम करते हैं और इनसे रिश्ता नहीं टूटता। 3. रेड फ्लैग और बेज फ्लैग में क्या अंतर है? रेड फ्लैग टॉक्सिक और खतरनाक व्यवहार को दर्शाता है, जबकि बेज फ्लैग केवल पार्टनर की अजीब और हानिरहित आदतें होती हैं। 4. बेज फ्लैग का एक आम उदाहरण क्या है? चाय में बिस्किट डुबोकर भूल जाना और उसका कप की तली में बैठ जाना बेज फ्लैग का एक क्लासिक उदाहरण है। https://trendkia.com/relationships/detinga-ki-duniya-men-kya-hai-beige-flag-jo-partner-ko-na-banati-hai-villain-aura-na-hi-devdoot-23444 TrendKia — Har trend, sabse pehle.