साथ बैठकर भी पार्टनर से दूरी बना रहा है फोन, जानिए क्या है 'फबिंग' की यह आदत साथ होने पर भी मोबाइल फोन में उलझे रहने की आदत को 'फबिंग' कहा जाता है, जो रिश्तों में भावनात्मक दूरियां और गलतफहमियां पैदा कर सकती है। आज के दौर में यह एक आम दृश्य बन गया है कि प्रेमी जोड़े या पति-पत्नी एक साथ एक ही कमरे में या डाइनिंग टेबल पर बैठे हैं, लेकिन उनका पूरा ध्यान गैजेट्स की स्क्रीन पर टिका हुआ है। कोई सोशल मीडिया फीड खंगाल रहा होता है, तो कोई लगातार नोटिफिकेशंस और चैट्स चेक करने में मशगूल रहता है। जब सामने बैठा साथी अपने मन की बात साझा करना चाहता है या सामान्य बातचीत शुरू करता है, तो उसे अपेक्षित तवज्जो नहीं मिलती है। यदि आपके निजी संबंधों में भी ऐसा अक्सर होता है, तो इसे महज एक साधारण सी लापरवाही मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इस खास तरह के व्यवहार को ‘फबिंग’ नाम दिया गया है, जो धीरे-धीरे दो दिलों के बीच गहरी भावनात्मक दीवार खड़ी कर देता है। फबिंग शब्द का अर्थ और इसके मायने यह अंग्रेजी के दो शब्दों यानी फोन और किसी को नजरअंदाज करने की क्रिया से मिलकर बना एक नया कॉन्सेप्ट है। इसका सीधा सा मतलब यह होता है कि आप किसी जीवित इंसान के भौतिक रूप से पास तो मौजूद हैं, लेकिन अपनी मानसिक उपस्थिति वहां दर्ज कराने के बजाय मोबाइल स्क्रीन में खोए हुए हैं। उदाहरण के तौर पर, आप अपने साथी के साथ किसी रेस्टोरेंट में डिनर कर रहे हैं और आमने-सामने बैठकर बातचीत करने के बजाय बार-बार अपनी जेब से डिवाइस निकालकर डिस्प्ले देखने लगते हैं। या फिर आपका पार्टनर दिनभर की थकान और अपने अनुभव साझा कर रहा है, और आप उसकी बात का जवाब देने के बजाय सोशल मीडिया पर वीडियो रील्स देखने में मग्न हैं। यही वह स्थिति है जिसे फबिंग कहा जाता है। प्रेम संबंधों पर इसका घातक प्रभाव किसी भी मजबूत रिश्ते की नींव सिर्फ एक छत के नीचे रहना भर नहीं होता, बल्कि एक-दूसरे को गुणवत्तापूर्ण समय देना और उनकी बातों को पूरी तन्मयता से सुनना अनिवार्य शर्त है। जब किसी का साथी बार-बार अपनी स्क्रीन पर व्यस्त रहता है, तो दूसरे व्यक्ति के मन में यह हीन भावना घर करने लगती है कि उसकी बातें या उसकी मौजूदगी अब उतनी अहम नहीं रही है। समय के साथ यही छोटी सी लापरवाही अकेलेपन, भीतर ही भीतर सुलगती नाराजगी और रिश्ते के प्रति असंतोष का बहुत बड़ा कारण बन जाती है। कल्पना कीजिए कि आपका हमसफर अपनी किसी गहरी परेशानी या मानसिक तनाव के बारे में आपसे चर्चा करना चाहता है, और उस नाजुक पल में भी आप अपने फोन की दुनिया में व्यस्त हैं। ऐसे में उसे महसूस हो सकता है कि आप उसकी भावनाओं का बिल्कुल भी आदर नहीं करते हैं और न ही उसे गंभीरता से लेते हैं। अगर इस तरह की अनदेखी बार-बार दोहराई जाती है, तो वह इंसान आपसे अपने दिल की बातें साझा करना पूरी तरह बंद कर सकता है। परिणाम यह निकलता है कि आपसी संवाद लगभग खत्म होने लगता है और दोनों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव कमजोर पड़ने लगता है। क्या गैजेट्स की वजह से सचमुच बढ़ती हैं दूरियां विभिन्न शोध और अध्ययनों में भी मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल और पार्टनर के साथ आपसी संतुष्टि के स्तर के बीच गहरा संबंध देखा गया है। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हर इंसान और हर रिश्ते पर इसका असर बिल्कुल एक जैसा पड़े, क्योंकि कई बार डिवाइस का उपयोग अति आवश्यक पेशेवर कार्यों के लिए भी करना पड़ता है। इसके बावजूद, बिना किसी खास जरूरत के बार-बार स्क्रीन को रिफ्रेश करना साथ बिताए गए अनमोल पलों की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। यहाँ सबसे गौर करने वाली बात यह है कि असली समस्या केवल फोन का उपयोग करना भर नहीं है, बल्कि उस अहम समय पर फोन को अपनी प्राथमिकता बना लेना है जब आपका साथी आपसे संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहा हो। रिश्ते को बचाने के कारगर उपाय यदि आप चाहते हैं कि आपके और आपके साथी के बीच का तालमेल हमेशा मजबूत बना रहे, तो आपको एक-साथ बिताए जाने वाले समय में फोन के इस्तेमाल पर लगाम लगानी होगी। भोजन करते वक्त अपने गैजेट्स को खुद से दूर रखना सीखें और आपसी बातचीत के दौरान बार-बार स्क्रीन पर नजरें गड़ाने से बचें। यदि कोई बेहद जरूरी कॉल या अर्जेंट मैसेज आ भी जाए, तो अपने पार्टनर को विनम्रता से यह बात बता दें कि आपको कुछ मिनटों के लिए डिवाइस का उपयोग करना जरूरी है। इसके अलावा, दिनभर की भागदौड़ के बीच कुछ ऐसा वक्त जरूर तय करें जब आप दोनों बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के आमने-सामने बैठकर खुलकर बातें कर सकें। इस दौरान अपने दिल के हाल साझा करें और अपने पार्टनर की बात को बिना किसी व्यवधान के पूरी तल्लीनता से सुनें। इसका आप पर असर फबिंग की इस आदत का सीधा असर रोजमर्रा की आपसी बातचीत और मानसिक शांति पर पड़ता है। • मानसिक स्वास्थ्य: पार्टनर द्वारा अनदेखा किए जाने पर व्यक्ति में हीन भावना, अकेलापन और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ सकता है। • संवाद में कमी: लगातार स्क्रीन में व्यस्त रहने से आपसी बातचीत के मौके कम होते हैं, जिससे गलतफहमियां पनपने लगती हैं। • भावनात्मक दूरी: समय के साथ यह आदत दो लोगों के बीच विश्वास और जुड़ाव को कमजोर कर देती है। • पारिवारिक माहौल: भोजन या फुर्सत के पलों में गैजेट्स का प्रयोग घर के समग्र माहौल को तनावपूर्ण बना सकता है। ऐसा क्यों हुआ रिश्तों में फबिंग की यह समस्या आज के तकनीकी युग में तेजी से पनप रही है, जिसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण जुड़े हुए हैं। • डिजिटल निर्भरता: स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का अत्यधिक उपयोग लोगों को वर्चुअल दुनिया में उलझाए रखता है। • तत्कालिक संतुष्टि: नोटिफिकेशन और रील्स से मिलने वाला त्वरित मानसिक सुख वास्तविक बातचीत की तुलना में अधिक आकर्षित करता है। • जागरूकता का अभाव: अधिकांश लोग इस बात से अनजान होते हैं कि उनकी यह छोटी सी आदत उनके सबसे करीबी रिश्ते को नुकसान पहुंचा रही है। सवाल-जवाब 1. फबिंग का क्या अर्थ होता है? फबिंग शब्द फोन और किसी को नजरअंदाज करने से मिलकर बना है, जिसका मतलब साथ होने पर भी फोन में व्यस्त रहना है। 2. फबिंग से रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ता है? इससे रिश्तों में भावनात्मक दूरियां, अकेलापन और आपसी असंतोष बढ़ने लगता है। 3. इस समस्या से बचने के लिए क्या करना चाहिए? खाना खाते समय या बातचीत के दौरान फोन दूर रखें और एक-दूसरे को पूरा समय दें। https://trendkia.com/relationships/phubbing-is-slowingly-ruining-modern-relationships-here-is-how-to-stop-ignoring-your-partner-51055 TrendKia — Har trend, sabse pehle.