# पूजा-पाठ करने वाले जोड़ों की अंतरंग जिंदगी सेक्युलर जोड़ों से कहीं बेहतर, अमेरिकी शोध के चौंकाने वाले तथ्य

> अमेरिका में हुए एक हालिया शोध के अनुसार धार्मिक और आस्थावान जोड़े गैर-धार्मिक या सेक्युलर लोगों के मुकाबले ज्यादा बार शारीरिक संबंध बनाते हैं और दांपत्य जीवन में कहीं अधिक यौन संतुष्टि हासिल करते हैं।

**Type:** article · **Category:** रिश्ते · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/relationships/puja-patha-karane-vale-joron-ki-antarnga-jindagi-secular-joron-se-kahin-behatara-us-shodha-ke-chaunkane-vale-tathya-40519 · **Language:** Hindi
**Tags:** दांपत्य जीवन, रिलेशनशिप टिप्स, धार्मिक जीवनशैली, यौन संतुष्टि, इंस्टीट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज, वैवाहिक रिश्ते

आमतौर पर समाज में यह धारणा आम है कि जो लोग बेहद धार्मिक होते हैं, जिनका दिन सुबह भगवान के वंदन, स्नान, पूजा-पाठ, सात्विक खान-पान, शाकाहार और शांत स्वभाव के साथ गुजरता है, उनकी रुचि अंतरंगता में कम होती होगी। लोग अक्सर सोचते हैं कि ऐसे शांत और पूजा-पाठ में रमे रहने वाले जोड़े शारीरिक संबंधों को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं होते होंगे। लेकिन इस पारंपरिक सोच के विपरीत, अमेरिका में सामने आए एक नए अध्ययन ने बेहद हैरान करने वाली तस्वीर पेश की है। शोध के आंकड़े बताते हैं कि आस्थावान और धार्मिक प्रवृत्ति वाले लोग सेक्युलर यानी गैर-धार्मिक जीवनशैली अपनाने वालों की तुलना में काफी ज्यादा बार शारीरिक संबंध बनाते हैं।

## वैश्विक स्तर पर अंतरंगता में गिरावट का दौर
यह अध्ययन अमेरिका में इंस्टीट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज की ओर से किया गया है। शोध के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया है कि जो जोड़े नियमित रूप से प्रार्थना स्थलों या चर्च में उपस्थित होते हैं, वे आम सेक्युलर जोड़ों की तुलना में बहुत अधिक सक्रिय यौन जीवन जीते हैं। हालांकि इस अध्ययन में प्रमुख रूप से ईसाई समुदाय के लोग शामिल थे, लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया कि अन्य धर्मों के मानने वाले जोड़ों में भी लगभग ऐसा ही रुख देखने को मिलता है। इस अध्ययन का सबसे अहम पहलू यह रहा कि धार्मिक जीवन जीने वाले लोग सिर्फ संख्या के मामले में ही आगे नहीं हैं, बल्कि वे शारीरिक संबंधों में मानसिक और भावनात्मक रूप से भी कहीं अधिक संतुष्ट महसूस करते हैं। इसके विपरीत सेक्युलर जोड़ों में असंतोष और अतृप्ति का स्तर तुलनात्मक रूप से ज्यादा पाया गया।

यह शोध ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका सहित दुनिया के कई विकसित देशों में अंतरंग संबंधों में भारी गिरावट देखी जा रही है। आधुनिक दौर में युवाओं के भीतर शारीरिक संबंधों को लेकर पहले जैसा उत्साह कम हो रहा है। अगर जापान और कई यूरोपीय देशों की बात करें, तो वहां ऐसे युगलों की संख्या काफी बड़ी है जो कई-कई महीनों तक किसी तरह का शारीरिक संबंध नहीं बनाते। अंतरंगता के इस गिरते वैश्विक दौर में धार्मिक और सेक्युलर जोड़ों के बीच बढ़ता यह अंतर समाजशास्त्रियों के लिए काफी चौंकाने वाला विषय बन गया है।

## आंकड़ों में धार्मिक बनाम सेक्युलर जोड़ों का जीवन
अगर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर नजर डालें, तो 1990 के दशक में 20 से 54 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 64 प्रतिशत जोड़े सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर शारीरिक संबंध बनाते थे। उस दौर में अधिकांश लोग इससे भी अधिक बार अंतरंग होते थे और धार्मिक या सेक्युलर जीवनशैली के आधार पर कोई खास अंतर दिखाई नहीं देता था। समाज के हर वर्ग और हर सोच के लोग एक जैसे ढर्रे पर थे। लेकिन बीते कुछ दशकों में सेक्युलर लोगों के जीवन में भारी बदलाव आया है और उनके बीच यह प्रवृत्ति बहुत घट गई है।

शोध के नए आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि वर्तमान समय में केवल 48 प्रतिशत सेक्युलर लोग ही नियमित रूप से शारीरिक संबंध बना पाते हैं, जबकि शेष लोग महीनों तक अंतरंगता से दूर रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ, धार्मिक प्रवृत्ति के 62 प्रतिशत जोड़े आज भी नियमित रूप से शारीरिक संबंध बनाते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि वर्तमान अमेरिकी समाज में आस्था रखने वाले और धार्मिक मूल्यों को मानने वाले लोग ही अपनी अंतरंग जिंदगी को अधिक सक्रिय बनाए हुए हैं। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि जब विवाह और शारीरिक संबंधों को केवल एक जैविक जरूरत न मानकर पवित्रता के भाव से जोड़ा जाता है, तो परिवार और रिश्ते में सहज स्वीकार्यता का माहौल तैयार होता है। इस माहौल में शारीरिक संबंधों को हीन भावना से देखने के बजाय सम्मान और उत्साह मिलता है, जिससे दोनों साझेदारों को गहरा संतोष प्राप्त होता है।

## धार्मिक जोड़ों में अधिक संतुष्टि की मुख्य वजहें
अध्ययन में इस बात का भी गहरा विश्लेषण किया गया है कि आखिर धार्मिक पृष्ठभूमि वाले जोड़ों में यौन संतुष्टि इतनी ज्यादा क्यों पाई जाती है। रिपोर्ट बताती है कि धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले लोगों में क्षमाशीलता, आपसी वफादारी और एक-दूसरे के प्रति समर्पण जैसे गुण अपेक्षाकृत अधिक मजबूत होते हैं। चूंकि वे अपने धर्म के नैतिक सिद्धांतों के तहत इन मूल्यों का आचरण करते हैं, इसलिए वैवाहिक जीवन में आने वाली रोजमर्रा की दिक्कतों, मनमुटाव और तनाव का समाधान वे शांतिपूर्वक निकाल लेते हैं।

धार्मिक आस्था रखने वाले दंपत्ति रिश्ते की शुरुआत से ही इस बात को प्राथमिकता देते हैं कि आपसी समझ में किसी भी छोटी-मोटी गलतफहमी या अड़चन को दीवार न बनने दिया जाए। इसके अलावा, साथ मिलकर की जाने वाली प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान दोनों के बीच केवल भावनात्मक जुड़ाव ही नहीं बढ़ाते, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से भी एक-दूसरे के करीब लाते हैं। ऐसे जोड़े पारिवारिक और सामाजिक जीवन से उपजे तनावों को संतुलित तरीके से संभाल लेते हैं। यही प्रमुख कारण है कि रोजाना प्रार्थना करने वाले श्रद्धालुओं में यौन संतुष्टि का स्तर, नियमित प्रार्थना न करने वाले लोगों की तुलना में 1.29 गुना अधिक दर्ज किया गया है।

## इसका आप पर असर
यह अध्ययन आधुनिक जीवनशैली में रिश्तों की स्थिरता और मानसिक संतुष्टि को सीधे प्रभावित करने वाले व्यवहारिक पहलुओं को उजागर करता है।

- **दांपत्य जीवन पर असर:** रिश्ते में साझा नैतिक मूल्य और साथ समय बिताना अंतरंगता को मजबूत बनाता है। तनाव भरे दौर में एक-दूसरे के प्रति वफादारी और क्षमाशीलता अपनाने से वैवाहिक जीवन अधिक सुखद बन सकता है।
- **आधुनिक जीवनशैली में बदलाव:** अकेलेपन और घटती अंतरंगता की समस्या से जूझ रहे युवा अपने रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता दे सकते हैं। बातचीत और मानसिक निकटता बढ़ाने से शारीरिक संतुष्टि में भी सुधार संभव है।
- **तनाव प्रबंधन:** दैनिक जीवन में प्रार्थना या ध्यान जैसी शांत गतिविधियां पारिवारिक तनाव को घटाने में मददगार साबित होती हैं। घरेलू कलह कम होने से आपसी रिश्ते में मधुरता और विश्वास बढ़ता है।
- **पारस्परिक संवाद:** छोटी-मोटी गलतफहमियों को समय रहते सुलझाना वैवाहिक सुख के लिए अनिवार्य है। जब दोनों साथी एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं तो रिश्ता दीर्घकालिक बनता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी समाज में धार्मिक और सेक्युलर जोड़ों के अंतरंग जीवन में यह बड़ा अंतर कई सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक कारकों के कारण उत्पन्न हुआ है।

- **नैतिक मूल्यों और क्षमाशीलता का प्रभाव:** धार्मिक जीवन जीने वाले लोग वफादारी और क्षमा जैसे गुणों को अपने दैनिक आचरण में शामिल करते हैं। इन नैतिक सिद्धांतों के चलते वैवाहिक जीवन में आने वाले टकरावों का समाधान तेजी से और शांतिपूर्वक हो जाता है।
- **विवाह को पवित्र मानने की धारणा:** धर्म में विवाह और शारीरिक संबंध को मात्र शारीरिक जरूरत के बजाय एक पवित्र अनुबंध माना जाता है। इस नजरिए से रिश्ते में परस्पर सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा का गहरा माहौल तैयार होता है।
- **साझा प्रार्थना और आत्मीयता:** नियमित रूप से साथ बैठकर प्रार्थना करने या धार्मिक आयोजनों में जाने से युगल के बीच संवाद और नजदीकी बढ़ती है। यह साझा अभ्यास तनाव को कम करके दोनों को एक-दूसरे के करीब बनाए रखता है।
- **ऐतिहासिक बदलाव और सेक्युलर मंदी:** 1990 के दशक में दोनों वर्गों की सक्रियता समान थी, लेकिन आधुनिक दौर में सेक्युलर जीवनशैली में व्यस्तता और सामाजिक बिखराव के कारण अंतरंगता में तेज गिरावट दर्ज की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. यह अध्ययन किस संस्था द्वारा और कहां के लोगों पर किया गया है?
यह अध्ययन अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज द्वारा अमेरिकी नागरिकों पर किया गया है।

### 2. वर्तमान में कितने प्रतिशत धार्मिक और सेक्युलर लोग नियमित संबंध बनाते हैं?
शोध के अनुसार वर्तमान में 62 प्रतिशत धार्मिक लोग नियमित संबंध बनाते हैं, जबकि केवल 48 प्रतिशत सेक्युलर लोग ही ऐसा करते हैं।

### 3. 1990 के दशक में कपल्स के बीच शारीरिक संबंधों का क्या आंकड़ा था?
1990 के दशक में 20 से 54 वर्ष के लगभग 64 प्रतिशत जोड़े सप्ताह में कम से कम एक बार संबंध बनाते थे और तब दोनों वर्गों में खास अंतर नहीं था।

### 4. धार्मिक जोड़ों में यौन संतुष्टि अधिक होने का मुख्य कारण क्या पाया गया?
धार्मिक लोगों में क्षमा, वफादारी, आपसी समझ और साथ में प्रार्थना करने जैसे गुण होते हैं, जिससे दांपत्य तनाव घटता है और संतुष्टि बढ़ती है।

### 5. रोजाना प्रार्थना करने वालों में यौन संतुष्टि की संभावना कितनी ज्यादा है?
अध्ययन के अनुसार रोजाना प्रार्थना करने वाले लोगों में यौन संतुष्टि की संभावना प्रार्थना न करने वालों की तुलना में 1.29 गुना अधिक है।

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