# वॉशिंगटन के वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा: बिना अंदरूनी इच्छा के संबंध बनाने को क्यों मजबूर होती हैं महिलाएं

> एक दशक लंबे वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि कई महिलाएं रिश्ते की स्थिरता और पार्टनर को खुश रखने के लिए बिना शारीरिक इच्छा के भी संबंध बनाती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अपनी भावनाओं को लगातार दबाने से मानसिक तनाव और अवसाद का खतरा बढ़ सकता है।

**Type:** article · **Category:** रिश्ते · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/relationships/washington-ke-vaijnanikon-ka-bara-khulasa-bina-andaruni-ichchha-ke-snbndha-banane-ko-kyon-majabura-hoti-hain-mahilaen-26890 · **Language:** Hindi
**Tags:** ड्यूटी सेक्स, मर्सी सेक्स, रिलेशनशिप एडवाइस, मानसिक स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, अध्ययन खुलासा, सेक्सुअल डिजायर

आधुनिक दौर में व्यक्तिगत रिश्तों के ताने बाने केवल प्रेम और विश्वास पर ही नहीं टिके हैं, बल्कि इनमें आपसी समझौते और समझदारी की भी बड़ी भूमिका होती है। हाल के वर्षों में दांपत्य और प्रेम संबंधों के शारीरिक व मानसिक पहलुओं को लेकर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन सामने आए हैं। इन अध्ययनों में एक बेहद जटिल और संवेदनशील वास्तविकता रेखांकित की गई है कि अनेक महिलाएं किसी भी प्रकार की आंतरिक या शारीरिक कामेच्छा के बिना भी अपने साथी के साथ शारीरिक निकटता बनाती हैं। मनोविज्ञान और चिकित्सा विज्ञान की शब्दावली में इस स्थिति को ड्यूटी सेक्स अथवा मर्सी सेक्स के नाम से जाना जाता है। इस व्यवहार के पीछे छिपे वैज्ञानिक, जैव विकासवादी और मनोवैज्ञानिक कारणों को समझना आज के समय में बेहद प्रासंगिक हो गया है।

## दस साल के ड्रग ट्रायल्स और वैज्ञानिक आंकड़ों का विश्लेषण
जर्नल ऑफ सेक्स एंड मैरिटल थेरेपी में प्रकाशित एक विस्तृत शोध पत्र के अनुसार, महिलाओं द्वारा बिना शारीरिक उत्तेजना या इच्छा के संबंध बनाने का मुख्य उद्देश्य अपने रिश्ते को टूटने से बचाना, साथी की संतुष्टि सुनिश्चित करना तथा रिश्ते में वफादारी की भावना को कायम रखना होता है। इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने लगभग एक दशक की अवधि में कामेच्छा की पुरानी कमी यानी हाइपोएक्टिव सेक्सुअल डिजायर डिसऑर्डर से जुड़ी दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल्स का गहन अध्ययन किया। विभिन्न दवा कंपनियों द्वारा आयोजित इन यादृच्छिक और प्लेसबो नियंत्रित अध्ययनों में हजारों महिलाओं ने भागीदारी की थी। इन क्लिनिकल अध्ययनों में दवाओं की सफलता का मुख्य पैमाना यह तय किया गया था कि प्रतिभागी महिलाएं एक निश्चित समय में कितनी बार शारीरिक गतिविधियों में शामिल होती हैं।

## इंटिममेडिसिन स्पेशलिस्ट्स की शोध टीम के निष्कर्ष
अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी स्थित इंटिममेडिसिन स्पेशलिस्ट्स के शोधकर्ता निकिता गुप्ता और जेम्स ए. साइमन ने जब इन वैज्ञानिक आंकड़ों का सूक्ष्मता से पुनर्मूल्यांकन किया, तो एक अनोखा पैटर्न उजागर हुआ। शोध आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि जिन महिलाओं में कामेच्छा लगभग शून्य या नगण्य स्तर पर थी, वे भी अपने साथी के साथ महीने में औसतन दो से तीन बार शारीरिक संबंध बना रही थीं। निकिता गुप्ता और जेम्स ए. साइमन ने स्पष्ट किया कि बिना किसी व्यक्तिगत तलब के शारीरिक निकटता में शामिल होने का यह रुझान समाज में काफी व्यापक है। वैज्ञानिकों ने इसे मर्सी सेक्स की संज्ञा दी, जिसके तहत महिलाएं अपनी निजी शारीरिक संतुष्टि के स्थान पर रिश्ते के स्थायित्व और घरेलू शांति को प्राथमिक स्थान देती हैं।

## इंसानी विकासक्रम और प्रजनन रणनीतियों का प्रभाव
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि शारीरिक इच्छा के अभाव के बावजूद महिलाएं ऐसा समझौता क्यों करती हैं। विकासवादी जीवविज्ञानियों और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इसके मूल में मानव विकास का लंबा इतिहास और स्त्री व पुरुष की भिन्न प्रजनन रणनीतियां छिपी हुई हैं। प्राकृतिक विकासक्रम में पुरुषों का रुझान कम समय में अधिक साझेदारों के साथ अपने वंश को आगे बढ़ाने की ओर रहा है, जबकि महिलाओं की प्राथमिकता संतानों के संरक्षण और लालन पालन के लिए एक सुरक्षित, स्थिर वातावरण व संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना रही है। मर्सी सेक्स के माध्यम से महिलाएं अनजाने में ही अपनी इसी प्राचीन विकासवादी रणनीति का पालन करती हैं, ताकि उनका पार्टनर किसी अन्य दिशा में आकर्षित न हो और परिवार का ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहे।

## सामाजिक ढांचा और भावनात्मक जुड़ाव की अवधारणा
सामाजिक व्यवस्था और पारंपरिक संस्कारों ने भी इस व्यवहार को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आमतौर पर पुरुषों की मानसिक संरचना में शारीरिक निकटता को केवल शारीरिक तृप्ति नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का एक मुख्य जरिया माना जाता है। जब महिलाएं अपनी इच्छा न होने पर भी इस प्रक्रिया में सहमति देती हैं, तो वे वास्तव में अपने रिश्ते की भावनात्मक डोर को कमजोर होने से बचा रही होती हैं। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि यह नियम हर प्रकार के संबंध पर एक समान लागू नहीं होता है। विषमलैंगिक जोड़ों से इतर अन्य प्रकार के व्यक्तिगत संबंधों में इसके मायने भिन्न हो सकते हैं, परंतु सामान्य दांपत्य जीवन में यह सामाजिक अपेक्षाओं का एक गहरा और पुराना हिस्सा बना हुआ है।

## मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर और अवसाद की चेतावनी
यद्यपि तात्कालिक रूप से यह समझौता साथी को खुश रखने या घरेलू विवादों को टालने का एक आसान रास्ता प्रतीत हो सकता है, परंतु मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके दीर्घकालिक दुष्परिणामों के प्रति गंभीर चेतावनी दी है। मनोवैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति केवल झगड़ों से बचने, साथी की निराशा दूर करने या किसी बहस को खत्म करने के उद्देश्य से लगातार अपनी अनिच्छा को दबाकर शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह स्थिति उसके मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकती है। अपनी प्राकृतिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और भावनाओं का निरंतर दमन इंसान को मानसिक व भावनात्मक रूप से अंदर से खोखला कर देता है। लंबे समय तक इस चक्र में फंसे रहने से महिलाओं में गंभीर अवसाद, मानसिक तनाव, घबराहट और कुंठा के लक्षण तेजी से पनपने लगते हैं।

## जर्नल ऑफ सेक्स रिसर्च 2024 और संबंधों में गुणवत्ता का महत्व
वर्ष 2024 में जर्नल ऑफ सेक्स रिसर्च में प्रकाशित एक नवीन अध्ययन भी इस तथ्य की पुष्टि करता है कि अधिकांश वयस्कों ने अपने वर्तमान या अतीत के संबंधों में कभी न कभी ऐसी शारीरिक सहमति दी है, जिसके लिए वे आंतरिक रूप से तैयार नहीं थे। इन सभी वैज्ञानिक निष्कर्षों से यह संदेश पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि किसी भी रिश्ते की सफलता या मजबूती को केवल इस बात से नहीं मापा जा सकता कि उसमें शारीरिक संबंध कितनी बार बनाए जा रहे हैं। शारीरिक निकटता की बारंबारता यानी क्वांटिटी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसकी गुणवत्ता यानी क्वालिटी होती है। जबरन या मजबूरी में किया गया कोई भी समझौता यदि आपकी मानसिक शांति और आत्मसम्मान की कीमत पर हो रहा है, तो वह रिश्ते की नींव को खोखला कर देता है। स्वस्थ रिश्ते की वास्तविक कुंजी खुला संवाद, एक-दूसरे की सहमति का सम्मान और परस्पर संवेदनशीलता में निहित है।

## इसका आप पर असर
यह शोध दिखाता है कि अनिच्छा के बावजूद लगातार किया गया शारीरिक समझौता आपके मानसिक स्वास्थ्य और रिश्ते की नींव दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। अपनी जरूरतों को पहचानना और संवाद स्थापित करना आवश्यक है।

- **भारत भर में:** जोड़ों के बीच मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, जिससे लोग खुलकर बात करने लगे हैं। लगातार दबाव में रहने से व्यक्ति में अवसाद और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
- **दैनिक जीवन में:** रिश्ते में किसी भी प्रकार की मजबूरी लंबे समय तक खुशी नहीं दे सकती। संवाद और आपसी सहमति ही रिश्ते को स्वस्थ बनाए रखती है।
- **गुणवत्ता पर ध्यान:** केवल संख्यात्मक बारंबारता के बजाय शारीरिक व भावनात्मक जुड़ाव की गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक लाभकारी होता है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
- **मानसिक परामर्श:** यदि आपको लगता है कि आप लगातार दबाव महसूस कर रहे हैं, तो किसी योग्य काउंसलर से बात करना मददगार हो सकता है। संकोच छोड़कर बात करना ही समाधान है।

## सवाल-जवाब

### 1. ड्यूटी सेक्स या मर्सी सेक्स क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति बिना किसी शारीरिक या आंतरिक इच्छा के केवल अपने साथी को खुश रखने या रिश्ते को बचाने के लिए संबंध बनाता है, तो उसे ड्यूटी सेक्स या मर्सी सेक्स कहा जाता है।

### 2. वॉशिंगटन में हुए अध्ययन में क्या मुख्य बात सामने आई?
शोधकर्ताओं निकिता गुप्ता और जेम्स ए. साइमन ने पाया कि कामेच्छा की कमी से जूझ रही महिलाएं भी रिश्ते की स्थिरता के लिए महीने में औसतन 2 से 3 बार शारीरिक संबंध बनाती हैं।

### 3. बिना इच्छा के संबंध बनाने का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अपनी भावनाओं और इच्छाओं को लगातार दबाने से महिलाओं में मानसिक तनाव, कुंठा और अवसाद का खतरा काफी बढ़ जाता है।

### 4. वर्ष 2024 के जर्नल ऑफ सेक्स रिसर्च अध्ययन का क्या निष्कर्ष था?
इस अध्ययन के अनुसार, अधिकांश वयस्कों ने अपने रिश्तों में कभी न कभी ऐसी सहमति दी है जिसके लिए उनकी आंतरिक इच्छा नहीं थी, जो दर्शाता है कि रिश्तों में फ्रीक्वेंसी से ज्यादा क्वालिटी महत्वपूर्ण है।

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