1,100 श्रद्धालुओं को मुफ्त तीर्थ यात्रा पर ले जाएगा पाली का जैन समाज, जनवरी 2027 में चलेगी स्पेशल ट्रेन पाली का श्री शांतिनाथ जैन सेवा संस्थान जनवरी 2027 में 1,100 श्रद्धालुओं के लिए एक मुफ्त, नौ दिवसीय स्पेशल ट्रेन तीर्थ यात्रा का आयोजन कर रहा है। सम्मेद शिखरजी और पावापुरी जैसे प्रमुख पवित्र स्थलों के दर्शन कराने वाली इस बहुप्रतीक्षित यात्रा के लिए पहले ही दिन 600 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक अपना पंजीकरण कराया है। राजस्थान के पाली शहर में रहने वाले जैन समाज के लिए एक बेहद आनंददायक, आध्यात्मिक और अभूतपूर्व अवसर सामने आया है। श्री शांतिनाथ जैन सेवा संस्थान (लोढ़ा का बास) द्वारा 1,100 श्रद्धालुओं के लिए एक पूरी तरह से निःशुल्क स्पेशल ट्रेन तीर्थ यात्रा की व्यापक योजना तैयार की गई है। यह विशेष रूप से चार्टर्ड की गई नौ दिनों की भव्य धार्मिक यात्रा 4 जनवरी, 2027 को पाली से रवाना होने वाली है। एक साथ इतने बड़े समूह का धर्म के मार्ग पर निकलना अपने आप में एक अनूठा अनुभव होगा। सालों बाद आयोजित हो रहे इस विशाल और निःशुल्क कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों के बीच जबरदस्त उत्साह और खुशी का माहौल देखा जा रहा है। बुकिंग के पहले ही दिन जिस अभूतपूर्व तेजी के साथ 600 से अधिक लोगों ने अपने नाम दर्ज कराए, वह समुदाय के भीतर मौजूद गहरी आस्था, समर्पण और इस अनूठे सफर के प्रति उनके तीव्र आकर्षण को बहुत स्पष्ट रूप से दर्शाता है। देश के प्रमुख जैन तीर्थ स्थलों की एक साथ वंदना इस विशेष रेल यात्रा का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को उन परम पवित्र स्थानों तक ले जाना है, जिनका जैन धर्म के इतिहास और दर्शन में अत्यंत गहरा महत्व है। अपने नौ दिन के विस्तारित सफर में यह ट्रेन सम्मेद शिखरजी, पावापुरी, राजगृही, कुंडलपुर, गुणायाजी, क्षत्रियकुंड, ऋजुबालिका और अयोध्या जैसे महान तीर्थों पर रुकेगी। इनमें से प्रत्येक स्थान किसी न किसी जैन तीर्थंकर के जन्म, दीक्षा, ज्ञान प्राप्ति या मोक्ष से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। उदाहरण के लिए, सम्मेद शिखरजी वह शाश्वत तीर्थ है जहां कई तीर्थंकरों ने कठोर तपस्या के बाद निर्वाण प्राप्त किया था। एक ही यात्रा में इतने सारे महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक और दूर-दराज के पवित्र स्थलों का सुरक्षित दर्शन करना आम तौर पर बहुत मुश्किल और खर्चीला होता है। इसलिए, संस्थान की ओर से की गई यह निःशुल्क पहल आम लोगों और विशेषकर बुजुर्गों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। पंजीकरण के पहले ही दिन दिखा अभूतपूर्व उत्साह इस विशाल और चुनौतीपूर्ण आयोजन की विधिवत तैयारियां हाल ही में एक सोमवार को पूरे जोश के साथ शुरू हुईं। लोढ़ा का बास स्थित संस्थान के परिसर में भगवान शांतिनाथ की मनमोहक तस्वीर के सामने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद एक शुभ शंखनाद के साथ इस बहुप्रतीक्षित महायात्रा का औपचारिक ऐलान किया गया, जिससे वहां मौजूद सभी लोगों में ऊर्जा का संचार हो गया। इस पूरी पहल के संयुक्त संयोजक राज लूणीया के सीधे मार्गदर्शन में, सुबह के ठीक 10:31 बजे टिकट के लिए विशेष काउंटर खोले गए। काउंटर शुरू होते ही वहां अपना पंजीकरण कराने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी और अनुशासित कतारें लग गईं। पहले ही दिन 600 से ज्यादा आवेदन फॉर्म भरे जाने की घटना से आयोजकों को भी सुखद आश्चर्य हुआ है। यह स्पष्ट करता है कि समाज के लोग इस पुण्य अवसर का हिस्सा बनने के लिए कितने लालायित और तैयार हैं। सक्षम नेतृत्व और पूर्व-यात्रा के भव्य धार्मिक अनुष्ठान इतने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले विशाल तीर्थ संघ को सुरक्षित और सही ढंग से संचालित करने के लिए एक बहुत ही मजबूत और अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, इस बारे में जानकारी देते हुए संस्थान से जुड़े नवीन लूणीया (मंडल अध्यक्ष) तथा सचिव पद पर कार्यरत अमृत बलाई ने बताया कि पाली के पारसमल बोकाडिया परिवार की सूरजकंवर को इस धार्मिक संघ के मुख्य संघपति की प्रतिष्ठित जिम्मेदारी दी गई है। आयोजकों का लक्ष्य है कि केवल ट्रेन की यात्रा ही नहीं, बल्कि प्रस्थान से पहले का पूरा समय भी पूरी तरह से धर्ममय और सकारात्मक रहे। इसके लिए पाली में कई तरह के पारंपरिक आयोजनों की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। आने वाले समय में समुदाय के लोग विशेष रूप से आयोजित होने वाली आयम्बिल आराधना, सिद्धचक्र महापूजन, संगीतमय भक्ति संध्या और सांझी जैसे भव्य सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिससे पूरे शहर का माहौल भक्ति से सराबोर हो जाएगा। महामारी की पुरानी बाधाओं के बाद एक बिल्कुल नया सवेरा श्री शांतिनाथ जैन सेवा संस्थान के लिए इतने बड़े पैमाने पर किसी धार्मिक यात्रा का सफल आयोजन करना कोई नई या पहली बात नहीं है। इससे पहले वर्ष 2012 और 2016 में भी इस प्रतिष्ठित संस्थान ने बहुत ही सफलतापूर्वक विशेष ट्रेन यात्राएं करवाई थीं, जिनमें सैकड़ों लोगों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया था और सुरक्षित वापस लौटे थे। उन सफलताओं से उत्साहित होकर, आयोजकों ने वर्ष 2020 के लिए भी ऐसी ही एक शानदार योजना बनाई थी और उसकी सारी ग्राउंड लेवल तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। हालांकि, उसी दौरान अचानक आए वैश्विक कोरोना वायरस संकट और लॉकडाउन की वजह से उस समय यात्रा को मजबूरन अनिश्चित काल के लिए रद्द करना पड़ा था। उस गहरी निराशा और लंबे इंतजार के बाद, अब वर्ष 2027 में यह तीसरा सबसे बड़ा आयोजन होने जा रहा है। महामारी के कारण समाज का जो धार्मिक सपना अधूरा रह गया था, अब वह फिर से एक भव्य रूप में साकार होने वाला है। यही कारण है कि लोगों की खुशी, आस्था और उत्साह इस बार पहले की तुलना में कहीं अधिक है। इसका आप पर असर • भारत में: निजी संसाधनों से बुक की गई ऐसी विशाल धार्मिक ट्रेनें देश भर में सामूहिक आध्यात्मिक पर्यटन के बढ़ते चलन को रेखांकित करती हैं। • पाली में: स्थानीय जैन परिवारों को बिना किसी खर्च के कई दूर-दराज के पवित्र तीर्थों के दर्शन करने का एक दुर्लभ और सुनहरा अवसर मिल रहा है। सवाल-जवाब 1. पाली में आयोजित होने वाली स्पेशल ट्रेन यात्रा क्या है? यह श्री शांतिनाथ जैन सेवा संस्थान द्वारा 1,100 जैन श्रद्धालुओं के लिए आयोजित एक पूरी तरह से मुफ्त, नौ दिवसीय रेल तीर्थ यात्रा है। 2. यह धार्मिक यात्रा कब शुरू होगी? इस विशेष रेल सफर की शुरुआत 4 जनवरी, 2027 को होने वाली है। 3. यह स्पेशल ट्रेन किन-किन तीर्थों तक जाएगी? यह सम्मेद शिखरजी, पावापुरी, राजगृही, कुंडलपुर, गुणायाजी, क्षत्रियकुंड, ऋजुबालिका और अयोध्या जैसे प्रमुख जैन तीर्थों के दर्शन कराएगी। 4. इस भव्य तीर्थ यात्रा का मुख्य संघपति किसे बनाया गया है? पाली के पारसमल बोकाडिया परिवार की सूरजकंवर को इस धार्मिक आयोजन का मुख्य संघपति नियुक्त किया गया है। https://trendkia.com/religion/1-100-shraddhaluon-ko-muphta-tirtha-yatra-para-le-jaega-pali-ka-jain-samaja-janavari-2027-men-chalegi-speshala-trena-10106 TrendKia — Har trend, sabse pehle.