# 11 अगस्त 2026 का पंचांग: सावन शिवरात्रि, मंगला गौरी व्रत और हनुमान पूजा का त्रिगुण संयोग, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

> 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि, दूसरे मंगला गौरी व्रत और मंगलवार के दिन हनुमानजी की पूजा का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन के सभी शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि की पूरी जानकारी यहाँ देखें।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/11-august-2026-panchang-sawan-shivratri-mangla-gauri-vrat-pujan-muhurat-39703 · **Language:** Hindi
**Tags:** आज का पंचांग, सावन शिवरात्रि, मंगला गौरी व्रत, हनुमान पूजा, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, 11 अगस्त 2026 पंचांग

11 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पावन और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। इस दिन सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ सावन शिवरात्रि का महान पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत और मंगलवार होने के कारण हनुमानजी की विशेष पूजा-अर्चना का अद्भुत त्रिवेणी योग बन रहा है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और संकटमोचन हनुमानजी की एक साथ पूजा करने से साधकों को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

## त्रिगुण संयोग का धार्मिक महत्व और लाभ
शास्त्रों के अनुसार सावन शिवरात्रि का दिन देवों के देव महादेव को अत्यंत प्रिय है। वहीं सावन के मंगलवार के दिन रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष फलदायी माना गया है। सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु और सुखद गृहस्थ जीवन की कामना के लिए माता गौरी का व्रत-पूजन करती हैं। इसके अतिरिक्त मंगलवार का दिन हनुमानजी की आराधना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन हनुमानजी की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है तथा सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों एवं ग्रहों के अशुभ प्रभाव का शमन होता है।

## विस्तृत पूजा विधि और नियम
सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत के दिन प्रातकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और सफ़ेद फूल अर्पित करें। फिर चंदन, अक्षत और नैवेद्य चढ़ाकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। संध्या के समय प्रदोष काल में भी शिव पूजा का विशेष विधान है, जबकि रात्रि में शिव चालीसा और मंत्रों के पाठ से जागरण करना शुभ माना जाता है।

मंगला गौरी व्रत के अंतर्गत माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं जैसे सिंदूर, चूड़ियां, फूल, फल और मिष्ठान समर्पित किए जाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल और लाल रंग के पुष्प चढ़ाएं। इस दिन हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भय दूर होता है और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।

## पंचांगीय स्थिति, ग्रह एवं नक्षत्र परिवर्तन
11 अगस्त 2026 को सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मध्यरात्रि के बाद 01:52 बजे (12 अगस्त) तक रहेगी, जिसके पश्चात अमावस्या तिथि का प्रारंभ होगा। नक्षत्रों की बात करें तो पुनर्वसु नक्षत्र प्रात: 10:09 बजे तक रहेगा, जिसके बाद पुष्य नक्षत्र की शुरुआत होगी। करण में विष्टि करण दोपहर 03:22 बजे तक रहेगा, उसके बाद शकुनि करण रात 01:52 बजे तक प्रभावी रहेगा। योग में सिद्धि योग शाम 06:51 बजे तक रहेगा, जिसके बाद व्यतीपात योग लगेगा। सूर्यदेव अश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जबकि चंद्रमा प्रात: 10:09 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र में रहने के उपरांत पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा।

## सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
11 अगस्त 2026 को सूर्योदय प्रात: 06:05 बजे होगा तथा सूर्यास्त सायं 06:58 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय प्रात: 04:10 बजे होगा और चंद्रास्त सायं 06:07 बजे होगा। इसके अतिरिक्त अगले दिन का चंद्रोदय 12 अगस्त को प्रात: 05:09 बजे दर्ज किया जाएगा।

## आज के शुभ मुहूर्त
- **ब्रह्म मुहूर्त:** प्रात: 04:23 बजे से 05:06 बजे तक
- **अमृत काल:** प्रात: 07:59 बजे से 09:25 बजे तक
- **अभिजीत मुहूर्त:** दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक
- **विजय मुहूर्त:** दोपहर 02:40 बजे से 03:33 बजे तक
- **गोधूलि मुहूर्त:** सायं 07:05 बजे से 07:26 बजे तक
- **निशिता मुहूर्त:** मध्यरात्रि 12:06 बजे से 12:49 बजे (12 अगस्त) तक
- **शिववास:** श्मशान में रात 01:52 बजे (12 अगस्त) तक, तत्पश्चात गौरी के साथ।

## आज के अशुभ मुहूर्त और राहुकाल
- **राहुकाल:** दोपहर 03:46 बजे से सायं 05:25 बजे तक
- **यमगण्ड:** प्रात: 09:08 बजे से 10:47 बजे तक
- **गुलिक काल:** दोपहर 12:27 बजे से 02:06 बजे तक
- **दुर्मुहूर्त:** प्रात: 08:28 बजे से 09:21 बजे तक
- **वर्ज्य:** सायं 05:26 बजे से 06:53 बजे तक
- **भद्रा:** प्रात: 05:49 बजे से दोपहर 03:22 बजे तक
- **विडाल योग:** प्रात: 05:49 बजे से 10:09 बजे तक
- **आडल योग:** प्रात: 10:09 बजे से अगली सुबह 05:50 बजे (12 अगस्त) तक

## इसका आप पर असर
11 अगस्त 2026 का पंचांग धार्मिक अनुष्ठानों और दैनिक कार्यों की योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष समय सारणी प्रदान करता है।

- **पूजा-पाठ का समय:** प्रात: 12:00 बजे से 12:53 बजे तक अभिजीत मुहूर्त और सुबह 07:59 से 09:25 बजे तक अमृत काल पूजा और जल अर्पण के लिए सर्वोत्तम हैं।
- **अशुभ समय से बचाव:** दोपहर 03:46 बजे से सायं 05:25 बजे के बीच राहुकाल रहेगा, इस दौरान कोई नया या मांगलिक कार्य न शुरू करें।
- **धार्मिक व्रत नियम:** सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन नियमों का पालन कर शाम को प्रदोष काल में पूजन संपन्न करें।
- **दिशाशूल चेतावनी:** उत्तर दिशा का दिशाशूल होने के कारण इस दिशा में अकारण यात्रा करने से बचें।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पंचांगीय गणना 11 अगस्त 2026 को पड़ने वाले सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की खगोलीय स्थिति पर आधारित है।

- **तिथि और पर्व गणना:** सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को होने के कारण सावन शिवरात्रि का व्रत इसी दिन निर्धारित हुआ है।
- **मंगलवार का योग:** मंगलवार का दिन होने से मंगला गौरी व्रत और हनुमानजी की आराधना का विशेष संयोग प्राकृतिक रूप से निर्मित हुआ है।
- **नक्षत्र परिवर्तन:** चंद्रमा का पुनर्वासु नक्षत्र से पुष्य नक्षत्र में प्रवेश दिन के पूजा फलों में वृद्धि करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. 11 अगस्त 2026 को कौन-कौन से मुख्य व्रत और त्योहार हैं?
इस दिन सावन शिवरात्रि, दूसरा मंगला गौरी व्रत और मंगलवार हनुमान पूजा का त्रिगुण संयोग है।

### 2. 11 अगस्त 2026 का राहुकाल समय क्या है?
राहुकाल दोपहर 03:46 बजे से सायं 05:25 बजे तक रहेगा।

### 3. पूजा के लिए आज का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा है?
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक और अमृत काल सुबह 07:59 बजे से 09:25 बजे तक है।

### 4. आज के दिन कौन सी दिशा का दिशाशूल है?
आज उत्तर दिशा में दिशाशूल है।

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