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  "title": "2 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी हरछठ, जानिए पूजा सामग्री और व्रत के जरूरी नियम",
  "summary": "संतान की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले हरछठ व्रत की तिथि, पूरी पूजा सामग्री और विधि की जानकारी यहां देखें।",
  "content": "संतान की लंबी आयु और उनके सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाने वाला हरछठ का पावन पर्व इस साल 2 सितंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। यह विशेष व्रत उन दंपतियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है जिन्हें संतान प्राप्ति में किसी प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान बलराम की पूजा की जाती है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हल षष्ठी के पावन दिन ही भगवान बलराम का जन्म हुआ था। इसके अलावा इस पर्व पर चंदन घिसकर टीका लगाने की परंपरा भी है, जिसके चलते इसे चंदन छठ के नाम से भी जाना जाता है। हरछठ के इस पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा करने के लिए कई तरह की सामग्रियों की आवश्यकता पड़ती है और इसकी एक निश्चित प्रक्रिया होती है।\n\nहरछठ पूजा सामग्री लिस्ट\nइस व्रत की पूजा और अनुष्ठान को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार की पारंपरिक सामग्रियों को पहले से ही एकत्र करना आवश्यक होता है। इसमें मुख्य रूप से भैंस का दूध, घी, दही और गोबर शामिल किया जाता है। इसके अलावा महुए का फल, फूल और पत्ते भी इस पूजा में अनिवार्य रूप से उपयोग किए जाते हैं। पूजा की थाली और स्थान को सजाने के लिए ऐपण, मिट्टी के छोटे कुल्हड़, ज्वार की धानी और मटकी की जरूरत होती है। इस पूरी पूजन प्रक्रिया में देवली-छेवली, तालाब में उगा हुआ चावल जिसे पसही चावल भी कहते हैं, भुना हुआ चना, घी में भुना महुआ और धान का लावा का विशेष महत्व होता है। इसके साथ ही गेहूं, जौ, अरहर, मक्का, मूंग और धान जैसे सात प्रकार के अनाज, लाल चंदन, हल्दी, नया वस्त्र, जनेऊ, कुश और मिट्टी का दीपक भी सामग्री सूची का अहम हिस्सा हैं।\n\nहरछठ की पूजा विधि\nहरछठ का यह पूरा व्रत बेहद कड़े नियमों के साथ निराहार रखा जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दौरान अन्न का बिल्कुल भी सेवन नहीं किया जाता है। व्रती इस खास दिन पर हल से जोते या बोए गए किसी भी तरह के अन्न, फल या सब्जी का सेवन करने से बचते हैं और पूरे दिन केवल भैंस के दूध तथा दही का ही सेवन करते हैं। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सबसे पहले महुए की दातून से अपने दांत साफ करती हैं और फिर स्नान करने के बाद व्रत का दृढ़ संकल्प लेती हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थल पर भैंस के गोबर से दीवार पर छठ माता, हल, सप्तऋषि, पशु और किसान के चित्र उकेरे जाते हैं। फिर एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश की स्थापना की जाती है और उसी चौकी पर भगवान गणेश तथा माता पार्वती की प्रतिमाएं भी विराजित की जाती हैं। इन सभी की स्थापना के बाद सभी पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए विधि-विधान से पूजन किया जाता है। इसके पश्चात एक मिट्टी के कुल्हड़ में ज्वार की धानी और महुआ भरा जाता है, जबकि एक मटकी में देवली-छेवली रखी जाती है। इसके बाद क्रमशः हल छठ माता की, कुल्हड़ की और मटकी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान सात तरह के अनाज, धूल के साथ भुने हुए चने, विभिन्न आभूषण और हल्दी से रंगे हुए नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन किया जाता है, जिसमें इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि मक्खन गाय का न होकर केवल भैंस के दूध का ही बना हो। अंत में सभी लोग बैठकर हरछठ की व्रत कथा सुनते हैं और फिर भगवान बलराम तथा भगवान कृष्ण की आरती उतारकर अनुष्ठान पूरा करते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद व्रती वहीं बैठकर महुए के पत्ते पर महुए का फल और भैंस के दूध से तैयार दही का सेवन करके अपना व्रत खोलते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nहरछठ व्रत का पालन करने वाले परिवारों और संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले व्रतियों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है।\n\n• भारत में: देशभर में माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और आरोग्यता के लिए इस कठिन निराहार व्रत का पालन करती हैं। इस दिन बाजार में महुआ, भैंस का दूध, दही और पारंपरिक पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है।\n• दैनिक जीवन पर असर: इस व्रत के दौरान अन्न का सेवन वर्जित होने के कारण खानपान में विशेष सावधानी रखनी होती है और केवल भैंस के दूध से बने उत्पादों का ही उपयोग किया जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हरछठ 2026 में किस दिन मनाई जाएगी?\nहरछठ का पावन पर्व इस साल 2 सितंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।\n\n2. हरछठ व्रत में किसकी पूजा की जाती है?\nइस व्रत में मुख्य रूप से भगवान बलराम की पूजा की जाती है क्योंकि इस दिन उनका जन्म हुआ था।\n\n3. इस व्रत में किस प्रकार का आहार लिया जाता है?\nयह व्रत निराहार रखा जाता है और इसमें केवल भैंस के दूध और दही का सेवन किया जाता है।\n\n4. हरछठ को अन्य किस नाम से जाना जाता है?\nइस दिन चंदन घिसकर टीका लगाने के कारण इसे चंदन छठ भी कहा जाता है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-09-01",
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