# 25 जुलाई से भगवान विष्णु की योगनिद्रा, चार महीने टलेंगे शादी और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य

> देवशयनी एकादशी के साथ 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास शुरू हो रहा है, जिसमें अगले चार महीनों तक विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे.

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/25-julai-se-bhagavana-vishnu-ki-yoganidra-chara-mahine-talenge-shadi-aura-griha-pravesha-jaise-shubha-karya-9271 · **Language:** Hindi
**Tags:** चातुर्मास 2026, देवशयनी एकादशी, देवउठनी एकादशी, शुभ मुहूर्त, विवाह मुहूर्त, ज्योतिष

देशभर में सावन शुरू होने से ठीक पहले आने वाली देवशयनी एकादशी हर साल शादी-ब्याह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक आयोजनों पर चार महीने के लिए विराम लगा देती है. साल 2026 में यह एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को पड़ रही है और इसी तारीख से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, इसलिए अगले चार महीनों तक कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही रहती है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के मुताबिक इसके पीछे एक पौराणिक कथा और गहरा आध्यात्मिक महत्व दोनों जुड़े हैं.

## 25 जुलाई से 19-20 नवंबर तक चलेगी यह अवधि
वैदिक पंचांग के हिसाब से चातुर्मास की गिनती आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर खत्म होती है. साल 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा और इसी दिन से भगवान विष्णु की योगनिद्रा शुरू मानी जाएगी. दूसरी तरफ चातुर्मास का समापन देवउठनी एकादशी पर होगा, जो इस साल 20 नवंबर 2026 को पड़ रही है. इस हिसाब से 25 जुलाई से 19 नवंबर 2026 तक करीब चार महीने की यह अवधि चातुर्मास कहलाएगी, जिसमें कोई भी नया शुभ काम शुरू करने से परहेज किया जाता है.

## विवाह और मुंडन जैसे कार्य क्यों टाले जाते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा धारण कर लेते हैं और इन चार महीनों के दौरान सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं. यही वजह है कि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत जैसे तमाम मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसके बजाय श्रद्धालु इन चार महीनों में पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और भगवान की भक्ति पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हैं. जैसे ही देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की योगनिद्रा टूटती है और वे जागते हैं, वैसे ही शुभ और मांगलिक कार्यों का सिलसिला दोबारा शुरू हो जाता है.

## ग्रहों की चाल भी बनाती है इसे खास
आनंद भारद्वाज के मुताबिक चातुर्मास का महत्व सिर्फ धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध ग्रहों की स्थिति से भी है. इस पूरी अवधि में सुख, ऐश्वर्य और दांपत्य जीवन को प्रभावित करने वाला शुक्र ग्रह और ज्ञान, धर्म तथा शुभ फल देने वाले देवगुरु बृहस्पति दोनों अस्त अवस्था में रहते हैं. ज्योतिषीय मान्यता है कि इन दोनों शुभ ग्रहों के कमजोर पड़ने से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और बाकी मांगलिक कार्यों के लिए यह समय अनुकूल नहीं रहता. यही कारण है कि चातुर्मास के पूरा होने के बाद ही शुभ और मांगलिक कार्य दोबारा शुरू करने की परंपरा मानी जाती है.

## इसका आप पर असर
अगर आप या आपके परिवार में अगले कुछ महीनों में शादी, गृह प्रवेश या मुंडन जैसा कोई कार्यक्रम प्लान कर रहे हैं तो तारीख तय करने से पहले चातुर्मास का ध्यान रखना जरूरी होगा.

- **भारत में:** 25 जुलाई से 19-20 नवंबर 2026 तक ज्यादातर परिवार नई शादी, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्यों की तारीख इस अवधि के बाद ही तय करेंगे.
- **श्रद्धालुओं के लिए:** इन चार महीनों में पूजा-पाठ, व्रत और दान पर जोर बढ़ेगा, जिससे मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में सक्रियता बढ़ सकती है.

## सवाल-जवाब

### 1. चातुर्मास 2026 में कब से शुरू हो रहा है?
चातुर्मास 25 जुलाई 2026, शनिवार को देवशयनी एकादशी से शुरू होगा.

### 2. चातुर्मास कब खत्म होगा?
चातुर्मास देवउठनी एकादशी पर खत्म होगा, जो इस साल 20 नवंबर 2026 को पड़ रही है, इस तरह यह अवधि 25 जुलाई से 19 नवंबर 2026 तक मानी जा रही है.

### 3. चातुर्मास के दौरान कौन-कौन से काम नहीं किए जाते?
इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.

### 4. चातुर्मास में भगवान विष्णु कहां रहते हैं?
मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं.

### 5. इस दौरान सृष्टि का संचालन कौन करता है?
चातुर्मास के चार महीनों में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव निभाते हैं.

### 6. ज्योतिष के हिसाब से चातुर्मास अशुभ क्यों माना जाता है?
इस अवधि में सुख-ऐश्वर्य के कारक शुक्र ग्रह और शुभ फल देने वाले बृहस्पति दोनों अस्त अवस्था में रहते हैं, जिससे मांगलिक कार्यों के लिए समय अनुकूल नहीं माना जाता.

### 7. श्रद्धालु चातुर्मास में क्या करते हैं?
श्रद्धालु इन चार महीनों में पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और भगवान की भक्ति पर विशेष ध्यान देते हैं.

### 8. यह जानकारी किसने दी है?
यह जानकारी उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने दी है.

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