46 साल से लापता है कालीघाट की देवी के जेवरों वाले लॉकर की चाबी, सबर्ण रॉय चौधरी परिवार पहुंचा अदालत कोलकाता के कालीघाट मंदिर में देवी के गहनों वाले बैंक लॉकर की चाबी 1980 से गायब बताई जा रही है। पुराने जमींदार सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने खजाने की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए अदालत में अर्जी दी है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर के खजाने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के प्रबंधन पर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, जिसके बाद कोलकाता के पुराने जमींदार परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने जताई चिंता कोलकाता के पूर्व जमींदार सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने मंदिर में रखे देवी के गहनों और कीमती सामान की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। परिवार का दावा है कि मंदिर के जेवरात और बहुमूल्य वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए एक सरकारी बैंक में खास लॉकर बनाया गया था, लेकिन उसकी चाबी बीते 46 साल से किसी को नहीं मिल रही। यह चाबी साल 1980 से गायब बताई जा रही है। आरोप के मुताबिक मंदिर का यह खजाना करीब 100 करोड़ रुपये का आंका जाता है, जिसकी सुरक्षा को लेकर परिवार बेहद चिंतित है। इन्हीं आरोपों के आधार पर परिवार ने अदालत में कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की है। परिवार परिषद के सचिव का दावा सबर्ण रॉय चौधरी फैमिली काउंसिल के सचिव देवर्षि रॉय चौधरी ने बताया कि यह लॉकर खासतौर पर मंदिर की संपत्ति और देवी के गहनों को सुरक्षित रखने के मकसद से बनवाया गया था। लेकिन पिछले करीब चार दशकों से इस लॉकर की चाबी का कहीं कोई पता नहीं चल पाया है। उन्होंने अदालत के सामने सीधा सवाल रखा है कि आखिर देवी के ये कीमती जेवर और सामान इस वक्त कहां रखे हैं और क्या वे वाकई सुरक्षित हालत में हैं। परिवार ने इस पूरे मसले पर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है। संपत्ति की निगरानी करने वाली समिति पर भी सवाल परिवार ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मंदिर की संपत्तियों और खजाने का हिसाब-किताब रखने के लिए बनी समिति का कार्यकाल भी अब खत्म हो चुका है। इसके बावजूद मंदिर के कामकाज और संपत्ति प्रबंधन को लेकर कोई नई व्यवस्था सामने नहीं आई है। सबर्ण रॉय चौधरी परिवार लंबे समय से कालीघाट मंदिर की संपत्तियों और खजाने की स्थिति को लेकर सवाल उठाता आ रहा है, और अब उन्होंने इसे औपचारिक रूप से अदालत के सामने रखा है कि आखिर इतने वर्षों से गहनों का कोई हिसाब क्यों नहीं दिया गया। कालीघाट मंदिर का धार्मिक महत्व कालीघाट मंदिर पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में आदि गंगा नदी के किनारे स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र हिंदू मंदिर है। इसे माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहीं माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा और उंगलियां गिरी थीं। मंदिर में मौजूद मां काली की प्रतिमा भी अनोखी है, जिसमें उनकी लंबी सोने की जीभ बनी हुई है। यही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व इस मंदिर के खजाने को और भी अनमोल बना देता है, जिससे उसकी सुरक्षा को लेकर उठे सवाल और गंभीर हो जाते हैं। अब आगे क्या फिलहाल इस पूरे विवाद में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह पूरी तरह अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा। सबर्ण रॉय चौधरी परिवार की मांग है कि गायब चाबी, देवी के गहनों की मौजूदा स्थिति और समिति के कार्यकाल को लेकर जल्द से जल्द स्पष्ट जवाब दिए जाएं। इसका आप पर असर यह मामला सीधे तौर पर आम पाठकों की जेब पर असर नहीं डालता, लेकिन मंदिर प्रशासन और दान-चढ़ावे में पारदर्शिता को लेकर भरोसे का सवाल जरूर खड़ा करता है। • भारत में: देश भर में बड़े मंदिरों के ट्रस्ट और समितियां करोड़ों रुपये के दान और गहनों की देखरेख करती हैं। यह विवाद दिखाता है कि अगर हिसाब-किताब और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही हो तो दशकों तक जवाबदेही तय करना कितना मुश्किल हो जाता है। • कोलकाता में: कालीघाट मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह खबर मंदिर प्रशासन की साख से जुड़ा सवाल है। कोर्ट के आदेश के बाद अगर जांच शुरू होती है, तो आने वाले दिनों में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और लॉकर प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है। • पारदर्शिता: इस मामले से देश के अन्य धार्मिक ट्रस्टों पर भी नियमित ऑडिट और सुरक्षा समीक्षा को लेकर दबाव बढ़ सकता है। • कानूनी असर: अगर अदालत जांच का आदेश देती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और समिति सदस्यों से जवाबदेही मांगी जा सकती है, जिससे भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के नियम बन सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कालीघाट मंदिर के लॉकर की चाबी आखिर 1980 में कैसे और क्यों गायब हुई, इसका कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। मामला अब सबर्ण रॉय चौधरी परिवार की शिकायत के बाद अदालत के सामने है। • पुराना जुड़ाव: सबर्ण रॉय चौधरी कोलकाता का पुराना जमींदार परिवार है, जो लंबे समय से कालीघाट मंदिर की संपत्तियों और खजाने की स्थिति को लेकर सवाल उठाता रहा है, इसलिए उन्होंने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से अदालत तक पहुंचाया। • निगरानी में कमी: परिवार के मुताबिक मंदिर की संपत्तियों का हिसाब रखने वाली समिति का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है, जिससे लॉकर और गहनों की निगरानी को लेकर स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है। • अस्पष्ट कारण: चाबी असल में कहां है, यह किसी दुर्घटना, लापरवाही या जानबूझकर की गई अनदेखी का नतीजा है, इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। • आगे की राह: अब यह पूरा मामला अदालत के आदेश पर निर्भर करता है, जो तय करेगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। सवाल-जवाब 1. कालीघाट मंदिर के लॉकर की चाबी कब से गायब है? आरोप के मुताबिक यह चाबी साल 1980 से गायब है, यानी 46 साल से ज्यादा समय से इसका पता नहीं चल पाया है। 2. यह मामला अदालत तक कैसे पहुंचा? कोलकाता के पुराने जमींदार सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने मंदिर के खजाने की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में अर्जी और लिखित शिकायत दी है। 3. परिवार का मुख्य आरोप क्या है? परिवार का आरोप है कि देवी के गहनों के लिए बने बैंक लॉकर की चाबी दशकों से गायब है और मंदिर प्रबंधन में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता की आशंका है। 4. सबर्ण रॉय चौधरी फैमिली काउंसिल के सचिव कौन हैं? देवर्षि रॉय चौधरी सबर्ण रॉय चौधरी फैमिली काउंसिल के सचिव हैं, जिन्होंने यह दावा किया है। 5. मंदिर की संपत्ति की निगरानी करने वाली समिति को लेकर क्या आरोप है? परिवार का कहना है कि मंदिर की संपत्तियों का हिसाब रखने वाली समिति का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है। 6. कालीघाट मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है? यह मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और यहां मां काली की प्रतिमा में लंबी सोने की जीभ है। 7. आगे क्या होगा? आगे की कार्रवाई पूरी तरह अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी। https://trendkia.com/religion/46-sala-se-lapata-hai-kalighat-ki-devi-ke-jevaron-vale-lokara-ki-chabi-sabarna-roychowdhury-parivara-pahuncha-adalata-29409 TrendKia — Har trend, sabse pehle.