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  "type": "article",
  "title": "8 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली, जानें लक्ष्मी पूजन और अभ्यंग स्नान का सही समय",
  "summary": "पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या तिथि का संयोग रहेगा। इस दिन दिवाली का पर्व मनाने के साथ ही अभ्यंग स्नान और लक्ष्मी पूजन संपन्न किया जाएगा।",
  "content": "वर्ष 2026 में 8 नवंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इस तारीख को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या तिथि दोनों का प्रभाव रहेगा। सनातन पंचांग के मुताबिक इस दिन रविवार होने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। सुबह के वक्त अभ्यंग स्नान की परंपरा निभाई जाएगी और प्रदोष काल के साथ ही रात के समय घरों में माता लक्ष्मी की आराधना होगी। इस विशेष अवसर पर विभिन्न मुहूर्तों का खास ध्यान रखा जाता है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।\n\nपंचांग की मुख्य तिथियां और योग\n\nपंचांग गणना के अनुसार 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके उपरांत अमावस्या तिथि का आरंभ हो जाएगा जो पर्व के अगले चरणों को निर्धारित करती है। इस पूरे दिन और अगली सुबह तक स्वाती नक्षत्र प्रभावी रहेगा जो कल सुबह 7 बजकर 24 मिनट तक अपनी स्थिति बनाए रखेगा। इसके साथ ही खगोलीय और ज्योतिषीय गणना के अनुसार आयुष्मान योग रात 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इन सभी योगों और तिथियों का मेल इस दिन को त्‍योहार के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।\n\nदिवाली और लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त\n\nपर्व के दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पूजन का समय बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। वर्ष 2026 में लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय शाम 5 बजकर 54 मिनट से लेकर रात 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में श्रद्धालु अपने घरों और प्रतिष्ठानों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इसके अलावा दिनभर के अन्य शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:54 ए एम से 05:46 ए एम तक, प्रातः सन्ध्या सुबह 05:20 ए एम से 06:38 ए एम तक, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 ए एम से दोपहर 12:30 पी एम तक, गोधुलि मुहूर्त शाम 05:39 पी एम से 06:05 पी एम तक और सायाह्न सन्ध्या शाम 05:39 पी एम से 06:57 पी एम तक निर्धारित की गई है।\n\nअभ्यंग स्नान का समय और महत्व\n\nकार्तिक चतुर्दशी के सूर्योदय के तुरंत बाद अभ्यंग स्नान करने का विधान है। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार इस वर्ष चतुर्दशी 8 नवंबर को पड़ रही है इसलिए स्नान भी इसी तारीख को किया जाएगा। इसके लिए सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक का समय सबसे उपयुक्त बताया गया है। इस दौरान शरीर पर उबटन लगाकर स्नान करने से आरोग्यता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।\n\nप्रमुख शहरों में राहुकाल की स्थिति\n\nकिसी भी मांगलिक या धार्मिक कार्य से पहले राहुकाल के समय का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। 8 नवंबर को देश के अलग-अलग शहरों में राहुकाल की समय सारणी इस प्रकार रहेगी। दिल्ली में शाम 04:10 से शाम 05:31 तक राहुकाल रहेगा। मुंबई में यह समय शाम 04:37 से शाम 06:02 तक रहेगा। चंडीगढ़ में शाम 04:09 से शाम 05:30 तक राहुकाल का प्रभाव रहेगा। लखनऊ में दोपहर बाद 03:57 से शाम 05:19 तक का समय राहुकाल के लिए तय किया गया है। भोपाल में शाम 04:14 से शाम 05:38 तक और कोलकाता में दोपहर बाद 03:32 से शाम 04:56 तक राहुकाल रहेगा। अहमदाबाद में शाम 04:34 से शाम 05:58 तक तथा चेन्नई में शाम 04:13 से शाम 05:40 तक राहुकाल का समय रहेगा।\n\nसूर्योदय और सूर्यास्त का समय\n\nप्रकाश के इस पावन पर्व पर खगोलीय स्थिति के अनुसार सूर्योदय सुबह 06:37 बजे होगा और दिन ढलने पर सूर्यास्त शाम 05:31 बजे दर्ज किया जाएगा। इन दोनों समय के आधार पर ही दिनभर के तमाम धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा की तैयारियों की रूपरेखा तय की जाती है।\n\nइसका आप पर असर\nदिवाली और इससे जुड़े पर्वों के समय का पालन करने से धार्मिक कार्यों में सही शुचिता और नियमों का पालन सुनिश्चित होता है।\n\n• भारत में: देश भर के श्रद्धालुओं को लक्ष्मी पूजन और अभ्यंग स्नान के लिए निर्धारित समय सारणी का पालन करने में मदद मिलती है। सही मुहूर्त में पूजा करने से धार्मिक अनुष्ठान तय समय पर पूरे होते हैं।\n• दिल्ली में: स्थानीय नागरिकों को शाम 04:10 से शाम 05:31 के बीच राहुकाल के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण कार्य या नई खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। इस समयावधि को छोड़कर ही बाकी आवश्यक तैयारी पूरी की जा सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nधार्मिक पर्वों और मुहूर्तों की यह गणना प्राचीन खगोलीय और पंचांगीय पद्धतियों के आधार पर तय की जाती है, जो सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की गति पर आधारित होती है।\n\n• तिथि का गोचर: सूर्योदय और चंद्र स्थिति के आधार पर तिथियों का घटना और बढ़ना निर्धारित होता है, जिसके कारण 8 नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या दोनों का प्रभाव रहता है।\n• नक्षत्र प्रभाव: खगोलीय गणनाओं के अनुसार स्वाती नक्षत्र और आयुष्मान योग की स्थिति विशेष समय-सारणी का निर्माण करती है, जो पंचांग के नियमों के तहत निकाली जाती है।\n• क्षेत्रीय अंतर: भौगोलिक स्थिति और देशांतर के अंतर के कारण विभिन्न शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में भिन्नता होती है, जिसके चलते राहुकाल की अवधि हर शहर में अलग दर्ज की जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 8 नवंबर 2026 को कौन सा प्रमुख त्योहार मनाया जाएगा?\nइस दिन दिवाली का पावन पर्व, अभ्यंग स्नान और लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।\n\n2. चतुर्दशी तिथि कब तक रहेगी?\nचतुर्दशी तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी।\n\n3. लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?\nवर्ष 2026 में लक्ष्मी पूजन शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 50 मिनट तक किया जा सकेगा।\n\n4. अभ्यंग स्नान का शुभ समय क्या है?\nअभ्यंग स्नान के लिए सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक का समय निर्धारित किया गया है।\n\n5. दिल्ली में राहुकाल का समय क्या रहेगा?\nदिल्ली में राहुकाल शाम 04:10 से शाम 05:31 तक रहेगा।\n\n6. 8 नवंबर को सूर्योदय कितने बजे होगा?\nइस दिन सूर्योदय सुबह 06:37 बजे और सूर्यास्त शाम 05:31 बजे होगा।",
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  "publishedAt": "2026-11-07",
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