आगरा के पश्चिमपुरी शिव मंदिर में सावन की गूंज, चारों सोमवार को जलाभिषेक से पूरी होंगी मनोकामनाएं उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित पश्चिमपुरी के प्राचीन शिव मंदिर में सावन के महीने में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। मान्यता है कि यहां सावन के चारों सोमवार को जल और बेलपत्र अर्पित करने से बाबा भोलेनाथ सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा के पश्चिमपुरी क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिर इन दिनों आस्था और भक्ति का मुख्य केंद्र बना हुआ है। पवित्र सावन महीने की शुरुआत के साथ ही इस सिद्ध पीठ में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साधक की सभी सकारात्मक इच्छाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से सावन के पावन काल में मंदिर का पूरा परिवेश भक्तिमय भजनों और जयकारों से सराबोर रहता है। सावन के महीने में उमड़ती है श्रद्धालुओं की अपार भीड़ सावन माह के दौरान इस ऐतिहासिक देवालय में हर दिन सुबह-सवेरे से ही भक्तों का आगमन आरंभ हो जाता है। आगरा शहर के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां नंगे पांव तथा कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके पहुंचते हैं। सावन के दिनों में मंदिर परिसर का पूरा वातावरण 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के गगनभेदी जयकारों से निरंतर गूंजता रहता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही मन को असीम शांति मिलती है। प्राचीन शिवलिंग का महत्व और चमत्कारी मान्यताएं पश्चिमपुरी के इस देवालय की अपनी एक विशेष ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान है। स्थानीय निवासियों और पीढ़ियों से आ रहे श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां स्थापित शिवलिंग अत्यंत चमत्कारी और दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण है। जो भी भक्त निष्कपट भाव से इस स्थान पर शीश नवाता है, उसे सकारात्मक फल की प्राप्ति होती है। मंदिर में स्थापित इस शिवलिंग के प्रति क्षेत्र के लोगों की श्रद्धा अत्यंत गहरी है, जिसके कारण वर्ष भर यहां धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहता है, किंतु सावन में इसका महात्म्य बहुगुणित हो जाता है। मुख्य पुजारी पंडित राजेश कुमार पाण्डेय का वक्तव्य मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राजेश कुमार पाण्डेय ने स्थान के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह शिवधाम अत्यंत अद्भुत और प्राचीन है। उन्होंने जानकारी दी कि सावन के पावन अवसर पर यहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने आते हैं। पंडित राजेश कुमार पाण्डेय के अनुसार, सावन के चारों सोमवार को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और महाआरती का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु कई किलोमीटर दूर से आकर शिवलिंग पर शुद्ध जल, दूध और ताजे बेलपत्र अर्पित करते हैं तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं शांति की मनोकामना करते हैं। सावन के चारों सोमवार का विशेष धार्मिक अनुष्ठान सनातन परंपरा में सावन के सोमवार का विशेष स्थान माना गया है, और इस मंदिर में इन दिनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन के चारों सोमवार को तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। मुख्य पुजारी पंडित राजेश कुमार पाण्डेय का कहना है कि जो श्रद्धालु सावन के प्रत्येक सोमवार को नियमपूर्वक, सच्चे हृदय और पूर्ण विधि-विधान से शिवजी की आराधना करते हैं, भगवान शिव उनकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय सेवा समितियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। भक्ति भाव से परिपूर्ण रहता है संपूर्ण मंदिर परिसर पूरे सावन मास में मंदिर के आसपास का माहौल पूरी तरह से आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आता है। मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक केवल शिव भक्तों की गूंज सुनाई देती है। दूध, जल, फूल, धतूरा और बेलपत्र की सुगंध से पूरा क्षेत्र सुगंधित रहता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु की आस्था वर्ष-दर-वर्ष और अधिक सुदृढ़ होती जा रही है, जिससे यह स्थल पूरे क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक आकर्षण बन चुका है। इसका आप पर असर भारत में: सावन माह के दौरान शिव मंदिरों में दर्शन और विशेष अनुष्ठानों में भाग लेना सनातन परंपरा का प्रमुख हिस्सा रहता है। आगरा में: आगरा और आसपास के स्थानीय निवासियों के लिए पश्चिमपुरी मंदिर में सावन के सोमवार पर सुगम दर्शन और जलाभिषेक की व्यवस्था उपलब्ध रहती है। सवाल-जवाब 1. पश्चिमपुरी का प्राचीन शिव मंदिर कहां स्थित है? यह प्राचीन शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित पश्चिमपुरी क्षेत्र में स्थित है। 2. सावन के सोमवार का इस मंदिर में क्या महत्व है? मान्यता है कि सावन के चारों सोमवार को यहां विधि-विधान से पूजा और जलार्पण करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 3. मंदिर के मुख्य पुजारी कौन हैं? मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राजेश कुमार पाण्डेय हैं, जो सावन की पूजा व्यवस्था की देखरेख करते हैं। 4. श्रद्धालु शिवलिंग पर क्या-क्या वस्तुएं चढ़ाते हैं? भक्तगण मुख्यतः गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित करके सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। 5. क्या मंदिर में दूर-दराज से भी श्रद्धालु आते हैं? हां, आगरा शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण और क्षेत्रीय इलाकों से भी लोग कई किलोमीटर तय करके दर्शन के लिए पहुंचते हैं। https://trendkia.com/religion/agra-ke-paschimpuri-shiv-mndira-men-sawan-ki-gunja-charon-somavara-ko-jalabhisheka-se-puri-hongi-manokamanaen-14910 TrendKia — Har trend, sabse pehle.