अजा एकादशी व्रत कब है, जानिए सही तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और राजा हरिश्चंद्र की पौराणिक कथा अजा एकादशी व्रत साल 2026 में सात सितंबर को रखा जाएगा। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है और व्रत के साथ दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित अजा एकादशी का व्रत सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन अवसर पर भक्तजन उपवास रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं तथा जरूरतमंदों को दान और परोपकार के कार्यों में भाग लेते हैं। इस व्रत का संबंध पौराणिक कथाओं में राजा हरिश्चंद्र के जीवन से भी जोड़ा जाता है, जो सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने के प्रतीक माने जाते हैं। व्रत की तिथि और पंचांग विवरण हिन्दू पंचांग के अनुसार अजा एकादशी का यह पावन व्रत सात सितंबर 2026, सोमवार के दिन रखा जाएगा। यह तिथि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दौरान आती है, जिसे भगवान विष्णु के उपासक बड़े नियम और निष्ठा के साथ मनाते हैं। शुभ मुहूर्त और खगोलीय समय जो श्रद्धालु सुबह के समय धार्मिक अनुष्ठान करना चाहते हैं, उनके लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:49 बजे से 6:32 बजे तक रहेगा। यह समय स्नान, ध्यान, प्रार्थना और दान जैसे कार्यों के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:22 बजे से 2:14 बजे के बीच रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 4:00 बजे से 4:51 बजे तक संभावित है। हालांकि, सूर्योदय और चंद्रोदय के समय में भिन्नता के कारण स्थानीय पंचांग की मदद लेना उचित रहता है। व्रत के नियम और खानपान इस व्रत के दौरान खानपान को लेकर विशेष संयम रखा जाता है। कुछ श्रद्धालु बिना जल के निर्जला व्रत रखते हैं, वहीं अन्य लोग फलाहार या दूध, फल और अनुमति प्राप्त सात्विक सामग्री का सेवन करते हैं। परंपरागत रूप से इस दिन चावल, अनाज, दाल, मांसाहारी भोजन और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित रहता है। पारणा का सही समय द्वादशी तिथि के सूर्योदय के पश्चात ही व्रत का पारण किया जाता है। पारणा का यह समय स्थानीय पंचांग की गणना पर निर्भर करता है, इसलिए हर शहर के लोगों को अपने नजदीकी कैलेंडर के अनुसार ही व्रत खोलना चाहिए। पूजा की विधि व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करने से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर भगवान को पीले फूल, तुलसी के पत्ते, चंदन और सात्विक भोग अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान ओम नमो नारायणाय मंत्र का जाप किया जाता है और कथा सुनी जाती है। धार्मिक महत्व और कथा अजा एकादशी की महिमा राजा हरिश्चंद्र की कथा से जुड़ी हुई है, जिन्होंने भीषण कठिनाइयों के बीच भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा था। इस व्रत को करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शांति की प्राप्ति होती है। इसका आप पर असर अजा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी सेहत के अनुसार उपवास का तरीका चुनना चाहिए ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे। • भारत में: सनातन परंपराओं का पालन करने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए यह व्रत आत्म-संयम और धार्मिक अनुशासन का पालन करने का अवसर प्रदान करता है। • स्थानीय स्तर पर: देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर धार्मिक आयोजनों और पूजा सामग्री के बाजारों में रौनक बढ़ती है। सवाल-जवाब 1. अजा एकादशी 2026 में किस दिन है? अजा एकादशी सात सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। 2. इस व्रत में किन चीजों का सेवन वर्जित है? इस दिन चावल, अनाज, दाल, मांसाहारी भोजन और मदिरा का सेवन वर्जित माना जाता है। 3. ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है? ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:49 बजे से 6:32 बजे तक रहेगा। 4. व्रत का पारण कब किया जाता है? व्रत का पारण द्वादशी तिथि के सूर्योदय के पश्चात निर्धारित समय पर किया जाता है। https://trendkia.com/religion/aja-ekadashi-2026-date-auspicious-timings-puja-vidhi-and-significance-of-the-sacred-fast-28828 TrendKia — Har trend, sabse pehle.