अजमेर में 150 साल पुराना चारभुजानाथ मंदिर, जहां वर्षा जल संचयन से होती है अपरस सेवा अजमेर के नया बाजार स्थित 150 साल से अधिक पुराने चारभुजानाथ मंदिर में वर्षा जल संचयन और अपरस सेवा की अनूठी परंपरा का पालन किया जाता है। राजस्थान के अजमेर स्थित नया बाजार के घी मंडी इलाके में एक डेढ़ सदी पुराना मंदिर अपनी सदियों पुरानी परंपराओं और पर्यावरण-अनुकूल निष्ठा के लिए जाना जाता है। 150 वर्षों से अधिक प्राचीन चारभुजानाथ मंदिर धार्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र है, जहां ठाकुर जी का अभिषेक और नियमित अनुष्ठान नल के पानी से नहीं बल्कि विशेष रूप से सहेजे गए बारिश के जल से किए जाते हैं। इस ऐतिहासिक स्थल पर अग्रवाल पंचायत मारवाड़ी घड़ा की देखरेख में पूजा-अर्चना का क्रम पीढ़ी-दर-पीढ़ी जारी है। अपरस सेवा और जल संचयन की अनूठी व्यवस्था मंदिर परिसर में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिसे स्थानीय परंपरा में 'अपरस सेवा' कहा जाता है। इस सेवा-पद्धति को पूरी निष्ठा के साथ बनाए रखने के लिए मंदिर प्रबंधन ने परिसर में एक विशेष भूमिगत टैंक तैयार कराया है। मानसूनी वर्षा के समय इस टैंक में बारिश का शुद्ध जल एकत्र किया जाता है। भगवान चारभुजानाथ की दुर्लभ और मनोहारी मूर्ति के पवित्र स्नान और अन्य धार्मिक गतिविधियों में केवल इसी सहेजे गए वर्षा जल का प्रयोग किया जाता है। पुजारियों की चौथी पीढ़ी और सख्त गणवेश नियम वर्तमान में पुजारी परिवार की चौथी पीढ़ी भगवान चारभुजानाथ की नित्य सेवा और दैनिक अनुष्ठानों की जिम्मेदारी संभाल रही है। यह मंदिर अग्रवाल पंचायत मारवाड़ी घड़ा के मालिकाना हक वाली निजी संपत्ति है। पूजा के नियमों में आधुनिक पहनावे की सख्त मनाही है। अनुष्ठान के दौरान पुजारी सामान्य पैंट-शर्ट या कुर्ता-पायजामा नहीं पहनते, बल्कि केवल मंदिर द्वारा निर्धारित पारंपरिक गणवेश धारण करके ही ठाकुर जी की सेवा में उपस्थित होते हैं। श्रद्धालुओं की मनोकामना और नकारात्मकता का निवारण स्थानीय मान्यता और श्रद्धालुओं के अनुभव के अनुसार, जो भी भक्त इस दरबार में निष्कपट भाव और पूर्ण विश्वास के साथ अपनी मनोकामना लेकर आते हैं, उनकी प्रार्थनाएं स्वीकार होती हैं। इसके साथ ही, मानसिक तनाव, भय या मन में व्याप्त किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से जूझ रहे लोगों को यहां दर्शन करने से शांति मिलती है। भगवान चारभुजानाथ की कृपा से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और नए आत्मविश्वास का संचार होता है। इसका आप पर असर भारत में: यह प्राचीन प्रथा दर्शाती है कि भारतीय मंदिर परंपराएं जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति प्राचीन काल से कितनी जागरूक रही हैं। अजमेर में: स्थानीय श्रद्धालु और आगंतुक नया बाजार स्थित इस 150 वर्ष पुराने मंदिर में अपरस सेवा और पारंपरिक अनुष्ठानों के दर्शन कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. चारभुजानाथ मंदिर अजमेर में कहां स्थित है? यह मंदिर अजमेर के नया बाजार स्थित घी मंडी इलाके में स्थित है। 2. इस मंदिर का प्रबंधन किस संस्था द्वारा किया जाता है? यह मंदिर अग्रवाल पंचायत मारवाड़ी घड़ा की निजी संपत्ति है। 3. मंदिर में बारिश के पानी का उपयोग किस काम के लिए किया जाता है? परिसर में बने विशेष टैंक में सहेजे गए बारिश के पानी से भगवान चारभुजानाथ का स्नान और अन्य अनुष्ठान किए जाते हैं। 4. अपरस सेवा के दौरान पुजारियों के लिए क्या पोशाक नियम हैं? पूजा के दौरान पुजारी पैंट-शर्ट या साधारण कुर्ता-पायजामा नहीं पहन सकते, उन्हें केवल निर्धारित पारंपरिक गणवेश पहनना अनिवार्य है। https://trendkia.com/religion/ajmer-men-150-sala-purana-charbhuja-nath-mndira-jahan-varsha-jala-snchayana-se-hoti-hai-aparasa-seva-13166 TrendKia — Har trend, sabse pehle.