# अजमेर में दरगाह के सामने से गुजरी कावड़ यात्रा, पुष्कर सरोवर के जल संग श्रद्धालुओं ने दिए सद्भाव के संदेश

> सावन के पावन महीने में पुष्कर सरोवर से जल लेकर निकली कावड़ यात्रा अजमेर के प्राचीन झरनेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। इस दौरान दरगाह के सामने से गुजरते हुए श्रद्धालुओं ने शिव भक्ति और आपसी सौहार्द की मिसाल पेश की।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-08-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/ajmer-men-dargah-ke-samane-se-gujari-kavara-yatra-pushkar-sarovar-ke-jala-snga-shraddhaluon-ne-die-sadbhava-ke-sndesha-17399 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजमेर, कावड़ यात्रा, पुष्कर सरोवर, झरनेश्वर महादेव मंदिर, सावन, पृथ्वीराज चौहान, सांप्रदायिक सौहार्द

सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है। इसी धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए अजमेर में मराठा कालीन ऐतिहासिक झरनेश्वर महादेव मंदिर के लिए एक भव्य कावड़ यात्रा निकाली गई। यह यात्रा पवित्र पुष्कर सरोवर से जल भरकर रवाना हुई और पुष्कर घाटी के रास्तों से होते हुए अजमेर शहर पहुंची। इस दौरान पूरे मार्ग में स्थानीय शहरवासियों ने कावड़ियों का भव्य स्वागत किया और उनके उत्साह को बढ़ाया।

## भक्ति और सामाजिक सौहार्द का अनोखा संगम
मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, हर साल की तरह इस बार भी कावड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबर्दस्त उत्साह और उमंग देखी गई। पूरी यात्रा के दौरान भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे और विभिन्न प्रकार की मनमोहक झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। यह कावड़ यात्रा विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की अजमेर दरगाह के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने से होकर आगे बढ़ी। दरगाह के सामने से गुजरते समय कावड़ियों ने धार्मिक आस्था के साथ साथ आपसी भाईचारे, शांति और कौमी एकता का एक बेहद सुंदर संदेश प्रस्तुत किया।

## पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक मंदिर का महत्व
अजमेर में स्थित प्राचीन झरनेश्वर महादेव मंदिर दरगाह के ठीक ऊपरी पहाड़ी इलाके में बना हुआ है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लंबे समय से हिंदू मुस्लिम सौहार्द और सांप्रदायिक एकता की एक बेमिसाल प्रतीक के रूप में पहचाना जाता है। इस स्थान पर वर्षों से दोनों समुदायों के बीच आपसी सम्मान और प्रेम का वातावरण बना रहा है, जो अजमेर की साझा संस्कृति को दर्शाता है।

## सम्राट पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा इतिहास
मंदिर समिति के सदस्यों ने इस पवित्र स्थल से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यताओं की जानकारी दी। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, महान राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान अपने शासनकाल के दौरान इस एकांत और शांत पहाड़ी क्षेत्र में आया करते थे। यहां आकर वे भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना करते थे और ध्यान साधना में लीन होते थे। पहाड़ी पर विराजमान झरनेश्वर महादेव मंदिर आज भी हजारों श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** कावड़ यात्रा के दौरान विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव और भाईचारे का सकारात्मक संदेश प्रसारित होता है।

**अजमेर में:** पुष्कर से अजमेर तक यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम यातायात व्यवस्था का प्रभाव स्थानीय लोगों की दिनचर्या पर पड़ता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अजमेर में कावड़ यात्रा कहां से कहां तक निकाली गई?
यह कावड़ यात्रा पुष्कर सरोवर से पवित्र जल लेकर पुष्कर घाटी के रास्ते अजमेर के प्राचीन झरनेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंची।

### 2. झरनेश्वर महादेव मंदिर किस काल का माना जाता है?
अजमेर का यह प्राचीन झरनेश्वर महादेव मंदिर मराठा कालीन माना जाता है।

### 3. कावड़ यात्रा का मार्ग किस प्रसिद्ध स्थल के सामने से गुजरा?
कावड़ यात्रा सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की प्रसिद्ध अजमेर दरगाह के मुख्य द्वार के सामने से गुजरी।

### 4. झरनेश्वर महादेव मंदिर से सम्राट पृथ्वीराज चौहान का क्या संबंध बताया जाता है?
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार महान राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान अपने शासनकाल में इस एकांत पहाड़ी मंदिर में भगवान शिव की पूजा और ध्यान के लिए आते थे।

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