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  "type": "article",
  "title": "अनंत चतुर्दशी आज, रवि योग के साये में हो रही है भगवान विष्णु की विशेष पूजा और गणेश विसर्जन",
  "summary": "देशभर में आज अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसके साथ ही गणेशोत्सव का समापन और भगवान विष्णु की पूजा का विधान पूरा हो रहा है। इस मौके पर 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व है।",
  "content": "आज देश भर में धार्मिक उल्लास के साथ अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसके पावन अवसर पर रवि योग का विशेष संयोग भी बना हुआ है। सनातन परंपरा में इस दिन का आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व माना जाता है, क्योंकि यह जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है। इस खास मौके पर भक्तजन विधि-विधान से भगवान की आराधना करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए हाथ में अनंत सूत्र बांधते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान करने से साधक को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही यह दिन गणेश भक्तों के लिए भी बहुत भावुक और महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि आज ही दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन होता है और बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।\n\nपूजन विधि और अनुष्ठान के नियम\nइस पवित्र दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने का विधान है। इसके बाद घर के पूजा स्थल को अच्छी तरह स्वच्छ करके वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान को पीले रंग के पुष्प, ताजे फल, पंचामृत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। अनुष्ठान की शुरुआत में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है, जिसके पश्चात अनंत देव की कथा का पाठ किया जाता है। पूजा के समय चौदह गांठों वाला विशेष अनंत सूत्र भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर उसे अपने दाहिने हाथ में बांधा जाता है। अंत में भगवान विष्णु की आरती उतारी जाती है और उपस्थित जनों में प्रसाद वितरित किया जाता है।\n\nमहत्वपूर्ण तिथियां और व्रत का दिन\nभाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर हो चुकी है। इस तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 06 मिनट पर होगा। उदया तिथि की गणना के आधार पर अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजन कार्य 25 सितंबर यानी आज ही संपन्न किया जा रहा है।\n\nशुभ मुहूर्त और योग की सारणी\nअनंत चतुर्दशी पर पूजा-पाठ के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनका लाभ उठाकर भक्त अनुष्ठान कर सकते हैं। दिनभर में पूजा का मुख्य मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:36 बजे से 05:24 बजे तक, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:14 बजे से 03:02 बजे तक तय किया गया है। संध्याकाल के लिए गोधूलि मुहूर्त शाम 06:15 बजे से 06:39 बजे तक रहेगा, जबकि रवि योग सुबह 06:12 बजे से पूर्वान्ह 11:22 बजे तक प्रभावी रहेगा।\n\nचौदह गांठों वाले अनंत सूत्र का रहस्य\nइस पर्व के दौरान हाथ में बांधे जाने वाले अनंत सूत्र की अपनी एक खास परंपरा है जिसमें कुल चौदह गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन सभी गांठों को ब्रह्मांड के चौदह लोकों का प्रतीक माना जाता है। इस धागे को भगवान विष्णु की असीम शक्ति और अनंत स्वरूप का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। भक्तजन इस सूत्र को धारण करके अपने पूरे परिवार की रक्षा, समृद्धि और संकटों के नाश की प्रार्थना करते हैं। हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में जिन चौदह लोकों का वर्णन मिलता है, उनमें सात ऊर्ध्व लोक यानी भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः और सत्य लोक शामिल हैं। इसके साथ ही सात अधोलोक यानी अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल बताए गए हैं, जिन्हें मिलाकर कुल चौदह लोक बनते हैं।\n\nपौराणिक कथा और पांडवों का प्रसंग\nअनंत चतुर्दशी के पर्व से जुड़ी पौराणिक कथाओं में महाभारत काल के पांडवों का प्रमुख उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हारकर वनवास के दौरान भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत को करने की सलाह दी थी। यह मान्यता है कि युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ मिलकर पूरे विधान के साथ अनंत देव की आराधना की और इस सूत्र को धारण किया। इस अनुष्ठान के प्रभाव से पांडवों के जीवन के तमाम संकट टल गए और उन्हें अपने कष्टों से मुक्ति मिल गई।\n\nगणेश विसर्जन के साथ उत्सव का समापन\nअनंत चतुर्दशी का यह दिन गणेश भक्तों के लिए साल का एक सबसे भावुक और बड़ा दिन होता है। इसी दिन दस दिनों तक चले गणेशोत्सव का औपचारिक समापन होता है। श्रद्धालु बाजे-गाजे, ढोल-नगाड़ों और पूरी भक्ति के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए किसी पवित्र नदी या जलाशय की ओर ले जाते हैं। विसर्जन के इस अंतिम पड़ाव पर बप्पा से अगले बरस जल्दी आने की गुहार लगाई जाती है और उनसे आशीर्वाद मांगा जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nअनंत चतुर्दशी के पर्व और गणेश विसर्जन का सीधा असर सार्वजनिक यातायात, आवाजाही और धार्मिक आयोजनों से जुड़े लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ता है।\n\n• देशभर में: इस दिन प्रमुख जल स्रोतों और विसर्जन स्थलों के आसपास भारी भीड़ और विशेष यातायात मार्ग तय किए जाते हैं। यात्रियों को शहर के मुख्य मार्गों पर निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी की जांच कर लेनी चाहिए।\n• धार्मिक आयोजनों में: व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह के शुभ मुहूर्तों में ही पूजा और अनुष्ठान पूरे करने की सलाह दी जाती है। इससे दिनभर के अन्य जरूरी कार्यों के लिए समय प्रबंधन आसान हो जाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जो सनातन पंचांग और खगोलीय गणनाओं पर आधारित है।\n\n• तिथि का निर्धारण: चंद्र मास की गणना के अनुसार चतुर्दशी तिथि की शुरुआत और उसके समापन के समय के आधार पर व्रत का दिन तय होता है। इस वर्ष उदया तिथि की मान्यता के कारण 25 सितंबर को यह व्रत रखा जा रहा है।\n• रवि योग का संयोग: पंचांग के अनुसार ग्रहों की स्थिति से बनने वाले विशेष योग पूजा-पाठ के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। आज के दिन रवि योग का होना धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बेहद शुभ माना गया है।\n• धार्मिक परंपराएं: प्राचीन ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और चौदह लोकों की अवधारणा को इस व्रत का मुख्य आधार बताया गया है। इसी परंपरा के तहत 14 गांठों वाला सूत्र बांधने का नियम पीढ़ियों से चला आ रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अनंत चतुर्दशी 2026 का व्रत कब किया जा रहा है?\nउदया तिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर को किया जा रहा है।\n\n2. अनंत चतुर्दशी पर पूजा का मुख्य मुहूर्त क्या है?\nइस दिन पूजा का मुख्य मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा।\n\n3. अनंत सूत्र में कितनी गांठें होती हैं और क्यों?\nअनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं, जिन्हें ब्रह्मांड के 14 लोकों और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।\n\n4. अनंत चतुर्दशी का संबंध किस प्रमुख उत्सव से है?\nइस दिन 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होता है और श्रद्धालु गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं।\n\n5. पौराणिक कथा के अनुसार सबसे पहले किसने यह व्रत किया था?\nकथा के अनुसार वनवास के दौरान पांडवों ने अपने कष्टों से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर यह व्रत किया था।\n\n6. रवि योग की अवधि आज कितने समय तक है?\nआज रवि योग सुबह 06:12 बजे से पूर्वान्ह 11:22 बजे तक प्रभावी रहेगा।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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