अनंत चतुर्दशी पर श्रीहरि पूजन और रक्षा सूत्र के लिए जरूरी सामान, यहां देखें पूरी तैयारी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के अनंत रूप, माता यमुना और शेषनाग की आराधना की जाती है। इस पावन पर्व पर पूजन सामग्री, 14 गांठों वाले रक्षा सूत्र और संपूर्ण विधि की विस्तृत जानकारी यहां उपलब्ध है। सनातन परंपरा में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है, जिसे अनंत चतुर्दशी के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर भक्त उपवास रखते हैं और जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विधि-विधान से उपासना करते हैं। इस दिन श्रीहरि के साथ-साथ माता यमुना और पाताल लोक के अधिपति शेषनाग के पूजन का भी विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इसी शुभ तिथि के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होता है, जिसके चलते देश भर में श्रद्धालु भारी संख्या में भगवान गणपति का विसर्जन भी संपन्न करते हैं। अनंत चतुर्दशी के मुख्य पूजन के लिए आवश्यक सामग्री भगवान विष्णु और उनके सहचर स्वरूपों की पूर्ण फलदायी पूजा संपन्न करने के लिए सभी आवश्यक सामग्रियों को पहले से जुटा लेना शुभ और सुविधाजनक रहता है। वेदी सजाने और प्रभु को अर्पित करने के लिए इन वस्तुओं की व्यवस्था अवश्य करें • भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शेषनाग की संयुक्त तस्वीर या विग्रह • प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की प्रतिमा • देव प्रतिमाओं के लिए नए वस्त्र और सुंदर आभूषण • पवित्र गंगाजल और अभिषेक तथा शुद्धि के लिए एक लोटा ताजा जल • चौकी पर बिछाने हेतु स्वच्छ पीले रंग का वस्त्र • रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत, सफेद तिल और सिंदूर • जनेऊ और कलावा यानी मौली • दीपक, शुद्ध घी या तेल, और रुई की बत्तियां • सुगंधित धूपबत्ती और आरती के लिए कपूर • ताजे फल, नैवेद्य के रूप में पारंपरिक मिठाई और भोग • सुगंधित पुष्प, तुलसी दल और अशोक के ताजे पत्ते • पूजा की साबुत सुपारी और दक्षिणा राशि • अनंत चतुर्दशी व्रत कथा की पुस्तक 14 गांठों वाले अनंत रक्षा सूत्र की सामग्री अनंत चतुर्दशी के व्रत में रक्षा सूत्र का विशेष महत्व है, जो जीवन के सभी संकटों से रक्षा करने का प्रतीक माना जाता है। इस पवित्र सूत्र को तैयार करने के लिए आवश्यक चीजें इस प्रकार हैं रक्षा सूत्र के निर्माण के लिए शुद्ध सूती अथवा रेशमी धागा लिया जाता है। इस धागे को संस्कारित और रंगीन बनाने के लिए साबुत हल्दी की गांठ अथवा शुद्ध केसर का उपयोग किया जाता है। यदि घर पर धागा तैयार करने में असुविधा हो, तो बाजार में पहले से उपलब्ध 14 गांठों वाला प्रामाणिक अनंत सूत्र भी लाया जा सकता है। क्रमबद्ध पूजन विधि और रक्षा सूत्र धारण करने का नियम शास्त्रसम्मत नियमों के अनुसार अनंत चतुर्दशी की पूजा आरंभ करने के लिए सबसे पहले एक स्वच्छ काष्ठ चौकी तैयार करें। उस चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शेषनाग की सम्मिलित प्रतिमा स्थापित करें। इसके पश्चात भगवान श्रीहरि को चंदन, हल्दी, रोली और केसर का तिलक अर्पित करें। इसके बाद रेशमी या सूती धागे को हल्दी अथवा केसर के घोल में अच्छी तरह रंग लें। फिर उसमें क्रम से 14 पवित्र गांठें लगाएं और इसे प्रभु की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक रखें। अब भगवान को सुगंधित फूल, दूर्वा, अक्षत, साबुत सुपारी और तुलसी दल समर्पित करें। इसके साथ ही वेदी पर शुद्ध दीपक और सुगंधित धूप प्रज्वलित करें। विधिपूर्वक फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा का श्रद्धा से पाठ करें या श्रवण करें। पूजा अनुष्ठान पूर्ण होने के उपरांत इस सिद्ध रक्षा सूत्र को धारण किया जाता है। पुरुषों को यह अनंत सूत्र अपने दाहिने हाथ की कलाई पर और महिलाओं को अपने बाएं हाथ की कलाई पर बांधना चाहिए। अंत में कर्पूर जलाकर प्रभु की भव्य आरती उतारें और परिवार के सुख, आरोग्य व समृद्धि की प्रार्थना करें। इसका आप पर असर यह मार्गदर्शिका अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को बिना किसी त्रुटि के संपूर्ण पूजन संपन्न करने में सहायता प्रदान करती है। • समय पर तैयारी: आवश्यक पूजन सामग्रियों की सूची पहले से ज्ञात होने पर बाजार से समय रहते खरीदारी की जा सकती है। इससे पूजा मुहूर्त के दौरान किसी भी कमी या जल्दबाजी से बचा जा सकेगा। • धार्मिक शुद्धता: 14 गांठों वाले अनंत धागे के नियम और पूजन विधि स्पष्ट होने से श्रद्धालु सही विधि का पालन कर पाएंगे। पुरुषों और महिलाओं के लिए कलाई में सूत्र धारण करने के सही नियमों की जानकारी भी सुलभ हो जाती है। • गणेश विसर्जन समन्वय: एक ही दिन विसर्जन और विष्णु पूजन होने के कारण भक्त अपने दैनिक कार्यक्रम की योजना व्यवस्थित ढंग से बना सकते हैं। इससे दोनों अनुष्ठानों को पूर्ण निष्ठा और समय पर संपन्न करना आसान होता है। • घरेलू पूजा में सरलता: घर में रहकर विधि-विधान से व्रत रखने वाले परिवारों को सरल क्रमबद्ध तरीके से मार्गदर्शन मिलता है। इससे बिना किसी पुरोहित के भी प्रामाणिक धार्मिक विधि पूरी की जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की कृपा प्राप्ति और विघ्नहर्ता गणेश के विदाई दिवस के रूप में मनाया जाता है। • अनंत रूप की उपासना: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के असीम और अनंत स्वरूप का पूजन करने से समस्त सांसारिक कष्ट दूर होते हैं। इसी दिन शेषनाग और जीवनदायिनी यमुना नदी की पूजा का भी विधान शास्त्रों में बताया गया है। • 14 गांठों का महत्व: अनंत सूत्र में लगाई जाने वाली 14 गांठें चौदह लोकों और भगवान के चौदह स्वरूपों की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं। हल्दी अथवा केसर से रंगे इस धागे को बांधने से वर्ष भर दैवीय सुरक्षा का विश्वास रहता है। • गणेश विसर्जन का संयोग: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को स्थापित गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन दस दिनों की भक्ति के बाद इसी चतुर्दशी को संपन्न किया जाता है। इसलिए यह पर्व समापन और नई आध्यात्मिक ऊर्जा दोनों का संगम बन जाता है। सवाल-जवाब 1. अनंत चतुर्दशी का पर्व किस तिथि को मनाया जाता है? यह पावन त्योहार हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। 2. इस दिन किन-किन देव स्वरूपों की पूजा का विशेष विधान है? इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप के साथ-साथ माता लक्ष्मी, शेषनाग और माता यमुना की पूजा की जाती है। 3. अनंत सूत्र में कितनी गांठें लगाई जाती हैं? अनंत रक्षा सूत्र में सूती या रेशमी धागे को हल्दी अथवा केसर से रंगकर कुल 14 गांठें लगाई जाती हैं। 4. पुरुषों और महिलाओं को अनंत सूत्र किस हाथ में बांधना चाहिए? पूजा संपन्न होने के बाद पुरुषों को यह पवित्र धागा अपने दाहिने हाथ में और महिलाओं को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए। 5. क्या अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है? हां, यह दस दिवसीय गणेशोत्सव का अंतिम दिन होता है, इसलिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसी दिन बप्पा का विसर्जन करते हैं। https://trendkia.com/religion/anant-chaturdashi-para-shri-hari-pujana-aura-raksha-sutra-ke-lie-jaruri-samana-yahan-dekhen-puri-taiyari-37994 TrendKia — Har trend, sabse pehle.