# तिरुमाला के जंगलों में छिपा आंजनेय स्वामी मंदिर, पेड़ पर सिक्का टिकने से पूरी होती है हर मनोकामना

> आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित श्री जापाली आंजनेय स्वामी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आने वाले भक्त प्राचीन पेड़ के सिंदूर पर सिक्का चिपकाकर अपनी मन्नत मांगते हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/anjaneya-swami-temple-hidden-in-tirumala-forests-where-coin-ritual-grants-every-wish-39828 · **Language:** Hindi
**Tags:** आंजनेय स्वामी मंदिर, तिरुपति हनुमान मंदिर, जापाली तीर्थम, तिरुमाला मंदिर, धार्मिक परंपरा

तिरुपति के प्रमुख बालाजी मंदिर से मात्र चार से पांच किलोमीटर की दूरी पर पापनाशनम मार्ग के सघन जंगलों के बीच श्री जापाली आंजनेय स्वामी हनुमान मंदिर स्थापित है। प्रकृति की गोद में बसे इस पावन स्थल की प्रसिद्धि यहाँ की एक अनूठी और प्राचीन आस्था के कारण दूर-दूर तक फैली हुई है।

## पेड़ पर सिक्का चिपकाने की अनोखी परंपरा
इस पवित्र मंदिर परिसर में एक बेहद पुराना पेड़ मौजूद है, जिस पर वर्षों से निरंतर सिंदूर का लेप किया जाता रहा है। यहाँ दर्शन के लिए पहुँचने वाले श्रद्धालु अपनी कोई भी मनोकामना मन में रखकर सिंदूर की इस मोटी परत पर सिक्का चिपकाने का प्रयास करते हैं। जनश्रुति के अनुसार, यदि मन्नत मांगते वक्त सिक्का पेड़ पर सफलतापूर्वक टिक जाता है, तो पवनपुत्र हनुमान जी की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। भक्तों का ऐसा दृढ़ विश्वास है कि इस उपाय से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां, लंबे समय से चली आ रही बीमारियां और जीवन के तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं।

## महर्षि जापाली की तपस्थली और पौराणिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं और कथाओं के पन्नों को पलटें तो प्राचीन काल में महर्षि जापाली ने इसी सुनसान और एकांत जंगल में भीषण तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति से संतुष्ट होकर हनुमान जी ने इसी जगह पर उन्हें अपने साक्षात दर्शन दिए थे, जिसके बाद से इस पावन क्षेत्र का नाम जापाली तीर्थम पड़ गया। इसके अतिरिक्त, एक अन्य प्रचलित कथा यह भी कहती है कि लंका पर विजय पाने के उपरांत अयोध्या वापस लौटते समय भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने कुछ समय इसी पावन भूमि पर विश्राम किया था।

## प्राकृतिक सौंदर्य और जल कुंड का महत्व
मंदिर के पास ही एक प्राकृतिक जल स्रोत या कुंड भी स्थित है, जिसके बारे में श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इसके पवित्र जल का आचमन करने या स्नान करने से मन को शांति मिलती है और सारे मानसिक दोष मिट जाते हैं। शेषाचलम बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा होने के कारण यहाँ का परिवेश अत्यधिक शांत और मनमोहक रहता है। मुख्य सड़क से करीब एक किलोमीटर तक सीढ़ियों का पैदल रास्ता पार करके मंदिर तक पहुँचा जाता है, जहाँ मार्ग में दुर्लभ मालाबार गिलहरियां और अन्य वन्यजीव भी सहज रूप से घूमते हुए दिख जाते हैं। हैदराबाद और तेलंगाना से तिरुपति की यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए यह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा और दर्शन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।

## इसका आप पर असर
यह मंदिर तीर्थयात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखता है।

- **आंध्र प्रदेश में:** तिरुपति जाने वाले यात्रियों को मुख्य मंदिर के अलावा इस शांत और ऐतिहासिक वन क्षेत्र के दर्शन का अवसर मिलता है। यहाँ की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सीढ़ियों का लगभग एक किलोमीटर लंबा पैदल रास्ता तय करना पड़ता है।
- **भारत में:** देश भर से बालाजी के दर्शन के लिए पहुँचने वाले पर्यटक इस पौराणिक स्थल पर आकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर सकते हैं। यह स्थान सनातन संस्कृति और प्राचीन मान्यताओं से जुड़े स्थलों की यात्रा करने वालों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस पवित्र स्थल की प्रसिद्धि और यहाँ से जुड़ी परंपराएं सदियों पुरानी पौराणिक कथाओं और भौगोलिक स्थिति पर आधारित हैं।

- **पौराणिक तपस्या:** महर्षि जापाली द्वारा इस एकांत वन में की गई कठोर तपस्या के कारण इस स्थान को विशेष धार्मिक पवित्रता प्राप्त हुई।
- **ऐतिहासिक पड़ाव:** लंका विजय के बाद वापसी के समय भगवान श्रीराम के यहाँ रुकने की मान्यता ने इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया।
- **पारिस्थितिकीय परिवेश:** शेषाचलम बायोस्फीयर रिजर्व के अंतर्गत आने के कारण यह क्षेत्र मानवीय हलचल से दूर प्राकृतिक रूप से शांत और सुरक्षित बना रहा।

## सवाल-जवाब

### 1. श्री जापाली आंजनेय स्वामी मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में मुख्य बालाजी मंदिर से लगभग चार से पांच किलोमीटर की दूरी पर पापनाशनम मार्ग के जंगलों में स्थित है।

### 2. मंदिर के पेड़ पर सिक्का चिपकाने की क्या मान्यता है?
भक्तों का विश्वास है कि सिंदूर की परत पर सिक्का टिकने से पवनपुत्र हनुमान की कृपा मिलती है और गंभीर बीमारियां तथा संकट समाप्त हो जाते हैं।

### 3. इस स्थान का नाम जापाली तीर्थम कैसे पड़ा?
प्राचीन काल में महर्षि जापाली ने इसी एकांत वन में तपस्या की थी और हनुमान जी ने उन्हें यहीं दर्शन दिए थे, जिसके कारण इसका नाम यह पड़ा।

### 4. क्या इस मंदिर तक वाहन से सीधे पहुँचा जा सकता है?
मुख्य सड़क से मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग एक किलोमीटर का सीढ़ियों का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है।

### 5. मंदिर परिसर के पास कौन सा प्राकृतिक स्रोत है?
यहाँ एक प्राकृतिक जल कुंड मौजूद है जिसके पवित्र जल से मानसिक शांति मिलने की मान्यता है।

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