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  "title": "आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: घटस्थापना का सबसे शुभ समय और दस महाविद्याओं की पूजन विधि",
  "summary": "आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि इस साल 15 जुलाई से शुरू हो रही है, जिसमें गुप्त साधना और तंत्र-मंत्र के लिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 05:33 से 10:09 बजे तक रहेगा।",
  "content": "हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है और इसके लिए नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है। जब भी नवरात्रि का जिक्र आता है, तो अधिकांश लोग केवल चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में ही सोचते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वर्ष में कुल चार बार नवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है। इनमें से दो सामान्य नवरात्रि होती हैं जो सार्वजनिक रूप से श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती हैं, जबकि अन्य दो गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से माघ और आषाढ़ के महीने में आती हैं। इस विशेष समय के दौरान देवी दुर्गा की आराधना बेहद गोपनीय तरीके से की जाती है। तांत्रिक क्रियाओं, गुप्त साधनाओं और आध्यात्मिक सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए इस काल को सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान साधक कड़े नियमों और कठोर व्रत का पालन करते हुए अपनी साधना पूरी करते हैं।\n\nआषाढ़ गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व और दस महाविद्याएं\nसामान्य नवरात्रि में जहां मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि के दौरान इन नौ रूपों के साथ ही देवी की दस महाविद्याओं की भी गुप्त आराधना का विधान है। इन दस महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो भी साधक इस गुप्त काल में पूरी निष्ठा और गोपनीयता के साथ देवियों की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं और उसे विशेष आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त होती हैं। इस आराधना को जितना गुप्त रखा जाता है, इसका प्रभाव और फल उतना ही अधिक और तीव्र होता है।\n\nआषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: महत्वपूर्ण तिथियां और कलश स्थापना का मुहूर्त\nवर्ष 2026 में आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ 15 जुलाई से हो रहा है और इसका समापन 23 जुलाई को होगा। इस दौरान पूरे नौ दिनों तक श्रद्धापूर्वक शक्ति साधना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है, जिसके लिए शास्त्रों में एक निश्चित और शुभ समय निर्धारित किया गया है। 15 जुलाई की सुबह कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा शुरू करने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त सुबह 05:33 बजे से लेकर सुबह 10:09 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में पूजा की शुरुआत करना साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।\n\nघटस्थापना और पूजा की संपूर्ण विधि\nगुप्त नवरात्रि की साधना और पूजा को सही विधि-विधान के साथ करना आवश्यक है ताकि साधना का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। इसकी शुरुआत पहले दिन से होती है\n\n• सर्वप्रथम नवरात्रि के प्रथम दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।\n• इसके बाद अपने घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र को सम्मानपूर्वक स्थापित करें।\n• एक मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ मिट्टी भरकर उसमें जौ के बीज बोएं और उसके ठीक ऊपर विधि-विधान से कलश की स्थापना करें।\n• स्थापित किए जाने वाले कलश में शुद्ध पेयजल भरें और उसमें थोड़ा सा पवित्र गंगाजल भी मिलाएं।\n• कलश के मुख पर आम के पांच या सात पत्ते रखें और उसके ऊपर एक पानी वाला नारियल रखें। ध्यान रहे कि नारियल को पहले से ही एक सुंदर लाल कपड़े में कलावा की मदद से अच्छी तरह लपेट लिया गया हो।\n• इसके बाद माता रानी के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें और फूल, धूप, कपूर और अगरबत्ती की मदद से देवी की पंचोपचार पूजा संपन्न करें।\n• दैनिक पूजा के अंत में मां अंबे की आरती करें और उन्हें श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करें।\n• यह पूजा प्रक्रिया पूरे नौ दिनों तक सुबह और शाम दोनों समय नियमित रूप से दोहराई जानी चाहिए।\n• नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नौवें दिन छोटी कन्याओं को आदरपूर्वक घर पर आमंत्रित करें, उन्हें भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लेकर अपनी इस गुप्त साधना को संपन्न करें।\n\nइसका आप पर असर\n• श्रद्धालुओं के लिए: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान नियमों का पालन करके साधक अपनी मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ा सकते हैं।\n• पूजा योजना के लिए: 15 जुलाई को सुबह 05:33 से 10:09 बजे के बीच कलश स्थापित करके पूजा की शुरुआत करना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी रहेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. साल में कुल कितनी नवरात्रि मनाई जाती हैं?\nवर्ष में कुल चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें दो सामान्य (चैत्र और शारदीय) और दो गुप्त (माघ और आषाढ़) नवरात्रि होती हैं।\n\n2. साल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब से कब तक है?\nसाल 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक मनाया जाएगा।\n\n3. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?\nघटस्थापना या कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त 15 जुलाई की सुबह 05:33 बजे से लेकर सुबह 10:09 बजे तक रहेगा।\n\n4. गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की आराधना की जाती है?\nगुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ-साथ उनकी दस महा विद्याओं की गुप्त रूप से साधना की जाती है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-07-13",
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    "गुप्त नवरात्रि 2026",
    "घटस्थापना मुहूर्त",
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