आश्विन कृष्ण दशमी का पंचांग: पितरों के निमित्त श्राद्ध का शुभ समय, राहुकाल और संपूर्ण ग्रह योग 5 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर पितृ पक्ष का दशमी श्राद्ध संपन्न किया जाएगा। जानिए दिन भर के शुभ योग, कुतुप व रौहिण मुहूर्त और शहरों के अनुसार राहुकाल की स्थिति। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि इस बार सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली दशमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। यह तिथि सोमवार को देर रात 2 बजकर 8 मिनट तक प्रभावी रहेगी। ऐसे पूर्वज जिनका निधन किसी भी माह के शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था, उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज इसी दिन आयोजित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दशमी तिथि पर विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने वाले साधक के जीवन में कभी आर्थिक संकट नहीं आता और परिवार में धन-संपदा का निरंतर वास रहता है। दशमी तिथि श्राद्ध के मुख्य मुहूर्त पितरों की शांति और तृप्ति के लिए दोपहर के समय किए जाने वाले तर्पण का विशेष विधान है। पंचांग की गणना के अनुसार इस दिन श्राद्ध कर्म के लिए मुख्य कालखंड निम्नलिखित रहेंगे • कुतुप मूहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक • रौहिण मूहूर्त: दोपहर 12:33 बजे से दोपहर 01:20 बजे तक • अपराह्न काल: दोपहर 01:20 बजे से अपराह्न 03:41 बजे तक शास्त्रों के अनुसार कुतुप और रौहिण काल में पितरों के निमित्त किया गया श्राद्ध एवं दान अक्षय फल प्रदान करता है, जिससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिन के प्रमुख ज्योतिषीय योग और नक्षत्र सोमवार को दिन की शुरुआत शुभ योगों के साथ हो रही है। प्रातःकाल 9 बजकर 52 मिनट तक शिव योग रहेगा, जिसके उपरांत सिद्ध योग प्रारंभ हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, रात 11 बजकर 10 मिनट तक पुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। नक्षत्र और योग का यह संयोग धार्मिक अनुष्ठानों एवं दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। दिन भर के शुभ काल और मुहूर्त दैनिक पूजा, अध्ययन और मांगलिक कार्यों के संकल्प के लिए दिन के शुभ समय इस प्रकार रहेंगे • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:38 बजे से प्रातः 05:27 बजे तक • प्रातः संध्या: प्रातः 05:03 बजे से प्रातः 06:16 बजे तक • अभिजित मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:07 बजे से दोपहर 02:54 बजे तक • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:03 बजे से शाम 06:27 बजे तक • सायाह्न संध्या: शाम 06:03 बजे से शाम 07:16 बजे तक • अमृत काल: शाम 05:02 बजे से शाम 06:34 बजे तक • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:45 बजे से देर रात 12:34 बजे तक (6 अक्टूबर) • सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 06:16 बजे से रात्रि 11:09 बजे तक प्रमुख शहरों में राहुकाल की अवधि ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को किसी भी नए व शुभ कार्य के आरंभ के लिए वर्जित माना गया है। देश के विभिन्न महानगरों में सोमवार को राहुकाल का समय इस प्रकार रहेगा • दिल्ली: सुबह 07:45 बजे से सुबह 09:13 बजे तक • मुंबई: सुबह 07:59 बजे से सुबह 09:29 बजे तक • चंडीगढ़: सुबह 07:47 बजे से सुबह 09:15 बजे तक • लखनऊ: सुबह 07:29 बजे से सुबह 08:58 बजे तक • भोपाल: सुबह 07:42 बजे से सुबह 09:11 बजे तक • कोलकाता: सुबह 06:58 बजे से सुबह 08:27 बजे तक • अहमदाबाद: सुबह 08:01 बजे से सुबह 09:30 बजे तक • चेन्नई: सुबह 07:28 बजे से सुबह 08:58 बजे तक सूर्योदय और सूर्यास्त का समय दिनमान की गणना के अनुसार 5 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय प्रातः 06:15 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 06:02 बजे संपन्न होगा। दिन भर सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 06:16 बजे से रात्रि 11:09 बजे तक विद्यमान रहेगा, जो सामान्य दैनिक उपासना और संकल्पों के लिए शुभ माना जाता है। इसका आप पर असर यह पंचांग 5 अक्टूबर 2026 को श्राद्ध कर्म और दैनिक धार्मिक अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए सटीक समय सारिणी प्रदान करता है। • श्राद्ध अनुष्ठान: तर्पण और पिंडदान के लिए कुतुप व रौहिण मुहूर्त दोपहर 11:46 बजे से 01:20 बजे तक रहेगा। जो लोग दशमी तिथि का श्राद्ध कर रहे हैं, उन्हें अपने कर्मकांड इसी अवधि में संपन्न करने चाहिए। • नया कार्य आरंभ: राहुकाल के दौरान किसी भी शुभ या नए काम की शुरुआत करने से परहेज करना चाहिए। अपने शहर के अनुसार सुबह 7:00 बजे से 9:30 बजे के बीच का समय टालें। • दैनिक पूजा पाठ: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:38 बजे से और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से शुरू होगा। यह समय नियमित पूजा और मंत्र जप के लिए सबसे अनुकूल रहेगा। • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:16 बजे से रात 11:09 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग सक्रिय रहेगा। जरूरी कार्यों और अनुबंधों के लिए यह कालखंड फलदायी माना जाता है। ऐसा क्यों हुआ हिंदू धर्म में तिथियों और नक्षत्रों के खगोलीय संचलन के आधार पर दैनिक पंचांग का निर्धारण किया जाता है। पितृ पक्ष में आश्विन मास के दौरान पूर्वजों के तिथि-वार श्राद्ध का विधान धार्मिक ग्रंथों में स्थापित है। • तिथि का प्रभाव: आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि का आगमन सोमवार को हुआ है जो देर रात 2:08 बजे तक चलेगा। इसी वजह से दशमी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों का वार्षिक श्राद्ध इस दिन निर्धारित हुआ। • नक्षत्र व योग संक्रमण: प्रातःकाल 9:52 बजे तक शिव योग के बाद सिद्ध योग का प्रारंभ और पुष्य नक्षत्र की उपस्थिति से यह दिन विशेष फलदायी बना है। ग्रहों की स्थिति के अनुसार ही पूजा-पाठ के शुभ काल तय किए जाते हैं। • राहुकाल की गणना: सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल समय को आठ बराबर भागों में विभाजित करके राहुकाल निर्धारित होता है। प्रत्येक शहर के अक्षांश और देशांतर के अंतर के कारण विभिन्न शहरों में इसका समय थोड़ा अलग रहता है। सवाल-जवाब 1. 5 अक्टूबर 2026 को कौन सा श्राद्ध किया जाएगा? इस दिन आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा, जो उन पितरों के लिए होता है जिनका देहावसान किसी भी माह की दशमी तिथि को हुआ था। 2. दशमी श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त का समय क्या है? कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक और रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:33 बजे से दोपहर 01:20 बजे तक रहेगा। 3. इस दिन कौन सा नक्षत्र और योग रहेगा? इस दिन रात 11:10 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, जबकि सुबह 9:52 बजे तक शिव योग के बाद सिद्ध योग लगेगा। 4. दिल्ली में 5 अक्टूबर 2026 को राहुकाल किस समय रहेगा? दिल्ली में राहुकाल का समय सुबह 07:45 बजे से सुबह 09:13 बजे तक रहेगा। 5. 5 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग की अवधि क्या है? सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:16 बजे से लेकर रात 11:09 बजे तक प्रभावी रहेगा। https://trendkia.com/religion/ashwin-krishna-dashami-ka-pnchanga-pitaron-ke-nimitta-shraddha-ka-shubha-samaya-rahu-kaal-aura-snpurna-graha-yoga-42789 TrendKia — Har trend, sabse pehle.