आश्विन कृष्ण पक्ष में 6 अक्टूबर को रखा जाएगा इंदिरा एकादशी व्रत, पितरों के तर्पण और श्राद्ध के शुभ मुहूर्त देखें आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर को रखा जाएगा, जिसमें पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण का विशेष विधान है। इस दिन साध्य योग और अश्लेषा नक्षत्र के साथ दोपहर में कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल में श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर दिन मंगलवार को पड़ रही है, जिस दिन विधि विधान से इंदिरा एकादशी का उपवास रखा जाएगा। पंचांगीय गणना के अनुसार एकादशी तिथि मंगलवार को देर रात 12 बजकर 35 मिनट तक प्रभावी रहेगी। पितृ पक्ष की अवधि में आने के कारण इस पावन तिथि पर एकादशी तिथि वाले पूर्वजों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा भी निभाई जाएगी। ज्योतिषीय योगों की बात करें तो 6 अक्टूबर को पूरे दिन और पूरी रात रहने के बाद बुधवार प्रातः 5 बजे तक साध्य योग बना रहेगा, जबकि मंगलवार रात 10 बजकर 18 मिनट तक अश्लेषा नक्षत्र प्रभावी रहेगा। दिन की शुरुआत सुबह 06:16 बजे सूर्योदय के साथ होगी और शाम 06:01 बजे सूर्यास्त होगा। इंदिरा एकादशी का धार्मिक महात्म्य धार्मिक मान्यताओं में आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी को बेहद कल्याणकारी माना गया है क्योंकि यह पितृ पक्ष के भीतर आती है। शास्त्रों के अनुसार यदि किसी जातक के पूर्वज जाने अनजाने किए गए पाप कर्मों अथवा भूलों के कारण यमराज के अधीन कष्ट या दंड भुगत रहे हों, तो इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत का पालन करना चाहिए। इस उपवास से प्राप्त पुण्य फल को पितरों के निमित्त संकल्प पूर्वक दान करने से आत्माओं को यम यातना से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि पितृ शांति और पूर्वजों के उद्धार के लिए इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। एकादशी श्राद्ध के लिए निर्धारित शुभ काल पितृ पक्ष में एकादशी तिथि पर दिवंगत परिजनों के निमित्त श्राद्ध कर्म संपन्न करने के लिए तीन विशिष्ट काल अत्यंत फलदायी माने गए हैं। इनमें सबसे पहले कुतुप मुहूर्त पूर्वाह्न 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। इसके तुरंत बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:36 बजे से दोपहर 01:24 बजे तक चलेगा। तर्पण और पिंडदान के लिए तीसरा अनुकूल समय अपराह्न काल दोपहर 01:24 बजे से दोपहर बाद 03:48 बजे तक मान्य रहेगा। परिजनों को इन्हीं समयावधियों में तर्पण एवं ब्राह्मण भोजन आदि अनुष्ठान संपन्न करने चाहिए। देश के प्रमुख महानगरों में राहुकाल का समय ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल के दौरान किसी भी प्रकार के नए या मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है, हालांकि श्राद्ध कर्म निर्धारित मुहूर्त में ही किए जाते हैं। मंगलवार 6 अक्टूबर को प्रमुख शहरों में राहुकाल इस प्रकार रहेगा • दिल्ली में दोपहर बाद 03:05 से शाम 04:33 तक • मुंबई में दोपहर बाद 03:25 से शाम 04:54 तक • चंडीगढ़ में दोपहर बाद 03:07 से शाम 04:34 तक • लखनऊ में दोपहर 02:51 से शाम 04:19 तक • भोपाल में दोपहर बाद 03:05 से शाम 04:34 तक • कोलकाता में दोपहर 02:22 से दोपहर बाद 03:51 तक • अहमदाबाद में दोपहर बाद 03:25 से शाम 04:53 तक • चेन्नई में दोपहर 02:56 से शाम 04:26 तक आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, पंचांग के इन सभी शुभाशुभ समयों का ध्यान रखकर किए गए पूजन और श्राद्ध कर्म से पितरों की कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है। इसका आप पर असर यह पंचांग और मुहूर्त विवरण पितृ पक्ष में पूर्वजों के श्राद्ध और एकादशी व्रत का पालन करने वाले श्रद्धालुओं के दैनिक धार्मिक कार्यों को सीधे निर्धारित करता है। • भारत में: व्रत और तर्पण करने वाले श्रद्धालु 6 अक्टूबर को दोपहर 11:48 बजे से 03:48 बजे के बीच अपने अनुष्ठान पूरे कर सकते हैं। इसके साथ ही विभिन्न शहरों में बताए गए राहुकाल के समय नए मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। • श्राद्ध कर्ताओं के लिए: एकादशी तिथि पर देहावसान पाने वाले पूर्वजों का पिंडदान कुतुप, रौहिण या अपराह्न काल में ही संपन्न करना अनिवार्य है। ऐसा करने से ही शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म का पूर्ण फल प्राप्त होता है। • व्रत रखने वालों के लिए: एकादशी तिथि 6 अक्टूबर की रात 12:35 बजे तक रहेगी, जिसके अनुसार मंगलवार को पूर्ण उपवास रखा जाएगा। अगले दिन सूर्योदय के उपरांत ही पारण विधि संपन्न की जाएगी। • दैनिक समय नियोजन: विभिन्न शहरों के अनुसार राहुकाल लगभग डेढ़ घंटे दोपहर के समय प्रभावी रहेगा। यदि कोई नया अनुबंध या यात्रा आरंभ करनी हो तो इस अवधि को टालना उपयुक्त रहेगा। ऐसा क्यों हुआ पितृ पक्ष के दौरान आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आगमन और खगोलीय नक्षत्रों की विशेष स्थिति इस धार्मिक दिन की पृष्ठभूमि बनाती है। • धार्मिक परंपरा: आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी स्वाभाविक रूप से महालय यानी पितृ पक्ष के भीतर पड़ती है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के पूजन के साथ-साथ पूर्वजों के उद्धार का संयोग बनता है। • ज्योतिषीय गणना: तिथि, नक्षत्र और योग सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होते हैं। 6 अक्टूबर को साध्य योग और अश्लेषा नक्षत्र का संयोजन बनने से यह दिन विशिष्ट पंचांगीय महत्व प्राप्त करता है। • मुहूर्त निर्धारण: शास्त्रों में दोपहर के सूर्य की स्थिति के आधार पर कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल तय किए जाते हैं। इन्हीं कालों में धूप-दीप और पितरों को जल अर्पित करने का शास्त्रीय नियम है। सवाल-जवाब 1. इंदिरा एकादशी का व्रत किस तारीख को रखा जाएगा? इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को रखा जाएगा। 2. 6 अक्टूबर को एकादशी तिथि कब तक रहेगी? एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को देर रात 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। 3. एकादशी श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त का समय क्या है? कुतुप मुहूर्त पूर्वाह्न 11:48 से दोपहर 12:36 तक और रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:36 से 01:24 तक रहेगा। 4. इंदिरा एकादशी के दिन कौन सा नक्षत्र और योग रहेगा? इस दिन रात 10:18 बजे तक अश्लेषा नक्षत्र रहेगा और बुधवार सुबह 5 बजे तक साध्य योग बना रहेगा। 5. इंदिरा एकादशी व्रत का मुख्य महत्व क्या है? मान्यता है कि इस व्रत का पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें यमलोक के कष्टों से मुक्ति और मोक्ष मिलता है। 6. दिल्ली में 6 अक्टूबर को राहुकाल का समय क्या रहेगा? दिल्ली में राहुकाल दोपहर बाद 03:05 बजे से शाम 04:33 बजे तक रहेगा। https://trendkia.com/religion/ashwin-krishna-paksha-men-6-october-ko-rakha-jaega-indira-ekadashi-vrata-pitaron-ke-tarpana-aura-shraddha-ke-shubha-muhurta-dekhen-43335 TrendKia — Har trend, sabse pehle.