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  "type": "article",
  "title": "अटूट भक्ति की अनूठी मिसाल बनीं 80 वर्षीय राजी अम्मा, हैदराबाद मंदिर में बीते ढाई दशकों से रोज बजाती हैं 250 किलो वजनी घंटी",
  "summary": "हैदराबाद की श्रीनगर कॉलोनी स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 80 साल की राजी अम्मा पिछले 25 वर्षों से 250 किलोग्राम वजनी घंटी बजाकर मिसाल पेश कर रही हैं। शारीरिक कमजोरी के बावजूद वे हर दिन तीन बार पहिया घुमाकर 15 मिनट तक घंटी बजाती हैं।",
  "content": "हैदराबाद के श्रीनगर कॉलोनी क्षेत्र में बने श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में आस्था और सेवा का एक अत्यंत प्रेरणादायक नजारा प्रतिदिन दिखाई देता है। बढ़ती उम्र की तमाम बंदिशों और शारीरिक समस्याओं को दरकिनार करते हुए करीब 80 वर्ष की बुजुर्ग महिला राजी अम्मा पिछले 25 वर्षों से मंदिर की विशाल घंटी बजाने की सेवा निभा रही हैं। यह घंटी कोई साधारण घंटी नहीं है, बल्कि इसका वजन लगभग 250 किलोग्राम है। गंभीर शारीरिक तकलीफों के बावजूद राजी अम्मा का यह समर्पण मंदिर आने वाले हर श्रद्धालु का दिल जीत लेता है।\n\nझुकी हुई पीठ और बढ़ती उम्र के बावजूद अटूट नियम\nउम्र के इस पड़ाव पर राजी अम्मा की पीठ बुढ़ापे की वजह से काफी झुक चुकी है, जिससे उन्हें सामान्य रूप से सीधे खड़े होने में भी खासी परेशानी होती है। लेकिन जब बात भगवान वेंकटेश्वर की सेवा की आती है, तो उनकी शारीरिक कमजोरी आड़े नहीं आती। मंदिर में प्रतिदिन भगवान के भोग और आरती के समय वे बिना किसी नागा के उपस्थित होती हैं। दिन में तीन अलग-अलग समय पर वे इस भारी घंटी के पास पहुंचती हैं और लगातार लगभग 15 मिनट तक इसे बजाती हैं।\n\nविशेष गियर और पहिया प्रणाली से बजती है 250 किलो की घंटी\nइतनी भारी 250 किलोग्राम की घंटी को सामान्य रस्सी से खींचकर बजाना किसी बुजुर्ग महिला के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव है। श्रद्धालुओं को होने वाली इस कठिनाई को समझते हुए मंदिर प्रबंधन ने घंटी के संचालन के लिए एक विशेष मैकेनिकल गियर और व्हील सिस्टम स्थापित किया है। राजी अम्मा एक बड़े पहिए पर लगे मजबूत हैंडल को पकड़ती हैं और अपनी पूरी क्षमता से उसे घुमाती हैं। इस गियर तकनीक के कारण घंटी एक सुंदर और लयबद्ध तरीके से बजती है, और उसकी मधुर गूंज पूरे मंदिर प्रांगण में फैल जाती है।\n\nमंदिर परिसर में ही बीता ढाई दशकों का जीवन\nराजी अम्मा पिछले लगभग ढाई दशकों से इसी श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर परिसर को अपना घर मानकर रह रही हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान वेंकटेश्वर की भक्ति और सेवा के प्रति समर्पित कर दिया है। मंदिर में मिलने वाला भगवान का प्रसाद ही उनके भोजन का मुख्य जरिया है और मंदिर का प्रांगण ही उनका स्थायी ठिकाना है। वृद्ध अवस्था की तमाम तकलीफों के बाद भी उनकी दिनचर्या और श्रद्धा में जरा भी बदलाव नहीं आया है।\n\nश्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत\nमंदिर में दर्शन के लिए आने वाले स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि राजी अम्मा का यह निष्काम सेवा भाव सभी के लिए एक बड़ी सीख है। जिस लगन और अटूट आस्था के साथ वे इस उम्र में रोजाना 250 किलो की घंटी बजाती हैं, वह इंसान की इच्छाशक्ति और ईश्वर के प्रति अगाध विश्वास की एक मिसाल पेश करता है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक के सही तालमेल से उम्र और शारीरिक बाधाओं को पार किया जा सकता है।\n• हैदराबाद में: श्रीनगर कॉलोनी स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर जाने वाले श्रद्धालु राजी अम्मा के दर्शन कर उनसे निस्वार्थ सेवा और भक्ति की प्रेरणा ले सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हैदराबाद में राजी अम्मा किस मंदिर में सेवा देती हैं?\nवे हैदराबाद की श्रीनगर कॉलोनी में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पिछले 25 वर्षों से घंटी बजाने की सेवा निभा रही हैं।\n\n2. राजी अम्मा जिस घंटी को बजाती हैं उसका वजन कितना है?\nमंदिर की उस विशाल घंटी का वजन लगभग 250 किलोग्राम है।\n\n3. 80 साल की उम्र में वे इतनी भारी घंटी कैसे बजा पाती हैं?\nमंदिर प्रबंधन ने घंटी में एक विशेष मैकेनिकल गियर और पहिया सिस्टम लगाया है, जिसके हैंडल को घुमाकर वे इसे आसानी से बजा पाती हैं।\n\n4. राजी अम्मा दिन में कितनी बार और कितने समय तक घंटी बजाती हैं?\nवे दिन में तीन बार आरती और भोग के समय बिना किसी नागा के करीब 15 मिनट तक घंटी बजाती हैं।\n\n5. राजी अम्मा का जीवनयापन किस तरह होता है?\nवे पिछले ढाई दशकों से मंदिर परिसर में ही रह रही हैं और मंदिर का प्रसाद ही उनका भोजन है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• उम्र केवल एक संख्या है: 80 वर्ष की उम्र और शारीरिक कमजोरी के बावजूद राजी अम्मा की निष्ठा दिखाती है कि संकल्प के आगे परिस्थितियां आड़े नहीं आतीं।\n• निरंतरता ही सफलता की कुंजी है: पिछले 25 वर्षों से बिना किसी नागा के दिन में तीन बार घंटी बजाना अनुशासन और दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है।\n• तकनीक से बाधाओं को आसान बनाना: गियर और व्हील सिस्टम के इस्तेमाल से भारी काम को भी सुलभ बनाया जा सकता है, जो व्यावहारिक समाधान की अहमियत बताता है।\n• सादा जीवन और उच्च विचार: मंदिर के प्रसाद और परिसर में रहकर जीवन बिताने वाली राजी अम्मा का जीवन संतोष और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-07-30",
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