# अटूट भक्ति की अनूठी मिसाल बनीं 80 वर्षीय राजी अम्मा, हैदराबाद मंदिर में बीते ढाई दशकों से रोज बजाती हैं 250 किलो वजनी घंटी

> हैदराबाद की श्रीनगर कॉलोनी स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 80 साल की राजी अम्मा पिछले 25 वर्षों से 250 किलोग्राम वजनी घंटी बजाकर मिसाल पेश कर रही हैं। शारीरिक कमजोरी के बावजूद वे हर दिन तीन बार पहिया घुमाकर 15 मिनट तक घंटी बजाती हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-07-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/atuta-bhakti-ki-anuthi-misala-banin-80-varshiya-raji-amma-hyderabad-mndira-men-bite-dhai-dashakon-se-roja-bajati-hain-250-kilo-vaj-12149 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजी अम्मा, हैदराबाद, श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्रीनगर कॉलोनी, 250 किलो घंटी, मंदिर घंटी, भक्ति

हैदराबाद के श्रीनगर कॉलोनी क्षेत्र में बने श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में आस्था और सेवा का एक अत्यंत प्रेरणादायक नजारा प्रतिदिन दिखाई देता है। बढ़ती उम्र की तमाम बंदिशों और शारीरिक समस्याओं को दरकिनार करते हुए करीब 80 वर्ष की बुजुर्ग महिला राजी अम्मा पिछले 25 वर्षों से मंदिर की विशाल घंटी बजाने की सेवा निभा रही हैं। यह घंटी कोई साधारण घंटी नहीं है, बल्कि इसका वजन लगभग 250 किलोग्राम है। गंभीर शारीरिक तकलीफों के बावजूद राजी अम्मा का यह समर्पण मंदिर आने वाले हर श्रद्धालु का दिल जीत लेता है।

## झुकी हुई पीठ और बढ़ती उम्र के बावजूद अटूट नियम
उम्र के इस पड़ाव पर राजी अम्मा की पीठ बुढ़ापे की वजह से काफी झुक चुकी है, जिससे उन्हें सामान्य रूप से सीधे खड़े होने में भी खासी परेशानी होती है। लेकिन जब बात भगवान वेंकटेश्वर की सेवा की आती है, तो उनकी शारीरिक कमजोरी आड़े नहीं आती। मंदिर में प्रतिदिन भगवान के भोग और आरती के समय वे बिना किसी नागा के उपस्थित होती हैं। दिन में तीन अलग-अलग समय पर वे इस भारी घंटी के पास पहुंचती हैं और लगातार लगभग 15 मिनट तक इसे बजाती हैं।

## विशेष गियर और पहिया प्रणाली से बजती है 250 किलो की घंटी
इतनी भारी 250 किलोग्राम की घंटी को सामान्य रस्सी से खींचकर बजाना किसी बुजुर्ग महिला के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव है। श्रद्धालुओं को होने वाली इस कठिनाई को समझते हुए मंदिर प्रबंधन ने घंटी के संचालन के लिए एक विशेष मैकेनिकल गियर और व्हील सिस्टम स्थापित किया है। राजी अम्मा एक बड़े पहिए पर लगे मजबूत हैंडल को पकड़ती हैं और अपनी पूरी क्षमता से उसे घुमाती हैं। इस गियर तकनीक के कारण घंटी एक सुंदर और लयबद्ध तरीके से बजती है, और उसकी मधुर गूंज पूरे मंदिर प्रांगण में फैल जाती है।

## मंदिर परिसर में ही बीता ढाई दशकों का जीवन
राजी अम्मा पिछले लगभग ढाई दशकों से इसी श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर परिसर को अपना घर मानकर रह रही हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान वेंकटेश्वर की भक्ति और सेवा के प्रति समर्पित कर दिया है। मंदिर में मिलने वाला भगवान का प्रसाद ही उनके भोजन का मुख्य जरिया है और मंदिर का प्रांगण ही उनका स्थायी ठिकाना है। वृद्ध अवस्था की तमाम तकलीफों के बाद भी उनकी दिनचर्या और श्रद्धा में जरा भी बदलाव नहीं आया है।

## श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि राजी अम्मा का यह निष्काम सेवा भाव सभी के लिए एक बड़ी सीख है। जिस लगन और अटूट आस्था के साथ वे इस उम्र में रोजाना 250 किलो की घंटी बजाती हैं, वह इंसान की इच्छाशक्ति और ईश्वर के प्रति अगाध विश्वास की एक मिसाल पेश करता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक के सही तालमेल से उम्र और शारीरिक बाधाओं को पार किया जा सकता है।
- **हैदराबाद में:** श्रीनगर कॉलोनी स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर जाने वाले श्रद्धालु राजी अम्मा के दर्शन कर उनसे निस्वार्थ सेवा और भक्ति की प्रेरणा ले सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. हैदराबाद में राजी अम्मा किस मंदिर में सेवा देती हैं?
वे हैदराबाद की श्रीनगर कॉलोनी में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पिछले 25 वर्षों से घंटी बजाने की सेवा निभा रही हैं।

### 2. राजी अम्मा जिस घंटी को बजाती हैं उसका वजन कितना है?
मंदिर की उस विशाल घंटी का वजन लगभग 250 किलोग्राम है।

### 3. 80 साल की उम्र में वे इतनी भारी घंटी कैसे बजा पाती हैं?
मंदिर प्रबंधन ने घंटी में एक विशेष मैकेनिकल गियर और पहिया सिस्टम लगाया है, जिसके हैंडल को घुमाकर वे इसे आसानी से बजा पाती हैं।

### 4. राजी अम्मा दिन में कितनी बार और कितने समय तक घंटी बजाती हैं?
वे दिन में तीन बार आरती और भोग के समय बिना किसी नागा के करीब 15 मिनट तक घंटी बजाती हैं।

### 5. राजी अम्मा का जीवनयापन किस तरह होता है?
वे पिछले ढाई दशकों से मंदिर परिसर में ही रह रही हैं और मंदिर का प्रसाद ही उनका भोजन है।

## प्रेरणा और सबक
- **उम्र केवल एक संख्या है:** 80 वर्ष की उम्र और शारीरिक कमजोरी के बावजूद राजी अम्मा की निष्ठा दिखाती है कि संकल्प के आगे परिस्थितियां आड़े नहीं आतीं।
- **निरंतरता ही सफलता की कुंजी है:** पिछले 25 वर्षों से बिना किसी नागा के दिन में तीन बार घंटी बजाना अनुशासन और दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
- **तकनीक से बाधाओं को आसान बनाना:** गियर और व्हील सिस्टम के इस्तेमाल से भारी काम को भी सुलभ बनाया जा सकता है, जो व्यावहारिक समाधान की अहमियत बताता है।
- **सादा जीवन और उच्च विचार:** मंदिर के प्रसाद और परिसर में रहकर जीवन बिताने वाली राजी अम्मा का जीवन संतोष और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।

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