31 अगस्त 2026 पंचांग: कजरी तीज पर दुर्लभ संयोग, जानें शिव-पार्वती पूजन के शुभ मुहूर्त आज 31 अगस्त 2026 को कजरी तीज का व्रत रखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार आज सोमवार के दिन विशेष योग बन रहे हैं, जिसमें शिव-पार्वती की आराधना से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अस्त मास का अंतिम दिन यानी 31 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास है क्योंकि आज कजरी तीज का पावन व्रत रखा जा रहा है। सनातन पंचांग के अनुसार, इस दिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है जो सुबह 8:50 बजे तक रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कजरी तीज का पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस विशेष अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। इसके अलावा अविवाहित युवतियां भी अपनी पसंद का वर पाने के लिए इस उपवास का पालन करती हैं। पौराणिक कथाओं में इस बात का जिक्र मिलता है कि माता पार्वती ने महादेव को पति रूप में पाने के लिए अत्यंत कठिन तप किया था और उनकी उसी निष्ठा के कारण इस व्रत का वैवाहिक जीवन में खास महत्व माना गया है। आज ग्रहों की स्थिति पर नजर डालें तो सूर्य सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं जबकि चंद्रमा मीन राशि में विराजमान हैं। इसके अलावा सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे और चंद्रमा का वास रेवती नक्षत्र में रहेगा। दिन की शुरुआत में पूर्व दिशा का दिशाशूल रहेगा, जिसका ध्यान रखना आवश्यक है। आज सूर्योदय सुबह 6:12 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 6:41 बजे तय है। वहीं चंद्रोदय रात 8:36 बजे होगा और अगले दिन सुबह 9:48 बजे चंद्रास्त होगा। सोमवार के दिन कजरी तीज का होना ज्योतिषीय दृष्टि से एक दुर्लभ संयोग माना जा रहा है, जिससे इस दिन की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। कजरी तीज पर शिव-पार्वती पूजन की विधि सोमवार के दिन कजरी तीज पड़ने के कारण आज के दिन का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस शुभ अवसर पर व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद अपने घर के मंदिर या किसी नजदीकी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का स्मरण करें और व्रत व पूजन का संकल्प लें। पूजन की शुरुआत में सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात दूध, दही और शहद से महादेव का अभिषेक करने का विधान है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान निरंतर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। इसके उपरांत शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करके भगवान की आरती करें और अंत में उपस्थित जनों में प्रसाद वितरित करें। कजरी तीज की इस संपूर्ण पूजा के दौरान भगवान शिव, माता पार्वती के साथ-साथ गणेश जी का भी स्मरण किया जाता है। देश के कई क्षेत्रों में इस दिन नीम की पूजा करने की भी विशेष परंपरा है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूरे विधि-विधान से पूजा संपन्न करती हैं और व्रत की कथा सुनती हैं। 31 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त और योग पंचांग के अनुसार आज के दिन कई शुभ मुहूर्त और योग बन रहे हैं जो धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। आज का नक्षत्र रेवती है जो अगले दिन 1 सितंबर को सुबह 3:23 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू हो जाएगा। आज का करण विष्टि सुबह 8:50 बजे तक रहेगा और इसके पश्चात बव करण रात 8:19 बजे तक प्रभावी रहेगा। योग की बात करें तो आज गण्ड योग है जो अगले दिन 1 सितंबर को सुबह 1:51 बजे तक रहेगा और उसके बाद वृद्धि योग आरंभ हो जाएगा। दिनभर के अन्य शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:30 बजे से 5:15 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 बजे से 12:48 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:21 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:45 बजे से 7:07 बजे तक रहेगा। रात्रि के समय अमृत काल रात 1:01 बजे से अगले दिन सुबह 2:36 बजे तक और निशिता मुहूर्त रात 12:00 बजे से 12:45 बजे तक रहेगा। शिववास की बात करें तो सुबह 8:50 बजे तक शिववास क्रीड़ा में रहेगा और उसके बाद कैलाश पर रहेगा। आज के अशुभ मुहूर्त और काल शुभ कार्यों से पहले आज के अशुभ मुहूर्तों और वर्जित समय का ध्यान रखना भी जरूरी है। पंचांग के अनुसार आज राहुकाल सुबह 7:35 बजे से सुबह 9:11 बजे तक रहेगा। यमगण्ड काल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 1:58 बजे से दोपहर 3:33 बजे तक रहेगा। इसके अलावा दुर्मुहूर्त दोपहर 12:48 बजे से दोपहर 1:39 बजे तक तथा वर्ज्य काल दोपहर 3:34 बजे से शाम 5:08 बजे तक रहेगा। भद्रा काल सुबह 5:59 बजे से सुबह 8:50 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही पंचक की शुरुआत सुबह 5:59 बजे से हो चुकी है जो अगले दिन 1 सितंबर को सुबह 3:23 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन अशुभ काल के दौरान किसी भी प्रकार के नए या शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। इसका आप पर असर कजरी तीज के इस पावन पर्व का प्रभाव धार्मिक और पारिवारिक जीवन पर सीधा पड़ता है। • भारत में: देश भर में सुहागिन महिलाएं और अविवाहित युवतियां आज परिवार की सुख-समृद्धि और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए कजरी तीज का व्रत रख रही हैं। इस व्रत से पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में सद्भाव और सकारात्मकता की कामना पूरी होती है। • पूजन के समय: राहुकाल सुबह 7:35 बजे से सुबह 9:11 बजे तक रहेगा, इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे इस अवधि से बचकर शुभ मुहूर्तों में ही अपनी पूजा संपन्न करें। • व्रत के नियम: महिलाओं को सोलह श्रृंगार करके और विधि-विधान से शिव-पार्वती की आराधना करके कथा सुननी चाहिए जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। ऐसा क्यों हुआ कजरी तीज का यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसके पीछे धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं। • पौराणिक महत्व: माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए की गई कठिन तपस्या को इस व्रत की पृष्ठभूमि माना जाता है। • दुर्लभ संयोग: आज सोमवार के दिन तृतीया तिथि और रेवती नक्षत्र का मेल होने से एक अत्यंत दुर्लभ आध्यात्मिक संयोग का निर्माण हुआ है। सवाल-जवाब 1. कजरी तीज का व्रत कब है? कजरी तीज का व्रत आज 31 अगस्त 2026 को रखा जा रहा है। 2. आज कौन सी तिथि है? आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 8:50 बजे तक है, जिसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी। 3. कजरी तीज की पूजा में किनकी आराधना की जाती है? इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है। 4. आज का राहुकाल किस समय रहेगा? आज राहुकाल सुबह 7:35 बजे से सुबह 9:11 बजे तक रहेगा। 5. आज सूर्य और चंद्रमा किस नक्षत्र में रहेंगे? आज सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में और चंद्रमा रेवती नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। https://trendkia.com/religion/august-31-2026-panchang-kajari-teej-celebrations-auspicious-timings-and-shiva-worship-details-38764 TrendKia — Har trend, sabse pehle.