अयोध्या के राम कचहरी मंदिर का सहस्रलिंगम, जहां श्रीराम और शिव की भक्ति का अनोखा संगम अयोध्या के रामकोट स्थित राम कचहरी मंदिर में स्थापित सहस्रलिंगम भक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है। इस मंदिर के महंत शशिकांत दास के अनुसार, यहां श्रीराम और शिव एक-दूसरे के आराध्य माने जाते हैं। अयोध्या केवल भगवान श्रीराम की पावन जन्मस्थली के रूप में ही दुनियाभर में विख्यात नहीं है, बल्कि यह प्राचीन और बेहद महत्वपूर्ण शिवधामों की भूमि भी है। रामकोट इलाके में स्थित ऐतिहासिक राम कचहरी मंदिर यहां की धार्मिक परंपराओं, अटूट आस्था और सांस्कृतिक विरासत का एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव का दुर्लभ सहस्रलिंगम है, जिसमें एक ही पाषाण पर 1008 शिवलिंगों के स्वरूप उकेरे गए हैं। इस दिव्य और अलौकिक शिवलिंग के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के मन में विशेष श्रद्धा जागृत होती है और ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है तथा जीवन के सभी कष्ट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। श्रीराम और शिव का परस्पर पूरक संबंध स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार अयोध्या में भगवान श्रीराम और भगवान शिव का संबंध हमेशा से एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाता है। यही एक मुख्य वजह है कि पूरी रामनगरी में देवाधिदेव महादेव के कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर स्थापित हैं, जिनका अपना अलग और अनूठा धार्मिक महत्व है। राम कचहरी मंदिर का यह सहस्रलिंगम इसलिए भी अत्यंत खास और विशिष्ट माना जाता है क्योंकि इस पवित्र पत्थर पर 'ॐ नमः शिवाय' का महामंत्र पूरे 1008 बार अंकित किया गया है। श्रद्धालुओं के भीतर यह अटूट विश्वास है कि विधि-विधान और पूरी श्रद्धा के साथ इस सहस्रलिंगम के दर्शन करने भर से ही भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त हो जाती है। महंत शशिकांत दास ने बताई दोनों की आराध्य परंपरा राम कचहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास का इस बारे में कहना है कि भगवान शिव और प्रभु श्रीराम दोनों ही एक-दूसरे के परम आराध्य हैं। वे इस बात का उल्लेख करते हैं कि महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने अपने पवित्र ग्रंथ रामचरितमानस में बहुत स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि शिव द्रोही मम भगत कहावा, सो नर सपनेहुँ मोहि न भावा। इसका सीधा अर्थ यही है कि जो भी व्यक्ति भगवान शिव का अनादर या अपमान करके खुद को भगवान श्रीराम का सच्चा भक्त होने का दावा करता है, वह मनुष्य प्रभु श्रीराम को कभी भी प्रिय नहीं हो सकता है। इसी तरह केवल भगवान शिव की पूजा करते हुए भगवान श्रीराम का विरोध करने वाला व्यक्ति भी सच्ची भक्ति का कभी अधिकारी नहीं बन सकता है। इन दोनों की आराधना हमेशा एक-दूसरे की पूरक मानी गई है। महंत शशिकांत दास आगे यह भी बताते हैं कि राम कचहरी मंदिर परिसर में स्थापित यह सहस्रलिंगम ठीक भगवान रामेश्वरम के स्वरूप के रूप में ही पूरी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। एक ही विशाल पत्थर के भीतर कुल 1008 शिवस्वरूपों का होना ही इसकी सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता है। उनका मानना है कि इस पावन शिवलिंग के दर्शन और पूजन का अनुष्ठान करने से इंसान के करोड़ों जन्मों के संचित पाप तक नष्ट हो जाते हैं और भक्तों को आंतरिक आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ महान पुण्य की प्राप्ति होती है। नियमित रुद्राभिषेक और श्रद्धालुओं का तांता इस पवित्र मंदिर में हर रोज भगवान शिव का पूरे विधि-विधान के साथ जलाभिषेक और रुद्राभिषेक संपन्न किया जाता है। विशेष तौर पर सावन के पवित्र महीने, महाशिवरात्रि के पावन पर्व और अन्य तमाम बड़े धार्मिक अवसरों पर इस मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ता है। देश के दूर-दराज के इलाकों से यहां पहुंचने वाले भक्त भगवान शिव का अभिषेक करके अपने पूरे परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और अपनी तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राम कचहरी के इस सहस्रलिंगम के सामने सच्चे और निर्मल मन से की गई कोई भी प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती है। यही कारण है कि जब भी कोई श्रद्धालु रामनगरी अयोध्या आता है, तो वह भगवान श्रीराम के दर्शन करने के बाद इस प्राचीन शिवधाम में जरूर पहुंचता है और रामेश्वरम रूपी शिव का आशीर्वाद प्राप्त करता है। इसका आप पर असर • भारत में: देश भर के सनातन श्रद्धालुओं और शिव भक्तों को अयोध्या आने पर इस ऐतिहासिक मंदिर के दर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। • अयोध्या में: रामकोट क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को इस प्राचीन सहस्रलिंगम के जरिए धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। सवाल-जवाब 1. अयोध्या के राम कचहरी मंदिर में कौन सा विशेष शिवलिंग स्थापित है? इस मंदिर में भगवान शिव का दुर्लभ सहस्रलिंगम स्थापित है जिसमें 1008 शिवलिंगों के स्वरूप शामिल हैं। 2. राम कचहरी मंदिर के सहस्रलिंगम पर कौन सा मंत्र लिखा है? इस पवित्र शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र 1008 बार अंकित किया गया है। 3. राम कचहरी मंदिर के वर्तमान महंत कौन हैं? मंदिर के महंत शशिकांत दास हैं जो भगवान शिव और श्रीराम के पूरक संबंध के बारे में बताते हैं। 4. इस मंदिर में किन अवसरों पर भारी भीड़ होती है? सावन मास, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। https://trendkia.com/religion/ayodhya-ke-ram-kachhari-temple-ka-sahasralingam-jahan-shrirama-aura-shiva-ki-bhakti-ka-sngama-10888 TrendKia — Har trend, sabse pehle.