बाबा रामदेवजी के रथ के साथ रामदेवरा रवाना हुए 100 से अधिक पदयात्री, मुंबई के कारीगरों ने बनाया 8 फीट ऊंचा कांच का सिंहासन जोधपुर के पब्लिक पार्क से रामदेवरा के लिए एक अनूठी पैदल यात्रा शुरू हुई है, जिसमें बाबा रामदेवजी की प्रतिमा मुंबई के कलाकारों द्वारा तैयार 8 फीट ऊंचे कांच के सिंहासन पर विराजित की गई है। लोकदेवता बाबा रामसा पीर की भक्ति और जयकारों के साथ जोधपुर का माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया है। पवित्र भादवा महीना शुरू होते ही गुरुवार को शहर से एक ऐतिहासिक और अनूठी पैदल यात्रा रामदेवरा के लिए रवाना हुई। जोधपुर स्थित पब्लिक पार्क के शिव मंदिर से शुरू हुई इस यात्रा में बाबा रामदेवजी की प्रतिमा को एक बेहद आकर्षक रथ में विराजित किया गया है। इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि पहली बार बाबा की प्रतिमा के लिए मुंबई के कुशल कारीगरों द्वारा लगभग 8 फीट ऊंचा भव्य कांच का सिंहासन विशेष रूप से तैयार करवाया गया है। मुंबई के कलाकारों की कारीगरी और जगन्नाथ रथयात्रा की तर्ज पर खिंचाव इस पैदल संघ का मुख्य केंद्र बिंदु वह 8 फीट ऊंचा कांच का सिंहासन है, जिसे मुंबई से आए विशेष कलाकारों की टीम ने कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया है। इस भव्य और पारदर्शी सिंहासन पर बाबा रामदेवजी की प्रतिमा को पूरे धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ विराजित किया गया। इस पूरी यात्रा को ओडिशा की प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की तर्ज पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें शामिल श्रद्धालु किसी वाहन का उपयोग करने के बजाय अपने हाथों से रस्सियों के सहारे रथ को खींचते हुए आगे बढ़ रहे हैं। 100 से भी अधिक श्रद्धालुओं का यह जत्था बाबा के जयकारों और भक्ति भजनों के साथ पूरे उत्साह से आगे बढ़ रहा है। 180 किलोमीटर की दूरी और 9 प्रमुख पड़ावों से गुजरेगा पैदल संघ जोधपुर से रूणिचा धाम यानी रामदेवरा तक की कुल दूरी करीब 180 किलोमीटर है। पदयात्रियों का यह जत्था इस पूरी दूरी को पैदल तय करते हुए लगभग 5 से 6 दिनों में अपनी मंजिल पर पहुंचेगा। यात्रा के सुगम संचालन के लिए मार्ग में 9 प्रमुख पड़ाव तय किए गए हैं। श्रद्धालुओं का यह संघ बालरवा, तिंवरी, घेवड़ा, चामू, लोड़ता, देचू, मंडला, लवा और पोकरण होते हुए रूणिचा धाम पहुंचेगा। रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न गांवों और पड़ावों पर स्थानीय निवासियों द्वारा संघ का जोरदार स्वागत करने की तैयारी की गई है। यात्रियों के रहने, भोजन और शुद्ध पेयजल की उचित व्यवस्थाएं की गई हैं, जबकि रात्रि विश्राम के स्थानों पर भव्य भजन संध्याओं का आयोजन भी होगा। शहर में शोभायात्रा, अचलानंद गिरी महाराज की महाआरती और मसूरिया में आतिशबाजी पब्लिक पार्क से यात्रा की रवानगी से पूर्व धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए, जहां स्वामी अचलानंद गिरी महाराज ने बाबा रामदेवजी की महाआरती उतारी। इसके पश्चात रथयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों सोजती गेट, जालोरी गेट और 12वीं रोड से होते हुए आगे बढ़ी। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर रथ का स्वागत किया। इसके बाद संघ मसूरिया स्थित ऐतिहासिक बाबा रामदेव मंदिर पहुंचा। मसूरिया मंदिर में संध्या के समय भव्य महाआरती का आयोजन हुआ और उसके बाद शानदार आतिशबाजी की गई। आतिशबाजी और महाआरती के संपन्न होने के उपरांत सभी पदयात्री रामदेवरा की अपनी आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान कर गए। सावन के पहले सोमवार से जारी थे धार्मिक अनुष्ठान और 56 भोग इस भव्य पैदल यात्रा की तैयारियां लंबे समय से चल रही थीं। सावन महीने के पहले सोमवार को ही बाबा रामदेवजी की प्रतिमा को पब्लिक पार्क स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ स्थापित कर दिया गया था। तभी से प्रतिदिन मंदिर परिसर में महिला श्रद्धालुओं द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी जा रही थीं। यात्रा की सफलता और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना के साथ बाबा को 56 भोग अर्पित किया गया था और कई अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए थे। अब भादवा माह के प्रारंभ होते ही श्रद्धालुओं का यह जत्था बाबा के जयकारों के साथ रूणिचा धाम के दर्शन के लिए निकल पड़ा है। इसका आप पर असर भारत में: बाबा रामदेवजी के प्रति देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं में अटूट आस्था है, और भादवा महीने में राजस्थान के रामदेवरा पहुंचने वाली पदयात्राएं धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर को संबल देती हैं। जोधपुर में: जोधपुर से रवाना हुई इस 180 किलोमीटर लंबी पदयात्रा के मार्ग में पड़ने वाले कस्बों और गांवों में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, जल और विश्राम की व्यवस्था की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया है। सवाल-जवाब 1. बाबा रामदेवजी की इस पैदल यात्रा की क्या मुख्य खासियत है? इस यात्रा में बाबा रामदेवजी की प्रतिमा को मुंबई के कारीगरों द्वारा तैयार 8 फीट ऊंचे कांच के सिंहासन पर विराजित किया गया है, जिसे श्रद्धालु हाथों से खींच रहे हैं। 2. यह यात्रा कहां से शुरू हुई है और इसकी अंतिम मंजिल क्या है? यह यात्रा जोधपुर के पब्लिक पार्क स्थित शिव मंदिर से शुरू होकर 180 किलोमीटर दूर रामदेवरा (रूणिचा धाम) तक जाएगी। 3. इस पदयात्रा में कितने श्रद्धालु शामिल हैं और कितना समय लगेगा? संघ में 100 से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं, जो लगभग 5 से 6 दिनों में पैदल दूरी तय करके रामदेवरा पहुंचेंगे। 4. जोधपुर से रामदेवरा के रास्ते में कौन-कौन से प्रमुख पड़ाव आएंगे? यात्रा बालरवा, तिंवरी, घेवड़ा, चामू, लोड़ता, देचू, मंडला, लवा और पोकरण होते हुए रामदेवरा पहुंचेगी। 5. रवानगी से पहले कौन-कौन से मुख्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए? सावन के पहले सोमवार से प्रतिमा दर्शनार्थ रखी गई थी, जहां 56 भोग लगाया गया और रवानगी के समय स्वामी अचलानंद गिरी महाराज ने महाआरती की। https://trendkia.com/religion/baba-ramdevji-ke-ratha-ke-satha-ramdeora-ravana-hue-100-se-adhika-padayatri-mumbai-ke-karigaron-ne-banaya-8-phita-uncha-kancha-ka--19665 TrendKia — Har trend, sabse pehle.