बर्फ से शिवलिंग बनाने का वायरल ट्रेंड कितना सही, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ सावन के महीने में सोशल मीडिया पर फ्रिज की बर्फ से शिवलिंग बनाकर पूजा करने का ट्रेंड काफी वायरल हो रहा है। उज्जैन के वास्तुविद् और ज्योतिषाचार्य दुर्गेश तारे ने इस प्रथा को गलत बताया है और शास्त्रों का हवाला देते हुए इसे तुरंत बंद करने की सलाह दी है। सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक अजीब और नया चलन तेजी से फैल रहा है। इस ट्रेंड के तहत कई लोग, विशेषकर महिलाएं, मंदिरों की बजाय अपने घरों में ही फ्रिज के अंदर बर्फ जमाकर भगवान शिव का शिवलिंग तैयार कर रही हैं। इसके बाद धूप, दीप और बेलपत्र के साथ उसकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की हजारों रील्स आसानी से देखी जा सकती हैं। इसके अलावा, यूट्यूब पर भी ऐसे कई वीडियो धड़ल्ले से चल रहे हैं जिनमें घर पर ही बर्फानी बाबा यानी बर्फ का शिवलिंग बनाने के अलग-अलग तरीके सिखाए जा रहे हैं। हालांकि, जानकारों और धर्म के जानकारों के अनुसार यह पूरा तरीका पूरी तरह से गलत है और इस पर तुरंत रोक लग जानी चाहिए। उज्जैन के प्रसिद्ध वास्तुविद् और ज्योतिषाचार्य दुर्गेश तारे का इस मामले में स्पष्ट कहना है कि शास्त्रों में कहीं भी भगवान शिव के लिए कृत्रिम रूप से हिम या बर्फ के शिवलिंग का निर्माण करने का कोई ऐतिहासिक या धार्मिक प्रमाण नहीं मिलता है। जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ की गुफा में बनने वाला बर्फानी धाम एक पूरी तरह से प्राकृतिक संरचना है, जहां बाबा बर्फानी का शिवलिंग स्वतः यानी अपने आप बनता है। आजकल सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने और व्यूज बटोरने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत वीडियो बनाने का एक चलन सा बन गया है। इसी अंधी दौड़ में लोग घरों के रेफ्रिजरेटर में बर्फ जमाकर शिवलिंग बनाने के तरीके सिखा रहे हैं और इसे अमरनाथ यात्रा से जोड़कर पेश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो अलग-अलग रंगों की बर्फ जमाकर रंगीन शिवलिंग बनाने के प्रयोग भी कर रहे हैं जो शास्त्रों के बिल्कुल विपरीत है। दुर्गेश तारे आगे बताते हैं कि हमारे प्राचीन शास्त्रों में इस तरह के मनमाने प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी गई है। ग्रंथों में स्पष्ट रूप से कलो पार्थिव सिद्धिद का कथन मिलता है जिसका अर्थ है कि कलयुग में केवल पार्थिवेश्वर यानी शुद्ध मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग की पूजा का ही विधान और प्रमाण मिलता है। सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए यह बेहद जरूरी है कि लोग इस तरह के मनगढ़ंत और बिना किसी आधार वाले प्रयोगों के प्रचार-प्रसार से दूर रहें। समाज में कुछ लोग यह भी दावा करते हैं कि यदि आसपास कोई मंदिर या शिवलिंग उपलब्ध न हो, तो हाथ के अंगूठे को ही भगवान शिव मानकर उस पर जल अर्पित किया जा सकता है। हालांकि, ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बात का भी शास्त्रों में कोई पुख्ता प्रमाण दर्ज नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे सनातन शास्त्रों में मुख्य रूप से धातु या पाषाण यानी पत्थर से बने शिवलिंग की पूजा करने का ही विधान बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग का क्षरण होना या उसका आकार घटना इंसान की आयु को कम करने वाला माना गया है। ऐसे में जो लोग अपने घरों के फ्रिज में बर्फ से शिवलिंग का निर्माण कर रहे हैं और फिर उसकी पूजा कर रहे हैं, वे इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि वह बर्फ का टुकड़ा समय के साथ अपने आप पिघलने लगता है। इस तरह से शिवलिंग का लगातार पिघलना या घटना शास्त्रीय नियमों और वास्तु शास्त्र दोनों ही दृष्टियों से पूरी तरह से गलत है। आम जनता को इस बात को गहराई से समझना होगा कि वे इस तरह के आधुनिक और अवैज्ञानिक तरीकों से सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर का प्रेम पाने की उम्मीद तो करते हैं, लेकिन इसके परिणाम उनके लिए नकारात्मक भी साबित हो सकते हैं। सोशल मीडिया की दुनिया में किसी भी नए वायरल ट्रेंड को आंख मूंदकर अपनी जिंदगी में उतारने से पहले उसके धार्मिक और व्यावहारिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार अवश्य करना चाहिए। इंटरनेट पर दिखने वाली हर चमकती चीज या ट्रेंड सही हो, यह जरूरी नहीं है और सनातन परंपराओं के साथ खिलवाड़ करने से बचना चाहिए। इसका आप पर असर इस वायरल ट्रेंड का सीधा असर लोगों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर पड़ रहा है, जिसे लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है। • धार्मिक नियमों पर असर: शास्त्रों के विरुद्ध जाकर किए जाने वाले ऐसे प्रयोगों से मानसिक शांति के बजाय नकारात्मक फल मिलने की आशंका रहती है। • समाज में संदेश: सोशल मीडिया के अनर्गल ट्रेंड्स को बिना सोचे-समझे अपनाने से सनातन परंपराओं और संस्कृति को गलत दिशा मिल सकती है। ऐसा क्यों हुआ सोशल मीडिया पर इस तरह के ट्रेंड्स के तेजी से फैलने और धार्मिक मान्यताओं के साथ खिलवाड़ होने के पीछे कई डिजिटल और मनोवैज्ञानिक कारण जिम्मेदार हैं। लोग बिना सोचे-समझे इंटरनेट की अंधी दौड़ में शामिल हो रहे हैं। • फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़: यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर क्रिएटर्स अधिक व्यूज और लाइक्स पाने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत और अनोखे तरीके परोस रहे हैं। • मूल परंपराओं की जानकारी का अभाव: लोगों में शास्त्रों और सनातन धर्म के वास्तविक नियमों की सही जानकारी न होने के कारण वे आसानी से ऐसे भ्रमित करने वाले वीडियो के झांसे में आ जाते हैं। • अमरनाथ यात्रा का अनुकरण: लोग प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फानी शिवलिंग के आकर्षण को अपने घरों में कृत्रिम रूप से दोहराने की गलत कोशिश कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. बर्फ से शिवलिंग बनाने का ट्रेंड कहाँ चल रहा है? यह ट्रेंड फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी वायरल हो रहा है। 2. इस ट्रेंड के बारे में वास्तुविद् दुर्गेश तारे का क्या कहना है? दुर्गेश तारे ने इसे शास्त्रों के विरुद्ध और गलत बताया है, तथा इसे तुरंत बंद करने की सलाह दी है। 3. कलयुग में किस तरह के शिवलिंग की पूजा का प्रमाण मिलता है? शास्त्रों के अनुसार कलयुग में पार्थिवेश्वर यानी मिट्टी के शिवलिंग की पूजा का विधान है। 4. शिवलिंग का पिघलना या घटना क्यों अशुभ माना गया है? शास्त्रों और वास्तु के अनुसार शिवलिंग का क्षरण होना आयु को कम करने वाला और अशुभ माना गया है। 5. क्या अंगूठे को शिवलिंग मानकर जल चढ़ाया जा सकता है? ज्योतिषाचार्य दुर्गेश तारे के अनुसार इस बात का भी शास्त्रों में कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। https://trendkia.com/religion/barpha-se-shivalinga-banane-ka-viral-trenda-kitana-sahi-janie-kya-kahate-hain-visheshajna-50271 TrendKia — Har trend, sabse pehle.