भीलवाड़ा के मंशापूर्ण मां दधिमती मंदिर में सुहागिनों को मिलता है चूड़ियों का अनूठा प्रसाद भीलवाड़ा के आजाद नगर स्थित मंशापूर्ण मां दधिमती मंदिर में भक्तों को मिठाई की जगह चूड़ियों और श्रृंगार सामग्री का प्रसाद दिया जाता है, जिससे दांपत्य सुख और दीर्घायु की मान्यता जुड़ी है। राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में स्थित मंशापूर्ण मां दधिमती का धाम अपनी विशिष्ट परंपरा और गहरी आस्था के लिए श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान बनाए हुए है। सामान्य तौर पर हिंदू धर्मस्थलों में पूजा-अर्चना के उपरांत भक्तों को मिष्ठान, फल या सूखे मेवे का प्रसाद वितरित किया जाता है। इसके विपरीत आजाद नगर के इस पवित्र स्थल पर आने वाली विवाहित महिलाओं को देवी के चरणों में समर्पित चूड़ियां प्रसाद के रूप में भेंट की जाती हैं। लोक मान्यता के अनुसार माता के विग्रह पर चढ़ाई गई इन चूड़ियों को धारण करने से सुहागिनों के पतियों की उम्र लंबी होती है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास रहता है। नागौर के गोठ मांगलोद से प्रज्वलित ज्योत का 35 साल पुराना इतिहास आजाद नगर स्थित इस सिद्ध पीठ का इतिहास करीब 35 साल पुराना है। मंदिर के पुजारी मुकेश वैष्णव के अनुसार इस पावन स्थल की स्थापना के समय राजस्थान के नागौर जिले में स्थित प्रसिद्ध गोठ मांगलोद माता मंदिर से अखंड पावन ज्योत लाई गई थी। उसी समय से यहां मां दधिमती की विधिवत आराधना की जा रही है। पुजारी मुकेश वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले हर व्यक्ति की मनोकामना सिद्ध होती है। चाहे कोई भक्त अपने लिए नए मकान की अभिलाषा लेकर आए, नौकरी या रोजगार की तलाश में पहुंचे अथवा संतान सुख की चाहत रखे, देवी मां अपने दरबार में आने वाले हर याचक की झोली भरती हैं। विशेष रूप से नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं का भारी तांता लग जाता है। त्रिशूल पर समर्पित चूड़ियां और श्रृंगार सामग्री वितरण का विधान मंदिर परिसर में पूजा और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी बेहद अनूठी रखी गई है। मंदिर पहुंचने वाली सुहागिन महिलाएं देवी मां के त्रिशूल पर कांच की सुंदर चूड़ियां अर्पित करती हैं। इसके बाद जब अन्य महिला भक्त दर्शन के लिए गर्भगृह के सम्मुख पहुंचती हैं, तो उन्हें वही अर्पित चूड़ियां आशीर्वाद स्वरूप प्रसाद के रूप में सौंपी जाती हैं। केवल चूड़ियां ही नहीं, बल्कि सुहाग के प्रतीक के रूप में महिलाओं को मेहंदी और अन्य जरूरी श्रृंगार सामग्री भी बांटी जाती है। यह चक्र लगातार चलता रहता है, जहां एक श्रद्धालु द्वारा अर्पित की गई सुहाग सामग्री दूसरी श्रद्धालु के हाथों में देवी के मंगलकारी आशीर्वाद के रूप में पहुंचती है। दशकों पुरानी आस्था और भक्तों के प्रत्यक्ष अनुभव मां दधिमती के दरबार से जुड़ी इस परंपरा ने क्षेत्रीय महिलाओं में अटूट विश्वास कायम किया है। मंदिर में नियमित दर्शन के लिए पहुंचने वाली श्रद्धालु ललिता शर्मा ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह पिछले करीब 10 से 15 वर्षों से लगातार यहां माथा टेकने आ रही हैं। ललिता शर्मा ने कहा कि काफी समय तक उन्हें पुत्र और पुत्री की प्राप्ति नहीं हो पा रही थी, जिसके बाद उन्होंने इसी मंदिर में आकर माता रानी के समक्ष संतान प्राप्ति की मनौती मांगी थी। देवी की कृपा से उन्हें संतान का सुख प्राप्त हुआ, जिसके बाद से इस धाम के प्रति उनका विश्वास और अधिक दृढ़ हो गया। यही कारण है कि आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की रक्षा और संतान की खुशहाली की कामना लेकर यहां पहुंचती हैं। इसका आप पर असर भीलवाड़ा के इस प्रसिद्ध मंदिर की अनूठी परंपरा श्रद्धालुओं के धार्मिक अनुष्ठानों और वैवाहिक मान्यताओं को सीधे रूप से प्रभावित करती है। • भारत में: देश भर के धार्मिक पर्यटक और श्रद्धालु राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित इस 35 साल पुराने मंदिर की अनूठी प्रथा के दर्शन करने पहुंच सकते हैं। यहां पारंपरिक मिठाइयों के स्थान पर सुहाग सामग्री का वितरण भारतीय लोक परंपराओं की विविधता को दर्शाता है। • भीलवाड़ा में: स्थानीय सुहागिन महिलाएं अपने दांपत्य जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु के लिए मंदिर के त्रिशूल पर चूड़ियां चढ़ा सकती हैं। मंदिर आने वाली श्रद्धालुओं को प्रसाद में देवी पर चढ़ी चूड़ियां, मेहंदी और श्रृंगार का सामान मुफ्त आशीर्वाद के रूप में मिलता है। • संतान और रोजगार चाहने वालों के लिए: मंदिर प्रशासन और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नौकरी, मकान या संतान की कामना रखने वाले भक्त यहां मनौती मांग सकते हैं। नवरात्रि के विशेष दिनों में दर्शन के लिए जाने से पहले श्रद्धालुओं को भारी भीड़ और कतारों के लिए समय की योजना बना लेनी चाहिए। • धार्मिक बजट और चढ़ावा: मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को मिठाइयों पर अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वे सामान्य चूड़ियां अर्पित कर सकते हैं। यही अर्पित चूड़ियां अन्य महिलाओं को वितरित होने से स्थानीय स्तर पर सामाजिक और धार्मिक जुड़ाव मजबूत होता है। ऐसा क्यों हुआ भीलवाड़ा के आजाद नगर स्थित मंशापूर्ण मां दधिमती मंदिर में यह अनूठी परंपरा देवी के आशीर्वाद और वैवाहिक सौभाग्य की गहरी लोक आस्था के कारण शुरू हुई और वर्षों से निभाई जा रही है। • नागौर के मूल पीठ से जुड़ाव: करीब 35 वर्ष पूर्व नागौर के गोठ मांगलोद स्थित ऐतिहासिक माता मंदिर से अखंड ज्योत लाकर भीलवाड़ा में इस मंदिर की स्थापना की गई थी। मूल पीठ की शक्ति और परंपराओं को बनाए रखने के लिए यहां माता की पूजा का विधान तय किया गया। • सुहाग की रक्षा की लोक मान्यता: हिंदू परंपरा में चूड़ियों, मेहंदी और सिंदूर को वैवाहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के तहत श्रद्धालुओं ने माता के त्रिशूल पर चूड़ियां चढ़ाना शुरू किया ताकि देवी का सीधा आशीर्वाद उनके दांपत्य को मिल सके। • मनोकामना पूर्ति के व्यक्तिगत अनुभव: मंदिर में आने वाले कई श्रद्धालुओं को संतान प्राप्ति, घर और रोजगार जैसी मनोकामनाएं पूरी होने का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ। ऐसे अनुभवों ने स्थानीय लोगों के विश्वास को इतना मजबूत कर दिया कि यह परंपरा दशकों से निरंतर चली आ रही है। सवाल-जवाब 1. भीलवाड़ा के मंशापूर्ण मां दधिमती मंदिर में प्रसाद के रूप में क्या दिया जाता है? इस मंदिर में पारंपरिक मिठाई के बजाय माता के त्रिशूल पर अर्पित की गई चूड़ियां, मेहंदी और श्रृंगार का सामान प्रसाद के रूप में दिया जाता है। 2. मंदिर में चूड़ियों का प्रसाद ग्रहण करने के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? मान्यता है कि माता रानी को अर्पित चूड़ियों को धारण करने से पति की आयु दीर्घायु होती है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। 3. भीलवाड़ा का यह दधिमती माता मंदिर कितना पुराना है? यह मंदिर लगभग 35 साल पुराना है और इसकी स्थापना के समय नागौर के गोठ मांगलोद मंदिर से पावन ज्योत लाई गई थी। 4. मंदिर के पुजारी का क्या नाम है और उन्होंने क्या जानकारी दी? मंदिर के पुजारी का नाम मुकेश वैष्णव है, जिन्होंने बताया कि यहां सच्चे मन से मकान, नौकरी या संतान मांगने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 5. श्रद्धालु ललिता शर्मा ने मंदिर को लेकर क्या व्यक्तिगत अनुभव साझा किया? ललिता शर्मा ने बताया कि वह 10 से 15 साल से मंदिर आ रही हैं और यहां मनौती मांगने के बाद ही उन्हें संतान सुख प्राप्त हुआ था। https://trendkia.com/religion/bhilwara-ke-mnshapurna-maa-dadhimati-mandir-men-suhaginon-ko-milata-hai-churiyon-ka-anutha-prasada-43939 TrendKia — Har trend, sabse pehle.