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  "type": "article",
  "title": "भीलवाड़ा में सावन का समापन: 751 कावड़ और 1111 कलश यात्रा के साथ बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन",
  "summary": "भीलवाड़ा में सावन के आखिरी चरण में एक विशाल कावड़ और कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें 1111 महिलाओं और 751 कावड़ियों ने हिस्सा लिया और अमरनाथ की तर्ज पर बाबा बर्फानी के दर्शन मुख्य आकर्षण रहे।",
  "content": "भगवान शिव को समर्पित सावन के पवित्र महीने का आखिरी दौर चल रहा है। इस दौरान मेवाड़ के प्रवेश द्वार भीलवाड़ा में शिवभक्तों की आस्था और उत्साह चरम पर पहुंच गया है। शहर के पास स्थित हाथीभाटा आश्रम से एक भव्य और विशाल कावड़ तथा कलश यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे इलाके को शिवमय बना दिया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।\n\nभीलवाड़ा में उमड़ी शिवभक्तों की भारी भीड़\nइस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें 1 हजार 1 सौ 11 कलशधारी महिलाओं के साथ-साथ 751 कावड़िए शामिल हुए। जब केसरिया वस्त्र पहने और कावड़ उठाए श्रद्धालु सड़क पर निकले, तो चारों तरफ भक्ति का रंग गहरा हो गया। हाथीभाटा आश्रम से शुरू हुई यह यात्रा कुल 12 गांवों से होकर गुजरी और अंत में पांसल स्थित गेलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। रास्ते में विभिन्न समाजों और संगठनों द्वारा यात्रा का बेहद गर्मजोशी और आत्मीय स्वागत किया गया, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया।\n\nअमरनाथ की तर्ज पर बाबा बर्फानी का श्रृंगार\nयात्रा के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण अमरनाथ गुफा की तर्ज पर बर्फ से तैयार किए गए बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन रहे। इस अद्भुत और भव्य श्रृंगार को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोग दर्शन कर भाव-विभोर हो गए। इसके अलावा, पारंपरिक संस्कृति को दर्शाते हुए ऊंट की सवारी और प्रसिद्ध कच्ची घोड़ी नृत्य के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया, जिससे यह आयोजन और भी खास बन गया।\n\nगेलेश्वर महादेव मंदिर में हुआ जलाभिषेक और महाप्रसाद\nहाथीभाटा आश्रम के महंत श्री संत दास जी महाराज ने जानकारी दी कि यह यात्रा हाथीभाटा आश्रम से शुरू होकर मार्ग में पड़ने वाले 12 गांवों के शिवालयों तक पहुंची, जहां पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया गया। यात्रा के पांसल स्थित श्री गेलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने पर विधि-विधान से जलाभिषेक और भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। अनुष्ठान के अंत में सभी उपस्थित शिवभक्तों को महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसके साथ ही इस धार्मिक यात्रा का सफलतापूर्वक समापन हुआ।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: सावन के अंतिम दौर में देश भर के विभिन्न शिव मंदिरों और यात्राओं में भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे यातायात और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।\n• भीलवाड़ा में: शहर और आसपास के 12 गांवों के यात्रा मार्ग पर स्थानीय निवासियों को आवागमन के दौरान कुछ समय के लिए डायवर्जन और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भीलवाड़ा में कावड़ यात्रा कहां से शुरू हुई थी?\nयह यात्रा शहर के निकटवर्ती हाथीभाटा आश्रम से शुरू हुई थी।\n\n2. यात्रा में कितने कलशधारी और कावड़िए शामिल हुए थे?\nइस यात्रा में 1,111 कलशधारी महिलाएं और 751 कावड़िए शामिल हुए थे।\n\n3. यह कावड़ यात्रा कहां जाकर संपन्न हुई?\nयह यात्रा 12 गांवों से होते हुए पांसल स्थित गेलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।\n\n4. यात्रा का मुख्य आकर्षण क्या था?\nयात्रा का मुख्य आकर्षण अमरनाथ की तर्ज पर बर्फ से सजाया गया बाबा बर्फानी का अलौकिक श्रृंगार और कच्ची घोड़ी नृत्य था।",
  "url": "https://trendkia.com/religion/bhilwara-mein-sawan-ka-samapan-751-kanwar-aur-1111-kalash-yatra-ke-sath-baba-barfani-ke-alouhik-darshan-20839",
  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-08-23",
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    "भीलवाड़ा",
    "सावन",
    "कावड़ यात्रा",
    "बाबा बर्फानी",
    "गेलेश्वर महादेव",
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  "site": "TrendKia"
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