वर्ष 2026 में कब है भूत चतुर्दशी, जान लें सही तिथि, पूजा का मुहूर्त और महत्व साल 2026 में भूत चतुर्दशी का पर्व 7 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन देवी काली, यमराज और पूर्वजों की पूजा के साथ 14 दीपक जलाने की परंपरा है। भूत चतुर्दशी का यह विशेष पर्व मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भूत चतुर्दशी की पावन रात्रि को देवी काली, यमराज, चामुंडा देवी, भगवान शिव और अपने पूर्वजों की पूजा-आराधना करने का विधान तय किया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस खास रात के दौरान नकारात्मक शक्तियां काफी सक्रिय हो जाती हैं। इन बुरी ताकतों के प्रभाव से बचने और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए देवी-देवताओं की उपासना करने के साथ ही घर में दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। इस दिन विशेष रूप से 14 दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है। इन चौदह दीपकों को प्रज्वलित करने के पीछे यह गहरी मान्यता जुड़ी है कि इससे कुल की चौदह पीढ़ियों के पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और साधक को जीवन में अत्यंत सुखद परिणाम प्राप्त होते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि वर्ष 2026 में भूत चतुर्दशी का यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इस दौरान पूजा का सबसे उत्तम समय क्या रहने वाला है। वर्ष 2026 में भूत चतुर्दशी की सही तिथि पंचांग के अनुसार भूत चतुर्दशी का यह पर्व हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन पड़ता है, जो कि ठीक दीपावली के एक दिन पूर्व आती है। साल 2026 में कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होने जा रही है। इसके साथ ही इस चतुर्दशी तिथि का समापन अगले दिन यानी 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर होगा। चूँकि रात्रि के समय पड़ने वाली चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को ही प्राप्त हो रही है, इसलिए भूत चतुर्दशी का यह प्रमुख त्योहार 7 नवंबर को ही मनाया जाएगा। इस दिन लोग विधि-विधान के साथ अपने घरों में अनुष्ठान संपन्न करते हैं और परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं। भूत चतुर्दशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त और समय पर्व के दिन भगवान शिव, माता काली, चामुंडा देवी, यमराज और पितरों की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 33 मिनट से लेकर रात्रि 7 बजकर 56 मिनट तक निर्धारित किया गया है। मान्यताओं के अनुसार इस विशेष रात्रि में हमारी चौदह पीढ़ियों पहले तक के पूर्वज पृथ्वी लोक पर भ्रमण के लिए आते हैं। यही मुख्य कारण है कि भूत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 14 दीपकों का दान करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इन सभी चौदह दीपकों को घर के मुख्य द्वार के अलावा पूजा घर और घर की दक्षिण दिशा जैसे विशेष स्थानों पर प्रज्वलित किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में मान्यताएँ और अन्य नाम प्राचीन मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार ये चौदह दीपक हमारी चौदह पीढ़ियों तक के सभी पितरों को प्रसन्न करते हैं और हमें हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा भूत चतुर्दशी के दिन दीपक जलाने से देवी-देवताओं की असीम कृपा और आशीर्वाद भी सहज ही प्राप्त हो जाता है। मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ चुनिंदा स्थानों पर मनाई जाने वाली इस भूत चतुर्दशी को देश के अन्य अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। इस पावन पर्व को छोटी दीपावली, काली चौदस और नरक चतुर्दशी के रूप में भी देश भर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसका आप पर असर भूत चतुर्दशी का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, जिससे जनजीवन और परंपराओं पर सीधा असर पड़ता है। • भारत में: पूर्वी भारत और अन्य राज्यों में लोग इस दिन अपने पूर्वजों की शांति के लिए विशेष पूजा करते हैं। इससे पारिवारिक और धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा को बढ़ावा मिलता है। • दैनिक जीवन में: इस दिन शाम के समय 14 दीपक जलाने और पूजा करने से घर का माहौल सकारात्मक बनता है। लोग अपनी परंपराओं के अनुसार तय मुहूर्त पर ही अनुष्ठान संपन्न करते हैं। ऐसा क्यों हुआ भूत चतुर्दशी मनाने और इस दिन विशेष अनुष्ठान करने के पीछे प्राचीन धार्मिक मान्यताएँ और सांस्कृतिक परंपराएँ जुड़ी हुई हैं। • तिथि की गणना: यह त्योहार हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष यह तिथि 7 नवंबर को रात्रि कालीन बेला में प्राप्त हो रही है। • पूर्वजों की मान्यता: धार्मिक विश्वास है कि इस विशेष रात्रि को पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं। उनकी आत्मा की शांति और चौदह पीढ़ियों के कल्याण के लिए 14 दीपक जलाने की परंपरा है। • नकारात्मक ऊर्जा निवारण: प्राचीन कथाओं और मान्यताओं के अनुसार इस रात नकारात्मक शक्तियाँ सक्रिय होती हैं। इनसे बचने के लिए देवी काली और भगवान शिव की उपासना की जाती है। सवाल-जवाब 1. साल 2026 में भूत चतुर्दशी किस तारीख को है? साल 2026 में भूत चतुर्दशी 7 नवंबर को मनाई जाएगी। 2. चतुर्दशी तिथि की शुरुआत कब से होगी? कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी। 3. चतुर्दशी तिथि का समापन कब होगा? चतुर्दशी तिथि का समापन 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर होगा। 4. भूत चतुर्दशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात्रि 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। 5. इस दिन कितने दीपक जलाने की परंपरा है? भूत चतुर्दशी के दिन 14 दीपक जलाने की परंपरा है। 6. भूत चतुर्दशी के अन्य लोकप्रिय नाम क्या हैं? इस पर्व को छोटी दीपावली, काली चौदस और नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। https://trendkia.com/religion/bhoot-chaturdashi-2026-date-know-correct-timing-puja-muhurat-and-significance-58022 TrendKia — Har trend, sabse pehle.