# बिहार के इस अनोखे मंदिर का रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान, हर साल 12 जनवरी को उमड़ती है 50 हजार भक्तों की भारी भीड़

> बिहार के जहानाबाद स्थित फूल डाक बाबा मंदिर में हर साल 12 जनवरी को बड़ा मेला लगता है, जहां दूर-दूर से करीब 50 हजार भक्त पहुंचते हैं। इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक चमत्कारी और रोचक कहानी है, जिसमें एक रहस्यमयी चिट्ठी मिलने का जिक्र मिलता है।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/bihar-ke-isa-anokhe-mndira-ka-rahasya-janakara-raha-jaenge-hairana-hara-sala-12-janavari-ko-umarati-hai-50-hajara-bhakton-ki-bhari-38755 · **Language:** Hindi
**Tags:** जहानाबाद, बिहार मंदिर, फूल डाक बाबा, धार्मिक मान्यता, उत्तरी दौलतपुर, बिहार मेले

बिहार अपनी प्राचीन संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान रखता है। यहां के हर एक कोने में कोई न कोई ऐसा धार्मिक स्थल मौजूद है, जिससे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। ऐसा ही एक खास और चमत्कारी स्थल बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित है, जिसे फूल डाक बाबा मंदिर के नाम से जाना जाता है। जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले उत्तरी दौलतपुर इलाके में बने इस मंदिर को लेकर आसपास के इलाकों में जबरदस्त मान्यता है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

## श्रद्धा का केंद्र और वार्षिक मेले का भव्य आयोजन
इस पवित्र मंदिर में भगवान का साक्षात वास माना जाता है, जिसके कारण यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर साल 12 जनवरी के दिन यहां एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस विशेष अवसर पर लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है और कड़ाके की सर्दी के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिलती है। इस मंदिर के मुख्य प्रांगण में फूल डाक बाबा और डाकिनी माई की प्रतिमाएं विराजमान हैं, और यहां बलि प्रथा की परंपरा भी निभाई जाती है।

## मान्यताओं और चमत्कारों से जुड़ी स्थानीय आस्था
स्थानीय लोगों का ऐसा पक्का विश्वास है कि इस दरबार में आने वाले हर इंसान को न्याय मिलता है और सच्चे दिल से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मंदिर समिति के अध्यक्ष रवि शंकर चौहान के अनुसार, 12 जनवरी का दिन उनके पूरे गांव के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होता है और उस दिन पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। आयोजन से पहले सभी घरों की विशेष रूप से साफ-सफाई की जाती है क्योंकि ग्रामीणों की यह गहरी मान्यता है कि बाबा स्वयं हर घर का चक्कर लगाते हैं। उनके दरबार की शक्ति ऐसी है कि जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ यहां हाजिरी लगाता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।

## मंदिर के उद्गम की एक बेहद रोचक और रहस्यमयी कहानी
इस ऐतिहासिक मंदिर के इतिहास के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और हैरान कर देने वाली घटना जुड़ी हुई है। मंदिर के कोषाध्यक्ष विनोद सिंह के मुताबिक, पहले उत्तरी दौलतपुर में डाक बाबा की पिंडी केवल मिट्टी की हुआ करती थी और आसपास काफी गंदगी फैली रहती थी, साथ ही उस समय वहां ज्यादा मकान भी नहीं हुआ करते थे। आसपास के किसान वहां अपनी उगाई हुई सब्जियां रख दिया करते थे और जब सब्जियां इधर-उधर हो जाती थीं, तो लोगों के बीच आपस में विवाद होने लगता था। कुछ समय बाद अचानक आसपास के घरों पर अज्ञात रूप से पत्थर और रोड़े गिरने लगे, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया और किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह सब कौन कर रहा है।

## चिट्ठी मिलने के बाद शुरू हुई थी पूजा-अर्चना
इस दौरान गांव के ही एक शख्स द्वारा कुछ कहे जाने पर उसके धान के पुंज में अचानक रहस्यमयी तरीके से आग लग गई। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से घबराए ग्रामीणों ने एक ब्राह्मण को बुलाकर स्थिति की जानकारी ली। ब्राह्मण ने जब स्थिति को परखा तो उसने बताया कि यह किसी ब्रह्म का प्रकोप है। उसके इतना कहते ही जमीन से एक चिट्ठी अपने आप बाहर निकल आई, जिसे देखकर वहां मौजूद सभी लोग हक्के-बक्के रह गए। उस चमत्कारी चिट्ठी में साफ-साफ लिखा हुआ था कि यह कोई ब्रह्म नहीं है, बल्कि वे फूल डाक हैं और उनकी पूजा एक निश्चित तरीके से की जानी चाहिए। इसी घटना के बाद से उस स्थान पर नियमित रूप से पूजा-पाठ और अनुष्ठान की शुरुआत हुई जो आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ जारी है।

## इसका आप पर असर
यह खबर मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ी है, जिसका स्थानीय व्यापार और पर्यटन पर सीधा असर पड़ता है।

- **बिहार में:** राज्य के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यात्रा और परिवहन व्यवस्था सुचारू रखना प्रशासन के लिए अहम होता है। वार्षिक मेलों के समय स्थानीय बाजारों और दुकानदारों को अच्छी आर्थिक गतिविधि का लाभ मिलता है।
- **जहानाबाद में:** उत्तरी दौलतपुर और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों के लिए 12 जनवरी का दिन बड़े उत्सव जैसा होता है, जिससे क्षेत्र में सामाजिक मेलजोल बढ़ता है। बड़ी संख्या में आगंतुकों के आने से स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबारियों को अपनी सेवाएं और सामान बेचने का अवसर मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस मंदिर से जुड़ी घटनाओं और मान्यताओं का आधार ग्रामीण परंपराएं और वर्षों से चली आ रही लोक कथाएं हैं, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर इस स्थान को एक बड़े आस्था केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

- **ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** शुरुआती दौर में इस स्थान पर केवल एक मिट्टी की पिंडी हुआ करती थी और आसपास के खुले क्षेत्र में सब्जियों के रख-रखाव को लेकर अक्सर छोटे-मोटे विवाद होते थे।
- **रहस्यमयी घटनाएं:** स्थानीय घरों पर अचानक पत्थर गिरने और धान के पुंज में आग लगने जैसी असामान्य घटनाओं ने ग्रामीणों को भयभीत कर दिया, जिससे पारंपरिक धार्मिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी।
- **चिट्ठी का प्रकटन:** ब्राह्मण की उपस्थिति में जमीन से एक लिखित संदेश का प्रकट होना, जिसमें देवता ने स्वयं अपनी पहचान और पूजा के तौर-तरीके बताए, इस स्थल के धार्मिक महत्व को हमेशा के लिए स्थापित कर गया।

## सवाल-जवाब

### 1. फूल डाक बाबा मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर बिहार के जहानाबाद जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले उत्तरी दौलतपुर में स्थित है।

### 2. इस मंदिर में हर साल मेला कब लगता है?
इस मंदिर में हर साल 12 जनवरी को एक बहुत बड़ा मेला लगता है।

### 3. मेले में कितने लोग शामिल होते हैं?
12 जनवरी के इस आयोजन में बिहार के अलावा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश से करीब 50 हजार भक्त जुटते हैं।

### 4. मंदिर के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष कौन हैं?
रवि शंकर चौहान मंदिर के अध्यक्ष हैं और विनोद सिंह इसके कोषाध्यक्ष हैं।

### 5. मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी क्या है?
गांव में रहस्यमयी घटनाओं और एक ब्राह्मण को बुलाने के बाद जमीन से एक चिट्ठी निकली थी, जिसमें पूजा-पाठ करने का निर्देश दिया गया था।

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