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  "title": "ब्रज के बरसाना में स्थापित प्रियेश्वर धाम की अनूठी पौराणिक कथा जब शिवजी ने धारण किया था गोपी रूप",
  "summary": "मथुरा जिले के बरसाना में प्रिया कुंड तट पर स्थित प्रियेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना द्वापर युग में राधा रानी द्वारा की गई थी, जहां भगवान शिव गोपी रूप में पधारे थे।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना और नंदगांव समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा की दिव्य लीलाओं की गूंज आज भी स्पष्ट सुनाई देती है। ब्रज भूमि के हर कोने में पौराणिक गाथाएं और द्वापर युग की स्मृतियां रची-बसी हैं। इसी पवित्र नगरी बरसाना में एक अत्यंत दुर्लभ और पावन स्थल विद्यमान है, जिसे प्रियेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अद्वितीय मंदिर में स्थापित शिवलिंग की स्थापना स्वयं राधा रानी ने अपने कर-कमलों से की थी। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि भगवान शिव और राधा रानी के बीच के अगाध भक्ति भाव और परस्पर सम्मान का प्रतीक भी है। द्वापर युग की महान परंपराओं को संजोए यह मंदिर आज भी बरसाना के प्रसिद्ध प्रिया कुंड के किनारे स्थित है और देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए असीम आस्था का केंद्र बना हुआ है।\n\nप्रिया कुंड का पावन इतिहास और राधा रानी की स्मृतियां\nबरसाना में स्थित प्रिया कुंड वह स्थान है, जहां द्वापर युग में राधा रानी अपनी प्रिय सखियों के साथ विचरण करने और स्नान ध्यान के लिए आया करती थीं। स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी स्नान के पश्चात अपने हाथों में लगी मेहंदी को भी इसी कुंड के स्वच्छ जल में धोया करती थीं। इसी कारण इस कुंड को प्रिया कुंड नाम मिला और यह जल स्रोत अत्यंत पवित्र माना जाने लगा। भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की बाल लीलाओं से जुड़ा यह सरोवर आज भी अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिकता को बनाए हुए है। इसी कुंड के सुरम्य तट पर प्रियेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जो सदियों से ब्रज की पावन भूमि पर द्वापर युग की जीवंत निशानी के रूप में मौजूद है।\n\nराधा रानी के दर्शन हेतु महादेव का गोपी रूप धारण करना\nप्रियेश्वर महादेव मंदिर के पीछे एक अत्यंत मनमोहक और भावपूर्ण पौराणिक प्रसंग जुड़ा हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, एक बार देवाधिदेव भगवान शिव के मन में राधा रानी के प्रत्यक्ष दर्शन करने की तीव्र अभिलाषा जागृत हुई। अपनी इसी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए महादेव कैलाश से यात्रा करते हुए ब्रज के बरसाना स्थित प्रिया कुंड के समीप पहुंचे। हालांकि, जब वे वहां पहुंचे, तो राधा रानी अपनी सखियों संग कुंड पर स्नान कर रही थीं। स्त्री मर्यादा और उस पावन स्थल की गरिमा का पूर्ण सम्मान करते हुए भगवान शिव ने अपने मूल रूप में वहां जाना उचित नहीं समझा। इसलिए, महादेव ने एक गोपी का रूप धारण कर लिया। वे राधा रानी के स्नान स्थल की ओर अपनी पीठ करके बैठ गए और अत्यंत तन्मयता से वहां बैठकर ध्यान और आराधना करने लगे।\n\nशीश झुकाकर मांगा आशीर्वाद और मिला प्रियेश्वर नाम\nजब राधा रानी अपने स्नान ध्यान के पश्चात वहां से गुजर रही थीं, तो उनकी दृष्टि गोपी वेश में बैठे एक अद्भुत बाल योगी पर पड़ी जो ईश्वर की गहन साधना में लीन था। राधा रानी ने उत्सुकतावश उस बाल योगी के समीप जाकर उनका परिचय पूछा। तब भगवान शिव ने अपने वास्तविक स्वरूप को प्रकट किया और राधा रानी के अलौकिक दर्शन पाकर स्वयं को कृतार्थ महसूस किया। महादेव ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक अपना शीश राधा रानी के चरणों में झुका दिया और उनसे दिव्य आशीर्वाद की याचना की। भगवान शिव की इस निष्छल भक्ति और मर्यादा भाव से प्रसन्न होकर राधा रानी ने उन्हें सहर्ष आशीर्वाद प्रदान किया। इसके साथ ही राधा रानी ने भगवान शिव को यह वचन भी दिया कि इस पावन धाम पर उन्हें हमेशा राधा रानी के नाम से यानी प्रियेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाएगा।\n\nसपरिवार साधना मुद्रा में विराजमान हैं भगवान शिव\nमंदिर के प्राचीन इतिहास और परंपरा के विषय में जानकारी देते हुए मंदिर के पुजारी बृजभूषण शास्त्री ने बताया कि यह स्थान द्वापर कालीन मान्यताओं से परिपूर्ण है। पुजारी बृजभूषण शास्त्री के अनुसार, राधा रानी ने भगवान शिव की भक्ति से द्रवित होकर उन्हें अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था, जिसके बाद से ही इस स्थान का नाम प्रियेश्वर महादेव पड़ा। इस मंदिर की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव अकेले नहीं, बल्कि अपने संपूर्ण शिव परिवार के साथ विराजमान हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित सभी प्रतिमाएं ध्यान और साधना की मुद्रा में दृष्टिगोचर होती हैं। द्वापर युग से जुड़ी इन प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन के लिए वर्षभर भक्तों का तांता लगा रहता है और यह मंदिर ब्रज की पावन संस्कृति का एक अनमोल स्तंभ माना जाता है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारतभर के श्रद्धालुओं के लिए: ब्रज यात्रा के दौरान बरसाना में प्रिया कुंड और प्रियेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन कर श्रद्धालु द्वापर कालीन पौराणिक परंपरा और भगवान शिव व राधा रानी के दिव्य संबंध से जुड़ सकते हैं।\n• मथुरा और ब्रज क्षेत्र में: स्थानीय धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ प्रिया कुंड जैसे प्राचीन सरोवर और द्वापर कालीन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को बल मिलता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रियेश्वर महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश में कहां स्थित है?\nयह मंदिर मथुरा जिले के बरसाना क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रिया कुंड के तट पर स्थित है।\n\n2. प्रियेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना से जुड़ी क्या मान्यता है?\nधार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना द्वापर युग में स्वयं राधा रानी ने अपने हाथों से की थी।\n\n3. भगवान शिव ने बरसाना में गोपी रूप क्यों धारण किया था?\nराधा रानी के दर्शन करने पहुंचे भगवान शिव ने स्नान स्थल की मर्यादा का सम्मान करते हुए गोपी वेश धारण कर ध्यान लगाया था।\n\n4. प्रिया कुंड का नाम प्रिया कुंड कैसे पड़ा?\nमान्यता है कि राधा रानी अपनी सखियों संग यहां स्नान करने आती थीं और अपने हाथों की मेहंदी धोती थीं, जिससे इस कुंड का नाम प्रिया कुंड पड़ा।\n\n5. प्रियेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिमाओं की क्या विशेषता है?\nइस मंदिर में भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ साधना और ध्यान की मुद्रा में विराजमान हैं।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-08-15",
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