बुरहानपुर के ताप्ती तट पर स्थित 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर, जहां श्रीराम ने किया था पूजन और अहिल्याबाई ने कराया निर्माण मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में ताप्ती नदी के तट पर स्थित 500 साल पुराना 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर सावन महीने में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मध्य प्रदेश राज्य के बुरहानपुर जिले के अंतर्गत नागझिरी क्षेत्र में ताप्ती नदी के पावन तट पर एक विशेष धार्मिक स्थल स्थित है, जिसे 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के नाम से जाना जाता है। सावन के पवित्र महीने की शुरुआत होते ही इस पावन परिसर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा लगने लगता है। दूर-दूर से आने वाले भक्त सुबह की पहली किरण से लेकर देर शाम तक भगवान शिव के दर्शन और विशेष पूजन के लिए यहां पहुंचते हैं। श्रीराम के पूजन और अहिल्याबाई होल्कर के निर्माण का इतिहास इस मंदिर का इतिहास अत्यंत समृद्ध और प्राचीन माना जाता है। मंदिर परिसर से जुड़े उमेश सोनी और मेहुल श्रॉफ के अनुसार, यह धार्मिक स्थल लगभग 500 वर्ष पुराना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं भगवान श्रीराम ने अपने जीवनकाल के दौरान इस स्थान पर पधारकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक और विधिवत पूजन संपन्न किया था। कालखंड के बीतने के साथ मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध शासक देवी अहिल्याबाई होल्कर ने इस पावन स्थल का जीर्णोद्धार करवाते हुए यहां 12 ज्योतिर्लिंगों की औपचारिक स्थापना करवाई थी। ताप्ती नदी के किनारे स्थित होने के कारण इस परिसर का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, जहां श्रद्धालु पूजन से पहले पवित्र नदी जल में स्नान करते हैं। सावन में विशेष पूजा, विवाह और संतान प्राप्ति की मान्यताएं नागझिरी के इस 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के साथ कई जनविश्वास और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन मास में यहां सच्चे मन से की गई पूजा अर्चना से हर मनोकामना पूरी होती है। विशेष रूप से यदि कोई कुंवारी कन्या यहां आकर भगवान शिव की आराधना करती है, तो उसे सुयोग्य वर प्राप्त होता है। इसके साथ ही, निःसंतान दंपत्ति भी संतान सुख की प्राप्ति के लिए यहां मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने के पश्चात भक्त मंदिर में उपस्थित होकर भगवान शिव को फल और फूल अर्पित करके अपना आभार व्यक्त करते हैं। स्थानीय निवासियों की अटूट आस्था और दैनिक दिनचर्या क्षेत्र के निवासी पिछले कई दशकों से इस मंदिर परिसर से गहराई से जुड़े हुए हैं। करीब 40 से 50 वर्ष की आयु के कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे अपने जीवन के लंबे समय से प्रतिदिन यहां दर्शन और पूजन के लिए आते रहे हैं। भक्तों की दिनचर्या में ताप्ती नदी के जल में स्नान करना और उसके बाद 12 ज्योतिर्लिंगों के समक्ष शीश झुकाना शामिल है। सावन के पूरे महीने मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहता है और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग अपनी मन्नत लेकर यहां पहुंचते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: पवित्र ताप्ती नदी के तट पर स्थित इस ऐतिहासिक 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के बारे में जानकर देशभर के शिव भक्त सावन मास के दौरान अपनी धार्मिक यात्रा और दर्शन की योजना बना सकते हैं। • मध्य प्रदेश और बुरहानपुर में: बुरहानपुर जिले और आसपास के निवासियों के लिए यह मंदिर दैनिक पूजा, ताप्ती नदी स्नान और विभिन्न मन्नतों की पूर्ति का मुख्य धार्मिक केंद्र है। सवाल-जवाब 1. बुरहानपुर का 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर कितना पुराना है? मंदिर से जुड़े उमेश सोनी और मेहुल श्रॉफ के अनुसार यह धार्मिक स्थल लगभग 500 साल पुराना है। 2. इस मंदिर का निर्माण किसने करवाया था? इस मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था, जिन्होंने यहां 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की थी। 3. क्या इस मंदिर का संबंध भगवान श्रीराम से भी माना जाता है? हां, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान श्रीराम ने स्वयं पधारकर शिवजी का अभिषेक और पूजन किया था। 4. यह मंदिर किस नदी के तट पर स्थित है? यह मंदिर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में पावन ताप्ती नदी के तट पर स्थित है। 5. सावन मास में इस मंदिर में क्या विशेष मान्यताएं हैं? मान्यता है कि यहां पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को उत्तम वर मिलता है और संतान प्राप्ति की मन्नतें पूरी होती हैं। https://trendkia.com/religion/burhanpur-ke-tapti-tata-para-sthita-12-jyotirlinga-mndira-jahan-shri-ram-ne-kiya-tha-pujana-aura-ahilyabai-holkar-ne-karaya-nirman-14289 TrendKia — Har trend, sabse pehle.