छतरपुर के इन चमत्कारी शिव मंदिरों में होती है हर मनोकामना पूरी, दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्राचीन शिव मंदिरों की अपनी ही अनूठी महिमा है। सावन के महीने में इन पावन स्थलों पर भक्तों का तांता लगा रहता है और लोग दूर-दूर से भगवान शिव का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। छतरपुर जिले के नौगांव क्षेत्र के अच्चट गांव स्थित सिद्ध पहाड़ी पर लगभग 11वीं शताब्दी का 1008 मुखी शिव मंदिर मौजूद है, जो देश भर के भक्तों के लिए गहरी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। एक हजार आठ मुख वाले देवाधिदेव महादेव के इस दरबार में सावन मास के दौरान विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु पहुंचकर अपनी सुख और समृद्धि की कामना करते हैं। इस ऐतिहासिक स्थल की दिव्यता हर आने वाले को अपनी ओर आकर्षित करती है और लोग यहां दर्शन कर खुद को धन्य महसूस करते हैं। इसी तरह छतरपुर की बिजावर तहसील में जटाशंकर धाम स्थित है, जिसे केदारनाथ मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। यह पवित्र धाम भगवान शिव की विशेष कृपा और तमाम अलौकिक शक्तियों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। इस मंदिर परिसर के अंदर कुल तीन विशेष कुंड बने हुए हैं, जिनमें से एक में ठंडा, दूसरे में गर्म और तीसरे में साधारण पानी निकलता है। ऐसी मान्यता है कि इन कुंडों में स्नान करने से बड़े से बड़ा चर्म रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है, यही कारण है कि यहां आने वाले लोग अपने साथ पवित्र जल भरकर अपने घरों को ले जाते हैं। इस धाम के गर्भगृह में एक अत्यंत दिव्य शिवलिंग स्थापित है जो स्वयंभू रूप में प्रकट हुआ है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि सदियों पहले यह पावन शिवलिंग स्वतः प्रकट हुआ था जो आज भी अपने मूल स्वरूप में पूरी तरह सुरक्षित है। घनी पहाड़ियों के बीच आच्छादित जय शिव धाम को देखकर ऐसा आभास होता है मानो भगवान शिव स्वयं प्रकृति की गोद में विराजमान होकर पूरी सृष्टि का कल्याण कर रहे हों। यहां की शांत और प्राकृतिक छटा भक्तों के मन को असीम शांति प्रदान करती है। खजुराहो में स्थित भगवान शिव का एक अन्य प्रमुख मंदिर कुंवर मठ के नाम से भी पुकारा जाता है, हालांकि अधिकांश लोग इसे दूल्हा देव मंदिर के रूप में ही जानते हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों के मुताबिक इस प्रसिद्ध दूल्हा देव मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के प्रतापी राजा मदन वर्मन द्वारा 1130 ईस्वी में करवाया गया था। इस प्राचीन मंदिर की वास्तुकला और शिल्प कला उस काल के उत्कृष्ट कौशल का एक बेहतरीन नमूना पेश करती है जो देखने वालों को अचंभित कर देती है। इस मंदिर के गर्भगृह में एक बहुत ही सुंदर और भव्य शिवलिंग स्थापित किया गया है। इसकी सबसे अनूठी और दिलचस्प विशेषता यह है कि इस पवित्र शिवलिंग की सतह पर कुल 999 छोटे लिंग उकेरे गए हैं। ऐसी गहरी धार्मिक मान्यता है कि इस विशेष शिवलिंग की केवल एक बार परिक्रमा करने से एक साथ 1000 परिक्रमाओं का पुण्य फल प्राप्त होता है। मुख्य शिवलिंग के अलावा इस पावन परिसर में भगवान गणेश, माता पार्वती और देवी गंगा जैसी अन्य प्रतिष्ठित देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं। खजुराहो में ही स्थित मतंगेश्वर महादेव मंदिर अपनी भव्यता और अनूठे स्वरूप के कारण विशेष महत्व रखता है। इस प्राचीन मंदिर में जो शिवलिंग स्थापित है उसकी कुल लंबाई 18 फीट है, जिसमें से 9 फीट हिस्सा जमीन के ऊपर है और 9 फीट हिस्सा जमीन के नीचे गहराई में स्थित है। यह मंदिर खजुराहो के सबसे शुरुआती मंदिरों में से एक है जिसका निर्माण 8वीं से 9वीं शताब्दी के दौरान हुआ था, जबकि यहां के अन्य कलाकृति वाले बाकी मंदिर 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह चमत्कारी शिवलिंग हर साल चावल के एक दाने के बराबर आकार में बढ़ता था। धीरे-धीरे बढ़ते हुए इस शिवलिंग की लंबाई कुल 18 फीट तक पहुंच गई थी। उस समय हर साल शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर इस शिवलिंग की लंबाई नापी जाती थी। इसके लगातार बढ़ते आकार को नियंत्रित करने के लिए इस पर विशेष मंत्रों के माध्यम से कील का स्पर्श कराया गया था, जिससे इसकी बढ़ती गति को स्थिर किया जा सके। हालांकि आज भी यह लोक मान्यता मजबूती से कायम है कि इस पावन शिवलिंग की लंबाई हर वर्ष लगातार बढ़ती रहती है। इन सभी मंदिरों में सच्चे मन से भगवान शिव के शिवलिंग को हाथ से स्पर्श करने मात्र से ही श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्तों का ऐसा अनुभव रहता है कि जब वे श्रद्धा के साथ शिवलिंग का स्पर्श करते हैं तो उन्हें अपनी इच्छाओं के पूरे होने का अहसास होने लगता है। इसका आप पर असर मध्य प्रदेश और विशेष रूप से छतरपुर क्षेत्र के निवासियों के लिए यह सावन मास में इन पावन धार्मिक स्थलों के दर्शन और आध्यात्मिक यात्रा की योजना बनाने का एक बेहतरीन अवसर है। • मध्य प्रदेश में: स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए इन ऐतिहासिक एवं चमत्कारी मंदिरों तक पहुंचना आसान होता है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। सावन के दौरान यहां उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा विशेष इंतजाम किए जाते हैं। • छतरपुर जिले में: बिजावर और नौगांव क्षेत्र के इन प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय बाजारों और परिवहन सेवाओं को आर्थिक लाभ पहुंचता है। जटाशंकर और खजुराहो के इन मंदिरों में आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं। • आम श्रद्धालुओं के लिए: दूर-दराज से आने वाले भक्तों को यात्रा करने से पहले मौसम और स्थानीय परिवहन व्यवस्था की सही जानकारी अवश्य जुटा लेनी चाहिए। कुंडों के जल और मंदिरों की प्राचीन मान्यताओं से जुड़ी आस्था इन यात्राओं को और अधिक सार्थक बनाती है। ऐसा क्यों हुआ छतरपुर के इन प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिरों के निर्माण और उनकी चमत्कारी विशेषताओं के पीछे सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं और शासकों का इतिहास जुड़ा हुआ है। • ऐतिहासिक राजवंशों का योगदान: खजुराहो के कई मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के राजाओं द्वारा 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच कराया गया था, जिसका उद्देश्य धार्मिक संस्कृति और उत्कृष्ट वास्तुकला को बढ़ावा देना था। • प्राकृतिक और भौगोलिक कारण: जटाशंकर धाम जैसी जगहों का पहाड़ी और प्राकृतिक परिवेश में होना भूगर्भीय जल स्रोतों की उपस्थिति के कारण संभव हुआ है, जिससे वहां ठंडे और गर्म पानी के कुंड बने हैं। • लोक मान्यताएं और अनुष्ठान: मतंगेश्वर महादेव मंदिर के शिवलिंग के बढ़ने की कथा और उसकी वृद्धि को रोकने के लिए मंत्रों से कील स्पर्श कराने जैसी पुरानी किंवदंतियां स्थानीय संस्कृति का अहम हिस्सा रही हैं। सवाल-जवाब 1. छतरपुर के अच्चट गांव में कौन सा प्रसिद्ध मंदिर स्थित है? अच्चट गांव की सिद्ध पहाड़ी पर लगभग 11वीं शताब्दी का 1008 मुखी शिव मंदिर स्थित है। 2. जटाशंकर धाम को किस अन्य नाम से जाना जाता है? छतरपुर की बिजावर तहसील में स्थित जटाशंकर धाम को केदारनाथ मंदिर भी कहा जाता है। 3. जटाशंकर धाम के कुंडों की क्या मान्यता है? इन कुंडों के पानी में स्नान करने से बड़े से बड़ा चर्म रोग दूर हो जाता है, ऐसी मान्यता है। 4. खजुराहो के दूल्हा देव मंदिर का निर्माण किसने कराया था? दूल्हा देव मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के राजा मदन वर्मन ने 1130 ईस्वी में करवाया था। 5. दूल्हा देव मंदिर के शिवलिंग की क्या विशेषता है? इस शिवलिंग की सतह पर 999 छोटे लिंग उकेरे गए हैं, जिनकी एक परिक्रमा 1000 परिक्रमाओं के बराबर मानी जाती है। 6. मतंगेश्वर महादेव मंदिर के शिवलिंग की कुल लंबाई कितनी है? यह शिवलिंग कुल 18 फीट का है, जिसमें 9 फीट हिस्सा ऊपर और 9 फीट नीचे स्थित है। 7. मतंगेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कब हुआ था? इस मंदिर का निर्माण 8-9वीं शताब्दी के दौरान हुआ था। https://trendkia.com/religion/chhatarpur-ke-in-chamatkari-shiva-templon-mein-hoti-hai-har-manokamna-poori-51658 TrendKia — Har trend, sabse pehle.