# चित्रकूट में विराध राक्षस का हुआ था वध, जानिए इस ऐतिहासिक स्थान और पवित्र सरोवर का रहस्य

> चित्रकूट में भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान विराध राक्षस का वध किया था और पुष्कर्णी सरोवर में अपने रक्त से सने अस्त्र-शस्त्र धोए थे। यह पौराणिक स्थल आज भी रामायण काल की यादों को समेटे हुए है जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-08-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/chitrakuta-men-viradha-rakshasa-ka-hua-tha-vadha-janie-isa-aitihasika-sthana-aura-pavitra-sarovara-ka-rahasya-23991 · **Language:** Hindi
**Tags:** चित्रकूट, रामायण, पुष्कर्णी सरोवर, भगवान श्रीराम, विराध राक्षस

धर्म नगरी के रूप में प्रसिद्ध चित्रकूट भगवान श्रीराम की पावन तपोस्थली है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रभु श्रीराम ने अपने चौदह वर्ष के वनवास काल में से साढ़े ग्यारह वर्ष इसी क्षेत्र में व्यतीत किए थे। इस दौरान वे कई ऐसे स्थानों पर पहुंचे, जिनका आज भी अत्यधिक धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।

## विराध राक्षस का वध और उसकी शक्तियां
वनवास के समय चित्रकूट में ही श्रीराम का सामना एक अत्यंत शक्तिशाली और भयानक राक्षस से हुआ था, जिसका मुख कुत्ते के समान था। इस दैत्य को ब्रह्माजी से यह वरदान मिला था कि संसार का कोई भी अस्त्र-शस्त्र उसका वध नहीं कर सकता है, जिसके कारण वह बेहद निर्भीक और ताकतवर हो गया था।

## माता सीता का अपहरण और भयंकर युद्ध
शास्त्रों और चित्रकूट के स्थानीय पुजारी सचिन के अनुसार, इसी विराध राक्षस ने एक अवसर पर माता सीता का अपहरण कर लिया था। इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने मिलकर उस दैत्य के साथ भीषण युद्ध किया। अंततः दोनों भाइयों ने उसे परास्त कर घायल अवस्था में ही भूमि में गाड़कर मार डाला। इस भयंकर संघर्ष के दौरान श्रीराम और लक्ष्मण के वस्त्र तथा उनके अस्त्र-शस्त्र खून से पूरी तरह सन गए थे।

## पुष्कर्णी अमृत सरोवर का धार्मिक महत्व
पुजारी सचिन ने जानकारी दी कि युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने टिकारिया गांव के समीप स्थित पुष्कर्णी अमृत सरोवर में अपने रक्त से रंगे वस्त्रों और अस्त्र-शस्त्रों को धोया था। धार्मिक दृष्टि से इस सरोवर का बहुत बड़ा महत्व है और इसका वर्णन कई प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। यह पावन स्थान सीधे तौर पर रामायण काल की घटनाओं से जुड़ा हुआ है।

## सरोवर से जुड़ी मान्यताएं और वर्तमान स्थिति
आज भी लोगों में ऐसी गहरी आस्था है कि यदि अनजाने में किसी कुत्ते की हत्या हो जाए, तो उसका पाप इस सरोवर में स्नान करने से धुल जाता है। यही कारण है कि देश के दूर-दराज के इलाकों से भक्त यहां खिंचे चले आते हैं। यह स्थल आज भी उस ऐतिहासिक प्रसंग की याद दिलाता है जब भगवान राम ने टिकरिया के पास विराध राक्षस का अंत किया था। इस पुष्कर्णी सरोवर में वर्षभर पानी भरा रहता है और इसके पास बने मंदिर के नक्शे में भी इस बात को दर्शाया गया है कि प्रभु श्री राम यहां पधारे थे।

## कैसे पहुंचे इस ऐतिहासिक स्थल तक
यदि आप भी इस पौराणिक और ऐतिहासिक स्थल के दर्शन करना चाहते हैं, तो आपको चित्रकूट के मानिकपुर रेलवे जंक्शन पर उतरना होगा। वहां से ऑटो या टैक्सी बुक करके आप आसानी से पुष्कर्णी सरोवर पहुंच सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आप इसके आसपास स्थित तुलसी वॉटरफॉल, रानीपुर टाइगर रिजर्व और अन्य प्राचीन मठ-मंदिरों की यात्रा भी कर सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह धार्मिक और पर्यटन स्थल से जुड़ी जानकारी है जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं को प्रभावित करती है।

- **भारत में:** देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को रामायणकालीन स्थलों की जानकारी मिलती है जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
- **चित्रकूट में:** स्थानीय क्षेत्र और टिकरिया गांव के आसपास पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होती है, जिससे स्थानीय कारोबारियों और परिवहन चालकों को लाभ पहुंचता है।

## सवाल-जवाब

### 1. चित्रकूट में भगवान श्रीराम ने कितने वर्ष बिताए थे?
भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के साढ़े ग्यारह वर्ष चित्रकूट में बिताए थे।

### 2. विराध राक्षस की क्या विशेषता थी?
विराध राक्षस का मुख कुत्ते जैसा था और उसे ब्रह्माजी से यह वरदान मिला था कि कोई भी अस्त्र-शस्त्र उसे मार नहीं सकता।

### 3. भगवान श्रीराम ने अस्त्र-शस्त्र कहां धोए थे?
भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने टिकारिया गांव के पास स्थित पुष्कर्णी अमृत सरोवर में अपने खून से सने वस्त्र और अस्त्र-शस्त्र धोए थे।

### 4. पुष्कर्णी सरोवर जाने के लिए सबसे पास का रेलवे स्टेशन कौन सा है?
इस स्थान तक पहुंचने के लिए चित्रकूट का मानिकपुर रेलवे जंक्शन सबसे नजदीक है।

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