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  "type": "article",
  "title": "छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाना होता है फलदायी, जानिए सही समय और पूजा के जरूरी नियम",
  "summary": "छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी के मौके पर दीपदान का विशेष महत्व माना गया है। जानिए इस दिन कितने दीये जलाने चाहिए, सही समय क्या है और दीये कहां-कहां रखने चाहिए।",
  "content": "कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाता है, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस खास दिन पर शाम के समय घर की नाली के पास या मुख्य द्वार के बाहर एक विशेष दीया प्रज्वलित किया जाता है। इस दीपक को मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जलाया जाता है, जिसके पीछे यह विश्वास है कि इससे परिवार के किसी भी सदस्य पर अकाल मृत्यु का संकट नहीं मंडराता और नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस पावन पर्व पर तेल की मालिश करके स्नान करने की भी प्राचीन परंपरा चली आ रही है।\n\n \n\nनरक चतुर्दशी पर स्नान और तेल मालिश का महत्व\n धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि चतुर्दशी तिथि के दिन माता लक्ष्मी तैल यानी तेल में और पवित्र गंगा जल में वास करती हैं। यही वजह है कि इस दिन सुबह के समय तेल लगाकर स्नान करने का विधान है, जिससे साधक पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है। इस दिन केवल स्नान और उबटन का ही नहीं बल्कि दीप जलाने का भी बहुत बड़ा धार्मिक महत्व होता है। लोग अपने घरों को रोशन करते हैं और बुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए कई जगहों पर दीपदान करते हैं।\n\n \n\nछोटी दिवाली 2026 दीये जलाने का शुभ मुहूर्त\n पंचांग के अनुसार छोटी दिवाली के दिन संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करने का शुभ मुहूर्त 7 नवंबर 2026 को शाम 05:32 बजे से शुरू होकर रात 08:09 बजे तक रहेगा। इस समयावधि के भीतर दीपदान करना अत्यंत फलदायी और शुभ माना जाता है।\n\n \n\nछोटी दिवाली पर कितने दीये जलाने चाहिए?\n सामान्य तौर पर छोटी दिवाली के अवसर पर अपनी श्रद्धा के अनुसार जितने चाहें उतने दीपक जलाए जा सकते हैं, लेकिन शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार इस दिन कम से कम 14 दीये तो जरूर प्रज्वलित करने चाहिए। इन चौदह दीयों के अलावा एक अतिरिक्त दीपक मृत्यु के देवता यमराज के नाम का अलग से जलाया जाता है, जिसका विशेष विधान है।\n\n \n\nघर में इन 14 जगहों पर रखें दीपक\n  - घर के मुख्य द्वार पर दीया रखें\n - पूजा स्थल या मंदिर में प्रज्वलित करें\n - दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक रखें\n - अध्ययन कक्ष यानी स्टडी रूम में जलाएं\n - अपने कार्यस्थल पर दीप रखें\n - किसी पवित्र वृक्ष के समीप प्रज्वलित करें\n - घर के बाहर मुख्य परिसर में रखें\n - रसोई घर यानी किचन में जलाएं\n - घर के आंगन में दीप रखें\n - तुलसी के पौधे के पास रखें\n - घर की छत पर दीया जलाएं\n - खिड़कियों के पास रखें\n - जल स्रोत के पास दीप रखें\n - अन्न भंडार या अनाज के पास रखें\n\n \n\nदीपदान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम\n  - दीपक प्रज्वलित करने के लिए हमेशा पारंपरिक मिट्टी के दीयों का ही उपयोग करना चाहिए।\n - दीपदान हमेशा प्रदोष काल के दौरान ही करना चाहिए क्योंकि यह समय पूजा-पाठ और दीये जलाने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।\n - छोटी दिवाली की शाम को मृत्यु के देवता यमराज के नाम का एक दीपक अनिवार्य रूप से जलाना चाहिए, जिसे या तो मुख्य द्वार के बाहर रखा जाता है या फिर नाली के पास स्थापित किया जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nछोटी दिवाली के दिन सही समय और नियमों के अनुसार दीपदान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।\n\n\t- दीपक जलाने का समय: 7 नवंबर 2026 को शाम 05:32 बजे से रात 08:09 बजे के बीच ही दीपदान करना सबसे उत्तम और फलदायी रहेगा।\n• दीयों की संख्या: इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार कितने भी दीये जलाएं, लेकिन कम से कम 14 दीये और एक यमराज का दीया जरूर प्रज्वलित करें।\n• सही दिशा और स्थान: दक्षिण दिशा में यम के निमित्त दीया रखने और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।\n• मिट्टी के दीये: पूजा और दीपदान के लिए हमेशा पारंपरिक मिट्टी से बने दीपों का ही उपयोग करना चाहिए, प्लास्टिक या अन्य धातुओं से बचें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nछोटी दिवाली पर यमराज के नाम का दीया जलाने और 14 दीपक रखने की परंपरा प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इन अनुष्ठानों के पीछे मुख्य उद्देश्य परिवार की रक्षा करना और पूर्वजों या देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करना है।\n\n\t- अकाल मृत्यु से रक्षा: यमराज के निमित्त नाली या मुख्य द्वार के पास दीया जलाने की मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के खतरे से मुक्ति मिलती है।\n• माता लक्ष्मी का वास: शास्त्रों में कहा गया है कि चतुर्दशी के दिन तेल और जल में लक्ष्मी जी का वास होता है, इसलिए इस दिन तेल मालिश कर स्नान करने का विधान है।\n• प्रदोष काल का महत्व: प्रदोष काल को पूजा-पाठ और दीप जलाने के लिए सबसे पवित्र समय माना गया है क्योंकि इस बेला में सकारात्मक शक्तियां प्रबल होती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. छोटी दिवाली 2026 कब है?\nछोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 7 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।\n\n2. छोटी दिवाली पर दीये जलाने का शुभ समय क्या है?\nदीपक जलाने का शुभ समय 7 नवंबर 2026 की शाम 05:32 बजे से रात 08:09 बजे तक रहेगा।\n\n3. छोटी दिवाली पर कम से कम कितने दीये जलाने चाहिए?\nइस दिन कम से कम 14 दीये और एक यमराज का दीया जरूर जलाना चाहिए।\n\n4. यमराज का दीया कहां रखना चाहिए?\nयमराज के नाम का दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर या नाली के पास रखना चाहिए।\n\n5. किस प्रकार के दीयों का उपयोग करना चाहिए?\nदीपदान के लिए हमेशा पारंपरिक मिट्टी के दीपक का ही उपयोग करना चाहिए।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-11-08",
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