सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ी भीड़, जलाभिषेक के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान सावन के पहले सोमवार पर देशभर में शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। पूजा के दौरान कुछ खास नियमों और वर्जित चीजों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। सावन के पहले सोमवार के पावन अवसर पर आज पूरे देश के प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। देश के विभिन्न शिवालयों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज रहा है। हिन्दू धर्म में सावन के इस पवित्र महीने के पहले सोमवार को भगवान शिव की आराधना के लिए अति विशिष्ट माना गया है। ऐसी गहरी धार्मिक मान्यता है कि इस खास दिन पर जो भी भक्त पूरी निष्ठा के साथ भोलेनाथ की पूजा और जलाभिषेक करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हालांकि, शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार महादेव की पूजा करते समय कुछ ऐसी छोटी-छोटी बातें हैं, जिनका ध्यान रखना बहुत जरूरी है अन्यथा पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें शिवलिंग की पूजा के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भगवान शिव को कभी भी हल्दी, सिंदूर या कुमकुम अर्पित नहीं किया जाना चाहिए। ये सामग्रियां आमतौर पर देवी पूजन में उपयोग की जाती हैं, जबकि महादेव के अभिषेक के लिए जल, कच्चा दूध, दही, शहद, पवित्र गंगाजल और ताजे बेलपत्र को ही सबसे ज्यादा शुभ माना गया है। इसके अलावा शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते भी कभी नहीं चढ़ाने चाहिए क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की आराधना में तुलसी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित माना गया है। साथ ही केतकी यानी केवड़ा का फूल भी महादेव को अर्पित करने की मनाही है। बेलपत्र चढ़ाने के नियम और जलाभिषेक की विधि भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र अर्पित करते समय भी कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी आवश्यक होती हैं। बेलपत्र हमेशा तीन पत्तियों वाला होना चाहिए जो पूरी तरह साफ और कहीं से भी कटा-फटा न हो। ध्यान रखें कि सूखे हुए, कीड़े लगे या खंडित बेलपत्र कभी भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाने चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय हमेशा यह देखना चाहिए कि उसकी चिकनी सतह सीधे शिवलिंग की तरफ स्पर्श करे। इसके अलावा, जलाभिषेक करते समय कभी भी जल्दबाजी या हड़बड़ी नहीं दिखानी चाहिए। शांत मन से ॐ नमः शिवाय मंत्र का सस्वर जाप करते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करना सबसे उत्तम माना जाता है। पूजा कभी भी दिखावे के लिए नहीं बल्कि सच्ची श्रद्धा के साथ की जानी चाहिए। दूध से अभिषेक के बाद क्या करें और किन बातों से बचें यदि आप सावन के पहले सोमवार पर शिवलिंग का दूध से अभिषेक कर रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है कि दूध अर्पित करने के तुरंत बाद शुद्ध जल से भी अभिषेक अवश्य करें, जिससे शिवलिंग की शुद्धि हो सके। इसके अलावा अभिषेक में इस्तेमाल किए गए जल या दूध को इधर-उधर फर्श पर नहीं फैलने देना चाहिए और अपने आसपास के पूरे पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। सावन के इस पावन व्रत के दौरान सात्विकता का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इस दिन किसी पर भी गुस्सा करने, झूठ बोलने, अपशब्दों का प्रयोग करने या किसी का भी अपमान करने से बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि केवल विधि-विधान से पूजा करने से ही नहीं, बल्कि मनुष्य के अच्छे आचरण और संयम से भी भोलेनाथ अति प्रसन्न होते हैं। भीड़भाड़ में संयम रखें और घर पर करें पूजा यदि मंदिर में बहुत अधिक भीड़ हो, तो वहां किसी भी प्रकार की धक्का-मुक्की करने या अन्य भक्तों की पूजा में बाधा उत्पन्न करने से बचना चाहिए। अपनी बारी आने का धैर्यपूर्वक इंतजार करें और शांति के साथ दर्शन करके नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें। यदि किन्हीं कारणों से आपका मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करना संभव न हो पाए, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आप अपने घर पर ही रहकर पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का ध्यान कर सकते हैं, उनके मूल मंत्रों का जाप कर सकते हैं और शिव चालीसा का पाठ कर के भी वैसा ही पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। इसका आप पर असर भारत में: सावन के पहले सोमवार पर मंदिरों में भारी भीड़ के दौरान अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखें, तथा नियमों के अनुसार ही पूजा संपन्न करें। सवाल-जवाब 1. सावन का पहला सोमवार क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है? इस दिन भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने और जलाभिषेक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 2. शिवलिंग पर कौन सी चीजें नहीं चढ़ानी चाहिए? शिवलिंग पर कभी भी हल्दी, सिंदूर, कुमकुम, तुलसी के पत्ते और केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। 3. बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका क्या है? बेलपत्र हमेशा तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा हुआ होना चाहिए तथा उसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर होनी चाहिए। 4. दूध से अभिषेक करने के बाद क्या करना चाहिए? दूध से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर साफ जल अवश्य चढ़ाना चाहिए ताकि उसकी शुद्धि हो सके। 5. यदि मंदिर जाना संभव न हो तो क्या करें? मंदिर न जा पाने की स्थिति में घर पर ही भगवान शिव का ध्यान, मंत्र जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जा सकता है। https://trendkia.com/religion/devotees-flock-to-temples-on-first-monday-of-sawan-essential-ritual-rules-to-follow-13390 TrendKia — Har trend, sabse pehle.