धनतेरस पर क्यों है झाड़ू खरीदने की परंपरा, जानिए क्या कहता है शास्त्र वाराणसी के ज्योतिषाचार्य स्वामी कन्हैया महाराज के अनुसार धनतेरस और दिवाली पर झाड़ू खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और माता लक्ष्मी का वास होता है। दीपावली के महापर्व की शुरुआत धनतेरस के पावन अवसर से होती है। इस दिन लोग सोने-चांदी के आभूषणों के साथ-साथ बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन जैसी तमाम चीजें खरीदते हैं। इन सभी पारंपरिक और आधुनिक खरीद के बीच, माता लक्ष्मी से जुड़ी एक खास वस्तु की खरीदारी का भी विशेष विधान है जिसके बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है। झाड़ू खरीदने का धार्मिक महत्व वाराणसी के ज्योतिषाचार्य स्वामी कन्हैया महाराज ने इस परंपरा के बारे में विस्तार से बताया है। उनके अनुसार, धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए झाड़ू की खरीदारी अवश्य करनी चाहिए। इस पावन दिन नया झाड़ू घर लाने से मां लक्ष्मी स्वयं खिंची चली आती हैं। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक, झाड़ू को साक्षात धन की देवी माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और इसमें उनका वास होता है। केवल धनतेरस ही नहीं, बल्कि दीपावली के दिन भी नया झाड़ू खरीदने की लोक मान्यता बहुत पुरानी है। यही कारण है कि लोग इन दोनों खास अवसरों पर झाड़ू खरीदना कभी नहीं भूलते हैं। नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का नाश नया झाड़ू खरीदकर घर लाने से घर के भीतर मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। इसके साथ ही घर से आर्थिक तंगी और दरिद्रता भी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। ऐसा होने से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार तेजी से बढ़ता है। हालांकि, इस प्रक्रिया से जुड़ा एक जरूरी नियम यह है कि नया झाड़ू घर आने के बाद पुराने और टूटे-फूटे झाड़ू को तुरंत बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। पुराने झाड़ू को हटाने का सही समय यदि आप धनतेरस के शुभ अवसर पर नया झाड़ू खरीद रहे हैं, तो इसके ठीक अगले दिन यानी नरक चतुर्दशी के मौके पर पुराने झाड़ू को घर से बाहर कर देना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, जो लोग दीपावली के दिन नया झाड़ू खरीदते हैं, उन्हें उसके अगले दिन यानी गोवर्धन पूजा या प्रतिपदा के दिन दिन के समय पुराने झाड़ू को किसी साफ-सुथरी जगह पर रख देना चाहिए। झाड़ू रखने के खास नियम स्वामी कन्हैया महाराज ने यह भी स्पष्ट किया है कि घर में झाड़ू को हमेशा ऐसी सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए जहां आने-जाने वाले लोगों की नजर आसानी से न पड़े। इसके अलावा, झाड़ू को कभी भी फेंक कर या लापरवाही से उल्टा-पुल्टा करके नहीं रखना चाहिए। झाड़ू को हमेशा घर के किसी साफ-सुथरे कोने में ही जगह देनी चाहिए। यदि आप झाड़ू को गलत तरीके से रखते हैं, तो इससे घर में मां लक्ष्मी की नाराजगी बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है। इसका आप पर असर धनतेरस और दीपावली पर झाड़ू खरीदने से जुड़ी यह परंपरा हर उस परिवार के लिए महत्वपूर्ण है जो सनातन मान्यताओं के अनुसार त्योहारी खरीदारी करते हैं। • भारत में: देशभर के करोड़ों परिवारों के लिए यह परंपरा घर की साफ-सफाई और सकारात्मक ऊर्जा के संचार से जुड़ी है। सही नियमों का पालन करने से आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। • वाराणसी में: स्थानीय निवासियों और खरीदारों के लिए बाजारों में झाड़ू की विशेष मांग बढ़ जाती है और लोग ज्योतिषीय नियमों के अनुसार ही पुराने झाड़ू को बदलते हैं। ऐसा क्यों हुआ धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन शास्त्रों के अनुसार झाड़ू को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। त्योहारों के मौसम में लोग अपने घरों से नकारात्मकता को दूर करने के लिए विशेष उपाय अपनाते हैं। • शास्त्रीय मान्यता: ग्रंथों में उल्लेख है कि झाड़ू में दरिद्रता का नाश करने की शक्ति होती है और यह घर में लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करती है। • ऊर्जा का संतुलन: पुराने और टूटे हुए सामान को घर में रखना वास्तु के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है, इसलिए त्योहारों पर नया सामान लाकर पुराना हटाने का विधान है। सवाल-जवाब 1. धनतेरस पर झाड़ू क्यों खरीदी जाती है? धनतेरस पर झाड़ू खरीदना इसलिए शुभ माना जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इसमें माता लक्ष्मी का वास होता है और इससे घर की दरिद्रता दूर होती है। 2. पुराना झाड़ू घर से कब बाहर निकालना चाहिए? धनतेरस पर खरीदे गए नए झाड़ू के बाद पुराना झाड़ू नरक चतुर्दशी के दिन घर से बाहर करना चाहिए, जबकि दिवाली पर खरीदे जाने पर उसके अगले दिन बाहर रखना चाहिए। 3. घर में झाड़ू कहां रखनी चाहिए? झाड़ू को हमेशा घर के साफ-सुथरे कोने में ऐसी जगह रखना चाहिए जहां लोगों की नजर आसानी से न पड़े और इसे कभी उल्टा या फेंक कर नहीं रखना चाहिए। 4. झाड़ू से जुड़ी क्या धार्मिक मान्यता है? मान्यता है कि नया झाड़ू घर लाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा के साथ माता लक्ष्मी का आगमन होता है। https://trendkia.com/religion/dhanteras-par-kyon-hai-jhadu-kharidne-ki-parampara-57120 TrendKia — Har trend, sabse pehle.